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3 अंक प्रश्न

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12 questions · self-marked practice — reveal the answer and mark yourself.

Question 13 Marks
विलोडित हौज बायोरिएक्टर का नामांकित चित्र बनाकर इसकी कार्य प्रणाली लिखिए।
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 23 Marks
अन्तर (भेद) कीजिए -
(i) प्लाप्मिड़ DNA व गुणसूत्रीय DNA
(ii) RNA व DNA
(iii) एक्सोन्यूक्लिएज व एण्डोन्यूक्लिएज
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 33 Marks
निम्न पर टिप्पणी लिखिए -
(i) प्रतिबंधित एन्जाइम
(ii) काइटिनेज
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 43 Marks
क्या आप बता सकते हैं कि प्रतिवेदक (रिपोर्टर) एंजाइम को वरणयोग्य चिन्ह की उपस्थिति में बाहरी DNA को परपोषी कोशिकाओं में स्थानान्तरण के लिये मॉनिटर करने के लिये किस प्रकार उपयोग में लाया जा सकता है?
Answer
DNA द्वारा आदाता (ग्राही) कोशिका में प्रवेश करने का कार्य तभी किया जाता है जब आदाता कोशिका अपने चारों ओर स्थित DNA को धारण करने में सक्षम हो जाती है। यह कार्य अनेक विधियों के द्वारा किया जाता है। यदि पुनर्योगज DNA को जिसमें प्रतिजैविक, जैसे ऐम्पिसिलिन के प्रति प्रतिरोधी जीन स्थित होती है, ई. कोलाई (E. coli) कोशिकाओं में स्थानान्तरित किया जाए तो परपोषी कोशिकाएँ प्रतिरोधी कोशिकाओं में रूपान्तरित हो जाती हैं। यदि रूपान्तरित कोशिकाओं को एगार युक्त प्लेट पर फैलाया जाता है तो केवल रूपान्तरित कोशिकाएँ ही विकसित हो पाती हैं, जबकि अरूपान्तरित आदाता कोशिकाओं की मृत्यु हो जाती है। प्रतिरोधी जीन के कारण कोई भी ऐम्पिसिलिन की उपस्थिति में रूपान्तरित कोशिका का चयन कर सकता है। ऐसे प्रक्रम में प्रतिरोधी जीन को वरणयोग्य चिन्हक कहते हैं।
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Question 53 Marks
अर्धसूत्री विभाजन को ध्यान में रखते हुए क्या आप बता सकते हैं कि पुनर्योगज DNA किस अवस्था में बनते हैं?
Answer
जैसा कि हम जानते हैं कि अर्धसूत्री विभाजन में गुणसूत्रों की संख्या घटकर आधी रह जाती है। प्रथम अर्धसूत्री विभाजन में प्रत्येक जोड़ी के समजात गुणसूत्रों (Homologous Chromosomes) के मध्य एक या अनेक खण्डों की अदला-बदली अर्थात् पारगमन (Crossing Over) होता है।
प्रथम अर्धसूत्री विभाजन की प्रथम पूर्वावस्था (Ist Prophase) की उपअवस्था जाइगोटीन (Zygotene) में समजात गुणसूत्र जोड़े बनते हैं। इसे सूत्रयुग्मक (Synapsis) कहते हैं। पैकिटीन (Pachytene) उपअवस्था में सूत्रयुग्मक सम्मिश्र (Synaptonemal Complex) में एक या अधिक स्थानों पर गोल सूक्ष्म घुण्डियाँ दिखाई देने लगती हैं, इन्हें पुनर्संयोजन घुण्डियाँ (Recombination Nodules) कहते हैं। समजात गुणसूत्रों के परस्पर जुड़े क्रोमेटिड्स (Chromatids) के मध्य एक या अधिक खण्डों की पारस्परिक अदला-बदली को पारगमन कहते हैं। इससे ही समजात पुनर्संयोजित DNA (Recombinant DNA) बन जाता है। पुनर्संयोजन घुण्डियाँ उन स्थानों पर बनती हैं जहाँ पर पारगमन हेतु क्रोमेटिड्स के टुकड़े टूटकर पुनः जुड़ते हैं।
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Question 63 Marks
अच्छी हवा व मिश्रण विशेषता के अतिरिक्त विलोडन हौज बायोरिएक्टर में कौनसी अन्य कम्पन फ्लास्क सुविधाएँ हैं?
