लाभ :
1. कीटनाशकों पर निर्भरता कम: ये फसलें स्वयं कीट-प्रतिरोधी होती हैं (जैसे Bt कपास), जिससे रसायनों का उपयोग कम होता है।
2. पोषण स्तर में वृद्धि: फसलों की गुणवत्ता बढ़ती है, जैसे विटामिन 'ए' से भरपूर 'गोल्डन राइस'।
3. अजैविक प्रतिबल सहनशीलता: ये फसलें सूखे, ठंडे और लवणता के प्रति अधिक सहनशील होती हैं।
हानि :
1. स्वास्थ्य पर प्रभाव: मानव शरीर में एलर्जी होने की संभावना बनी रहती है।
2. पर्यावरण पर प्रभाव: इन फसलों के परागकण खरपतवारों में जाकर 'सुपरवीड' बना सकते हैं, जिन्हें नष्ट करना कठिन होता है।
3. पारिस्थितिक तंत्र में असंतुलन: ये फसलें उन कीटों को भी मार सकती हैं जो पर्यावरण के लिए लाभदायक हैं।