Question 14 Marks
पुनर्योगज DNA तकनीक को उपयुक्त चित्र सहित समझाइए।
Answer
View full question & answer→किसी जीव के जीनोम में वांछित लक्षणों वाले जीनों को प्रविष्ट कराकर एक नये प्रकार के DNA को बनाना DNA पुनर्संयोजन तकनीक कहलाती है तथा इस प्रकार बने DNA को पुनर्संयोजन DNA या पुनर्योगज DNA कहते हैं। पुनर्योगज DNA तकनीक का उपयोग करके किसी जीव के आनुवंशिक संगठन में परिवर्तन करने की तकनीक को जीन तकनीक या जीन प्रौद्योगिकी कहते हैं।
पुनर्योगज या पुनर्संयोजन DNA तकनीक के विभिन्न चरण - पुनर्योगज DNA तकनीक एक जटिल प्रक्रिया है, जो कि निम्नलिखित चरणों में पूर्ण की जाती है -
1. विदेशज या टारगेट DNA का चयन जिसकी क्लोनिंग करनी होती है।
2. प्लाज्मिड या लैम्डा फेज या कॉस्मिड में से किसी एक का वाहक अर्थात् वेक्टर के रूप में चयन।
3. फॉरेन DNA को वेक्टर DNA के साथ जोड़ना अर्थात् पुनर्योगज DNA का निर्माण।
4. पोषक कोशिका में पुनर्योगज DNA का स्थानान्तरण।
5. रूपान्तरित कोशिकाओं का चयन।
जीन पुनर्संयोजन तकनीक द्वारा इन्सुलिन जीन का जीवाणु में प्रवेश की प्रक्रिया का चित्रात्मक निरूपण द्वारा इसके विभिन्न चरणों को प्रदर्शित किया जा रहा है।

पुनर्योगज DNA तकनीक हेतु मुख्य रूप से निम्नलिखित उपकरणों की आवश्यकता पड़ती है -
1. एन्जाइम (विकर), 2. वाहक, 3. निपुण पोषक
पुनर्योगज या पुनर्संयोजन DNA तकनीक के विभिन्न चरण - पुनर्योगज DNA तकनीक एक जटिल प्रक्रिया है, जो कि निम्नलिखित चरणों में पूर्ण की जाती है -
1. विदेशज या टारगेट DNA का चयन जिसकी क्लोनिंग करनी होती है।
2. प्लाज्मिड या लैम्डा फेज या कॉस्मिड में से किसी एक का वाहक अर्थात् वेक्टर के रूप में चयन।
3. फॉरेन DNA को वेक्टर DNA के साथ जोड़ना अर्थात् पुनर्योगज DNA का निर्माण।
4. पोषक कोशिका में पुनर्योगज DNA का स्थानान्तरण।
5. रूपान्तरित कोशिकाओं का चयन।
जीन पुनर्संयोजन तकनीक द्वारा इन्सुलिन जीन का जीवाणु में प्रवेश की प्रक्रिया का चित्रात्मक निरूपण द्वारा इसके विभिन्न चरणों को प्रदर्शित किया जा रहा है।

पुनर्योगज DNA तकनीक हेतु मुख्य रूप से निम्नलिखित उपकरणों की आवश्यकता पड़ती है -
1. एन्जाइम (विकर), 2. वाहक, 3. निपुण पोषक
