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Question 14 Marks
निम्नलिखित को संक्षेप में समझाइए - (1) बायोपायरेसी, (2) बायोपोटेंट।
Answer
(1) बायोपायरेसी- आज विश्व में बहुत से ऐसे संगठन एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ आ गई हैं जो किसी देश विशेष में पाये जाने वाले जैविक संसाधनों का बिना किसी अधिकार के दोहन कर रही हैं इसे बायोपाइरेसी कहते हैं। ये जैव संसाधनों का अनाधिकृत उपयोग है। इसके अंतर्गत बिना किसी सूचना के जैविक संसाधनों का संग्रह करने के बाद में उपयोगी उत्पादों को व्यावसायिक स्तर पर तैयार करने में किया जाता है। इसके अंतर्गत, पौधे, जंतु, सूक्ष्मजीव तथा आनुवंशिक पदार्थ आते हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ इसका अधिकाधिक लाभ ले रही हैं और स्थानीय समुदाय को इस लाभ से वंचित कर रहे हैं। इस पर नियंत्रण रखना आवश्यक हो गया है।
(2) बायोपोटेंट - आज बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ बायोपाइरेसी के द्वारा जैविक संसाधनों का दुरुपयोग कर रही हैं जिसके कारण खोजकर्ताओं को उनके अनुसंधान कार्य का लाभ नहीं मिल पाता है। इसे रोकने के लिए ही बायोपोटेन्ट प्रारंभ किया गया है। इसके अन्तर्गत अन्वेषण का एक विशिष्ट समय तक लाभ दिलाने, उनके द्वारा उत्पादित सामग्री के उत्पादन, दोहन, उपयोग तथा विक्रय संबंधी अधिकार प्रदान किया जाता है।
आज विभिन्न उत्पादों का उत्पादन करने वाली कंपनियों को उत्पादन एवं टेक्नोलॉजी तैयार करने का अधिकार दिया जाता है जिसके द्वारा वे अपनी तकनीक एवं उत्पाद का उपयोग करते हैं। ये कंपनियाँ बाजार में अपना प्रतिद्वंद्वी रोकने के लिए पोटेन्ट का सहारा लेती हैं। पोटेन्ट के कारण ये कंपनियाँ अत्यधिक लाभ कमाती हैं तथा उनकी तकनीक का उपयोग करने वाले से बड़ी रॉयल्टी वसूलती है। बहुत-सी कंपनियाँ अनाधिकृत बायोपोटेन्ट भी करवा लेती हैं जिसके कारण विकासशील देशों को अत्यधिक हानि होती है। इसी कारण आज विश्व में जैव पाइरेसी एवं बायोपोटेन्ट के विरुद्ध संघर्ष की स्थिति आ गई है क्योंकि जैव संसाधन के प्रमुख या धारक तथा किसानों एवं स्थानीय लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।
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Question 24 Marks
जीन चिकित्सा क्या है? एडीनोसीन डीएमीनेज की कमी का उदाहरण देते हुए इसका सचित्र वर्णन कीजिए।
Answer
आनुवंशिक रोगों (उपापचय की जन्मजात विसंगति से सम्बन्धित रोगों) का उपचार सामान्य रूप से कार्यशील जीन की रोगी की कोशिकाओं में प्रविष्टि द्वारा करना, जीन थेरेपी कहलाता है। इन रोगों के उपचार का सिद्धान्त यह है कि विकारयुक्त या त्रुटिपूर्ण जीन को सामान्य जीन द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया जाय।
इसका एक उदाहरण ADA की कमी का उपचार है। ADA की कमी मनुष्य में स्किड - सीवियर कम्वाइंड इम्यूनो डेफिसिएंसी) नामक गम्भीर रोग पैदा कर देती है। यह रोग एन्जाइम एडीनोसीन डीएमीनेज को कोड करने वाली जीन के विलोपन से होता है। रोग में शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र बहुत कमजोर हो जाता है। रोग का उपचार हॉर्मोन प्रतिस्थापन चिकित्सा (हॉर्मोनल रिप्लेसमेंट थेरेपी) से किया जाता है। कुछ रोगियों में अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण भी किया जाता है। लेकिन दोनों ही उपचार स्थायी नहीं हैं इनको बार-बार दोहराना पड़ता है। इसमें रोगी के रक्त से प्राप्त लिम्फोसाइट को शरीर से बाहर सम्बर्धित किया जाता है। रिट्रोवाइरस की मदद से कोशिकाओं में सामान्य प्रकार्यशील ADA को कोडित करने वाले ८-DNA को स्थापित कर दिया जाता है। इन अभियंत्रित कोशिकाओं को पुनः रोगी के शरीर में प्रविष्ट करा दिया जाता है। इन कोशिकाओं की निश्चित जीवन अवधि होती है अतः इन्हें निश्चित समयान्तराल पर पुनः स्थापित करने की आवश्यकता होती है। अगर अस्थि मज्जा कोशिकाओं (स्टेम कोशिकाओं) से यह जीन लेकर उसे प्रारम्भिक भ्रूणीय अवस्था की कोशिकाओं में प्रतिस्थापित कर दिया जाए तो स्थायी लाभ मिल सकता है।
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