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Question 14 Marks
जैव नियंत्रक के रूप में सूक्ष्मजीवों की भूमिका निम्न पदों में लिखिए -
(A) रासायनिक पीड़कनाशी के दुष्प्रभाव
(B) पीड़क व रोगों का जैव नियंत्रण
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 24 Marks
बायो गैस/गोबर गैस संयंत्र का नामांकित चित्र बनाइये। संयंत्र में निर्मित गैस का संगठन व इसके उपयोग लिखिए।
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 34 Marks
सूक्ष्मजीवों का प्रयोग रसायन उर्वरकों तथा पीड़कनाशियों के प्रयोग को कम करने के लिए भी किया जा सकता है। यह किस प्रकार संपन्न होगा? व्याख्या कीजिए।
Answer
आज पर्यावरण प्रदूषण चिंता का एक मुख्य कारण है। कृषि उत्पादों की बढ़ती माँगों को पूरा करने के लिए रसायन उर्वरकों का प्रयोग इस प्रदूषण के लिए महत्त्वपूर्ण है। जैव उर्वरक एक प्रकार के जीव हैं, जो मृदा की पोषक गुणवत्ता को बढ़ाते हैं। जैव उर्वरकों का मुख्य स्रोत जीवाणु, कवक तथा सायनोबैक्टीरिया होते हैं। लैग्यूमिनस पादपों की जड़ों पर स्थित ग्रंथियों के बारे में हम पढ़ चुके हैं। इन ग्रंथियों का निर्माण राइजोबियम के सहजीवी संबंध द्वारा होता है। यह जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिरीकृत कर कार्बनिक रूप में परिवर्तित कर देते हैं। पादप इसका प्रयोग पोषकों के रूप में करते हैं। अन्य जीवाणु (उदाहरण-ऐजोस्पाइरिलम तथा ऐजोबैक्टर) मृदा में मुक्तावस्था में रहते हैं। यह भी वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को स्थिर कर सकते हैं। इस प्रकार मृदा में नाइट्रोजन बढ़ जाती है।
कवक पादपों के साथ सहजीवी संबंध स्थापित करते हैं। ऐसे संबंधों से युक्त पादप कई अन्य लाभ जैसे-मूलवातोढ़ रोगजनक के प्रति प्रतिरोधकता, लवणता तथा सूखे के प्रति सहनशीलता तथा कुलवृद्धि तथा विकास प्रदर्शित करते हैं। सायनोबैक्टीरिया स्वपोषित, सूक्ष्मजीव हैं जो जलीय तथा स्थलीय वायुमण्डल में विस्तृत रूप से पाए जाते हैं। इनमें बहुत से वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को स्थिरीकृत कर सकते हैं।
पादप रोगों तथा पीड़कों के नियंत्रण के लिए जैव वैज्ञानिक विधि का प्रयोग ही जैव नियंत्रण है। आधुनिक समाज में ये समस्याएँ रसायनों, कीटनाशियों तथा पीड़कनाशियों के बढ़ते हुए प्रयोगों की सहायता से नियंत्रित की जाती हैं। ये रसायन मनुष्यों तथा जीव-जन्तुओं के लिए अत्यन्त ही विषैले तथा हानिकारक हैं। ये पर्यावरण (मृदा, भूमिगत जल) को प्रदूषित करते हैं तथा फलों, साग-सब्जियों और फसलों पर भी हानिकारक प्रभाव डालते है। खरपतवारनाशियों का प्रयोग खरपतवार को हटाने में किया जाता है। ये भी हमारी मृदा को प्रदूषित करते हैं।
बैक्टीरिया बैसीलस थूरिजिऐंसिस (Bt) का प्रयोग बटरफ्लाई केटरपिलर नियंत्रण में किया जाता है। बैक्यूलोवायरेसिस ऐसे रोगजनक हैं जो कीटों तथा संधिपादों पर हमला करते हैं। न्यूक्लिओ-पॉलीहीड्रोसिस वायरस (NPU) प्रजाति विशेष, संकरे स्पैक्ट्रम कीटनाशीय उपचारों के लिए उत्तम माने गए हैं।
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