Answer
सभी पुनर्योगज प्रौद्योगिकियों का अंतिम उद्देश्य वांछित प्रोटीन का उत्पादन करना होता है। इसके लिये पुनर्योगज DNA के अभिव्यक्त होने की आवश्यकता होती है। बाहरी जीन उपयुक्त परिस्थितियों में अभिव्यक्त होती है। वांछित जीन को क्लोन करने पर लक्ष्य प्रोटीन की अभिव्यक्ति को प्रेरित करने वाली परिस्थितियों को अनुकूलतम बनाने के पश्चात् इनका व्यापक स्तर पर उत्पादन किया जाता है।
उत्पादों की अधिक मात्रा में उत्पादन हेतु बायोरिएक्टर (Bioreactor) की सहायता ली जाती है। बायोरिएक्टर, वांछित उत्पादन हेतु अनुकूलतम परिस्थितियाँ उपलब्ध करता है। अनुकूलतम परिस्थितियों में तापमान, pH, क्रियाधार, लवण, विटामिन, ऑक्सीजन आदि आते हैं। विलोडन हौज बायोरिएक्टर में प्रक्षोभक तंत्र (Agitator System), $O _2$ प्रदाय तंत्र, झाग नियंत्रण तंत्र, तापक्रम तंत्र, पीएच नियंत्रण तंत्र व प्रतिचयन प्रद्वार (Sampling Ports) लगा होता है जिससे संवर्धन की थोड़ी मात्रा समय-समय पर निकाली जा सकती है।
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Question 73 Marks
क्या सुकेन्द्रकी कोशिकाओं में प्रतिबंधन एण्डोन्यूक्लिएज मिलते हैं? अपने उत्तर को सही सिद्ध कीजिए।
Answer
नहीं, सुकेन्द्रकी कोशिकाओं में प्रतिबन्धन एण्डोन्यूक्लिएज नहीं मिलते हैं। ये कुछ जीवाणुओं में उपस्थित रहते हैं। सन् 1963 में ई. कोलाई (E. Coli) से दो एन्जाइम पृथक् किये गये थे। ये जीवाणुभोजी की वृद्धि को रोक देते हैं। इनमें एक एन्जाइम DNA से मेथिल समूह को जोड़ता है, जबकि दूसरा एन्जाइम DNA को काटता है। दूसरे एन्जाइम को प्रतिबन्धन एण्डोन्यूक्लिएज (Restriction Endonuclease) कहते हैं । प्रतिबन्धन एण्डोन्यूक्लिएज का उपयोग आनुवंशिक इन्जीनियरिंग में DNA के पुनर्योगज अणु (Recombinant Molecules of DNA) बनाने में किया जाता है जिसका निर्माण विभिन्न जीनोमों से प्राप्त DNA से मिलकर होता है।
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Question 83 Marks
मानव की एक कोशिका में DNA की मोलर सान्द्रता क्या होगी? अपने अध्यापक से परामर्श लीजिए।
Answer
मोलर सान्द्रता (Molar Concentration) - किसी पदार्थ की सान्द्रता प्रति इकाई आयतन में उसकी मात्रा की माप होती है। इसे सामान्यतया मोलरता (Molarity) के पदों में व्यक्त किया जाता है। किसी पदार्थ की मोलरता एक लीटर आयतन में उपस्थित उसके अणुओं की संख्या होती है। अणुओं की सान्द्रता की गणना निम्न सूत्र से की जा सकती है-
Image
DNA अणु जटिल जैविक वृहदाणु होते हैं। इनका अणुभार $10^6$ से $10^9$ डाल्टन तक होता है। हमारे शरीर में DNA के न्यूक्लियोटाइड का औसत आण्विक द्रव्यमान 130.86 होता है। अतः मानव DNA अणु का आण्विक द्रव्यमान 6 × $10^9$ न्यूक्लियोटाइड (मानव जीवोम प्रोजेक्ट के अनुसार) × 130.86 = 784.56 × $10^9$ g/mol. होगा।
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Question 93 Marks
एक सचित्र (चार्ट) (आरेखित निरूपण के साथ) बनाइए जो प्रतिबंधन एंजाइम को (जिस क्रियाधार DNA पर यह कार्य करता है उसे), उन स्थलों को जहाँ यह DNA को काटता है व इनसे उत्पन्न उत्पाद को दर्शाता है।
Answer
यहाँ ई. कोलाई से प्राप्त EcoRI नामक प्रतिबंधन एन्जाइम का उदाहरण दिया जा रहा है-
Image
