Questions

4 अंकों के प्रश्न

Take a timed test

3 questions · self-marked practice — reveal the answer and mark yourself.

Question 14 Marks
नाइट्रोजन नाभिक ${ }^{14}{ }_7 N$ की बंधन ऊर्जा MeV में ज्ञात कीजिए।
जहाँ$\quad$$m_{ N }=14.00307 u$
Answer
बंभ ऊर्जा- उस ऊर्जा को कहते हैं जो किसी नाभिक को उसके प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों में तोड़ने में लगती है। इसे निम्नलिखित सूत्र से ज्ञात किया जाता है-
B.E. $=\left[ Z m_p+( A - Z ) m_n-m_{ N }\right] \times 931.5 MeV$
जहाँ, $Z =7$ ( प्रोटॉनों की संख्या)
$A =14$ (द्रव्यमान संख्या)
$m_p=1.00728, u$ (प्रोटॉन का द्रव्यमान)
$m_n=1.00866, u$ (न्यूट्रॉन का द्रव्यमान)
$m_{ N }=14.00307, u$ ( नाभिक का द्रव्यमान)
$931.5, MeV =1 u$ के बराबर ऊर्जा
चरण 1. कुल न्यूक्लियॉन द्रव्यमान- $= Z \cdot m_p+( A - Z ) \cdot m_n=7 \cdot 1.00728+7.1 .00866$
$=7.05096+7.06062=14.11158 v$
चरण 2. द्रव्यमान दोष
$\Delta m=14.11158-14.00307$
$=0.10851 u$
चरण 3. बंधन ऊर्जा- Β.Ε.=0.10851 x 931.5
$\approx 101.08 MeV$
नाइट्रोजन नाभिक ${ }_7^{14} N$ की बंधन ऊर्जा लगभग 101.08 MeV है।
View full question & answer
Question 24 Marks
नाभिकीय संलयन एवं विखण्डन की एक-एक उदाहरण की सहायता से व्याख्या कीजिए।
Answer
नाभिकीय विखण्डन -जब किसी भारी नाभिक पर न्यूट्रॉनों से बमबारी की जाती है, तो वह नाभिक दो लगभग समान द्रव्यमान वाले हल्के नाभिकों में विभाजित हो जाता है।
उदाहरण- जब ${ }_{92}^{235} U$ नाभिक से एक मंदगामी न्यूट्रॉन टकराता है, तो ${ }_{92}^{235} U$ इसको अवशोषित करके एक अत्यन्त अस्थायी आइसोटोप ${ }_{92}^{236} U$ में बदल जाता है। यह नाभिक ${ }_{56}^{144} Ba$ तथा ${ }_{36}^{89} Kr$ नाभिकों में टूट जाता है तथा तीन नये न्यूट्रॉन व अत्यधिक ऊर्जा मुक्त होती है।
Image
मुक्त ऊर्जा का स्रोत—इस प्रक्रिया में प्राप्त नाभिकों ( ${ }_{56}^{144} Ba$ तथा ${ }_{36}^{89} Kr$ ) के द्रव्यमानों तथा तीन न्यूट्रॉनों के द्रव्यमानों का योग मूल नाभिक तथा उस पर बमचारित न्यूट्रॉन के द्रव्यमानों के योग से कम होता है। द्रव्यमान की यह क्षति आइन्स्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जां सम्बन्ध $\left[\Delta E =(\Delta m) c^2\right]$ के अनुसार ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है। यही ऊर्जा इस प्रक्रिया में मुक्त होती है।
नाभिकीय संलयन -जब दो या दो से अधिक हल्के नाभिक अत्यधिक उच्च ताप और दाब की स्थिति में आपस में मिलकर एक भारी नाभिक का निर्माण करते हैं, तो इस प्रक्रिया को नाभिकीय संलयन कहा जाता है। इस प्रक्रिया में बहुत अधिक ऊर्जा मुक्त होती है।
उदाहरण- जब भारी हाइड्रोजन अर्थात् ड्यूटीरियम
Image
अतः ड्यूटीरियम के तीन नाभिक संलयित होकर हीलियम के नाभिक का निर्माण करते हैं और 21.6 MeV ऊर्जा मुक्त होती है।
नाभिकीय संलयन व्यवहार में एक अत्यन्त कठिन प्रक्रिया है। इसका कारण यह है कि संलयित होने वाले (धनोवेशित) नाभिक जब एक-दूसरे के बहुत निकट आने लगते हैं, तो उनके बीच विद्युत् प्रतिकर्षण बल अत्यन्त तीव्र होता जाता है इस बल के विरूद्ध संलयित होने के लिए उन्हें बहुत अधिक ऊर्जा चाहिए उन्हें इतनी अधिक ऊर्जा देने के लिए अति उच्च ताप $\left(\approx 10^8 K\right)$ तथा अति उच्च दाब आवश्यक है।

View full question & answer
Question 34 Marks
रदरफोर्ड नाभिकीय मॉडल की दो कमियाँ लिखिए एवं व्याख्या कीजिए कि हाइड्रोजन परमाणु के बोर मॉडल ने इन कमियों को कैसे दूर किया?
View full question & answer