राजस्थान में पाली, जोधपुर, नागौर, जयपुर, भीलवाड़ा अजमेर, कोटा, बूंदी, झालावाड़, सवाई माधोपुर, टॉक, अलवर, बीकानेर, जैसलमेर, चूरु, श्रीगंगानगर आदि जिलों में लवणीय मृदा पाई जाती है।
लवणीय मृदा को विभिन्न क्षेत्रों में किन नामों से जाना जाता है?
Answer
लवणीय मृदा को हरियाणा व पंजाब में कल्लर, थर, राकर, बरा, बरी, उत्तर प्रदेश में ऊसर, रेह, गुजरात में खार, राजस्थान में लूणी, खारी आंध्र प्रदेश में उप्पू, चौडू तथा कर्नाटक में चौपान नामों से जाना जाता है।
अम्लीय मृदाएँ मुख्यतः किन क्षेत्रों में पायी जाती हैं?
Answer
अम्लीय मृदाएँ मुख्य रूप से आसाम, केरल, मणिपुर, त्रिपुरा, पश्चिमी बंगाल, उड़ीसा, बिहार, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश व उत्तराखण्ड तथा उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में पायी जाती हैं।
मृदा में $H ^{+}$ तथा $OH ^{-}$ आयनों की सांद्रता बढ़ने पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer
मृदा में हाइड्रोजन $\left( H ^{+}\right)$ आयनों की अधिकता होने पर मृदाएँ अम्लीय बनती हैं तथा $\left( OH ^{-}\right)$ आयनों की सान्द्रता अधिक होने पर मृदाएँ क्षारीय बनती हैं।