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Question 103 Marks
निम्नलिखित के बीच कैसे भेद करेंगे- प्लाज्मिड DNA और गुणसूत्रीय DNA
Answer
प्लाज्मिड DNA और गुणसूत्रीय DNA (Plasmind DNA and Chromosomal DNA)- प्लाज्मिड अतिरिक्त गुणसूत्री रचनाएँ होती हैं जो जीवाणुओं के अन्दर स्वतः गुणित होती रहती हैं। इनका DNA दो सूत्रों का बना, प्रायः गोलाकार (Circular) होता है। इन पर अन्य जीनों के अतिरिक्त प्लाज्मिड की प्रतिकृति करने वाले जीन भी पाए जाते हैं। पुनर्योगज DNA तकनीक में प्रयुक्त प्लाज्मिड में प्रतिजैविक रोधिता वाले जीन भी होते हैं जिनसे पुनर्योगज DNA अणुओं की पहचान सम्भव हो पाती है।
गुणसूत्रों में उपस्थित DNA गुणसूत्रीय DNA होता है। यह भी दो सूत्रों का होता है परन्तु गोलाकार नहीं होता तथा कोशिका के केन्द्रक में होता है। इसमें प्रतिजैविक रोधिता वाले जीन नहीं होते हैं। यह प्लाज्मिड DNA की तुलना में अधिक लम्बा तथा अधिक न्यूक्लियोटाइड युक्त होता है।
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Question 113 Marks
संक्षेप में बताइए - काइटिनेज ।
Answer
काइटिनेज (Chitinase)-DNA को पृथक् करने के लिये प्रतिबंधन एंजाइम का उपयोग लिया जाता है। परन्तु इसमें यह आवश्यक है कि यह DNA दूसरे अन्य वृहत्-अणुओं से मुक्त होकर शुद्ध रूप में होना चाहिये। हम जानते हैं कि DNA झिल्लियों के द्वारा घिरा होता है। अतः इसमें कोशिका को तोड़ना होता है। यह प्रक्रिया विशेष एंजाइमों द्वारा होती है जैसे लाइसोजाइम जीवाणु कोशिका को, सेलुलेज पादप कोशिका को व काइटिनेज कवक कोशिकाओं को तोड़ने का कार्य करते हैं। कवक कोशिका की भित्ति में काइटिन (Chitin) रसायन होता है अतः काइटिन को तोड़ने वाला एंजाइम काइटिनेज होता है।
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Question 123 Marks
संक्षेप में बताइए - पी सी आर
Answer
पी सी आर (PCR) - पी सी आर का अर्थ पोलीमरेज श्रृंखला अभिक्रिया (Polymerase Chain Reaction = PCR) है। यह एक जीन प्रवर्धन की तकनीक है। वस्तुतः यह एक फोटोकॉपी करने वाले यंत्र की भांति है। DNA के छोटे से टुकड़े की सहायता से कुछ ही समय में करोड़ों कापियाँ बनाई जा सकती हैं। इस क्रिया में प्राइमर्स (छोटे रासायनिक संश्लेषित ओलिगोन्यूक्लियोटाइड्स जो DNA क्षेत्र के पूरक होते हैं) के दो सेट तथा DNA पॉलिमरेज एंजाइम का उपयोग कर पात्रे (in vitro) विधि द्वारा उपयोगी जीन की अनेक प्रतिकृतियों का संश्लेषण होता है। यह एंजाइम जिनोमिक DNA को टेंपलेट (template) के रूप में काम में लेकर, अभिक्रिया से मिलने वाले न्यूक्लियोटाइडों का उपयोग करते हुये प्राइमर्स को विस्तृत कर देता है। यदि DNA प्रतिकृतियन प्रक्रम अनेक बार दोहराया जाता है तब DNA खंड को लगभग एक अरब गुना (एक बिलियन) प्रवर्धित किया जा सकता है अर्थात् एक अरब प्रतिरूपों का निर्माण होता है। यह सतत प्रवर्धन तापस्थायी (Thermostable) DNA पॉलीमरेज (जीवाणु, थर्मस एक्वेटिकस से पृथक् किया गया है) द्वारा किया जाता है। उच्च तापमान द्वारा प्रेरित द्विलड़ीय DNA के विकृतीकरण (Denaturation) के समय भी सदैव सक्रिय बना रहता है। प्रवर्धित खंड को यदि चाहें तो संवाहक के साथ बांध कर आगे क्लोनिंग में प्रयोग कर सकते हैं।
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