Question 14 Marksप्रकाश-विद्युत् प्रभाव क्या है? इसके नियम लिखिए तथा उनके प्रायोगिक सत्यापन का वर्णन कीजिए।###प्रकाश-विद्युत् प्रभाव के तीन प्रायोगिक प्रेक्षण लिखिए।Answerप्रकाश-विद्युत् प्रभाव- जब किसी धातु की सतह पर कम तरंगदैर्ध्य वाली दृश्य प्रकाश किरणें आपतित होती हैं, तो उस सतह से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होने लगते हैं। इस घटना को ही प्रकाश-विद्युत् प्रभाव कहा जाता है।धातु से उत्सर्जित इन इलेक्ट्रॉनों को फोटो-इलेक्ट्रॉन कहा जाता है, तथा उनसे उत्पन्न विद्युत धारा को प्रकाश-विद्युत् धारा कहते हैं।प्रकाश-विद्युत् उत्सर्जन के नियम-(i) प्रत्येक धातु के लिए एक न्यूनतम आवृत्ति (देहली आवृत्ति) आवश्यक होती है, जिससे कम आवृत्ति का प्रकाश फोटो-इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित नहीं कर सकता, चाहे उसकी तीव्रता कितनी भी अधिक हो।(ii) उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा, आपतित प्रकाश की आवृत्ति के सीधे अनुपाती होती है।(iii) उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की संख्या, आपतित विकिरण की तीव्रता के अनुपाती होती है।(iv) जैसे ही उपयुक्त विकिरण धातु की सतह पर आपतित होता है, इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन तत्काल शुरू हो जाता है;इसमें कोई विलंब नहीं होता।प्रकाश-विद्युत् उत्सर्जन के नियमों का प्रायोगिक सत्यापन- प्रकाश-विद्युत् उत्सर्जन के नियमों के प्रायोगिक सत्यापन हेतु प्रयोगात्मक व्यवस्था चित्र में दर्शाई गई है। इस व्यवस्था में जब कैथोड पर प्रकाश डाला जाता है, तो निम्नलिखित प्रेक्षण प्राप्त होते हैं-1. समान तीव्रता का विभिन्न आवृत्तियों वाला प्रकाश प्रयोग में लाने पर परिपथ में प्रवाहित धारा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन जब प्रकाश की आवृत्ति एक निश्चित न्यूनतम (देहली आवृत्ति) से कम होती है, तो परिपथ में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती। इससे नियम (1) सत्यापित होता है।2. जब समान तीव्रता के, परन्तु बढ़ती आवृत्ति के प्रकाश को कैथोड पर डाला जाता है, तो परिपथ में प्रवाहित धारा को शून्य करने के लिए आवश्यक निरोधी विभव का मान बढ़ता है। यह दर्शाता है कि इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा, प्रकाश की आवृत्ति के साथ बढ़ती है। इस प्रकार नियम (2) सिद्ध होता है।3. आपतित प्रकाश की तीव्रता बढ़ाने पर परिपथ में प्रवाहित धारा भी बढ़ती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अधिक तीव्रता के प्रकाश से अधिक संख्या में इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। यह नियम (3) की पुष्टि करता है।4. जैसे ही कैथोड पर उपयुक्त प्रकाश आपतित होता है, तुरन्त परिपथ में धारा प्रवाहित होने लगती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन में कोई विलम्ब नहीं होता। इससे नियम (4) भी सत्यापित होता है।View full question & answer→