Question 14 Marks
अंगूर में पौध संरक्षण व दैहिक विकारों का वर्णन करो।
Answer
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| फसल | उन्नत किस्में | फल पकने का समय |
| अगेती | गोला, थार सेव्किा व थार भुवराज | जनवरी का प्रथम सप्ताह |
| मध्यम | सेब, मूण्डिया, जोगिया, कैथली व चौमूलोकल | जनवरी का अन्तिम सप्ताह |
| पछेती | उमरान | फरवरी अन्तिम सप्ताह से मार्च प्रथम सप्ताह |
| पेड़ों की आयु वर्ष में | मात्रा किलोग्राम प्रति पेड़ | |||
| गोबर की खाद | यूरिया | सुपर फॉस्फेट | म्यूरेट ऑफ पोटाश | |
| 1 | 10 | 0.22 | 0.35 | 0.08 |
| 2 | 20 | 0.44 | 0.70 | 0.16 |
| 3 | 20 | 1.10 | 1.40 | 0.20 |
| 4 | 25 | 1.20 | 1.75 | 0.25 |
| 5 वर्ष और उसके बाद | 30 | 1.20 | 1.75 | 0.25 |

| क्र. सं. | कीट/व्याधि | विवरण | प्रबन्धन |
| 1. | कीट-मिली बग (Drosicha mangiferae) | इस कीट के निम्फ मुलायम टहनियों, पुष्पक्रम तथा छोटे फलों के डण्ठलों पर एकत्रित होकर रस चूसते हैं। | पेड़ के तने के चारों और पोलीथीन की ग्रीस लगी 30-40 सेमी. चौड़ी पट्टी जमीन से 60 सेमी. की ऊँचाई पर लगायें। दिसम्बर माह में खेती की जुताई करें। यदि पेड़ पर मिली बग चढ़ गयी हो तो इमिडाक्लोप्रिड 30.5 एस.सी 1-1.5 मिली दवा प्रति 3 लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें। |
| 2. | आम का फुदका (Hopper-Amiritodus atkinsoni) | सर्वाधिक नुकसान पहुँचाने वाला भूरे रंग का बहुत ही छोटा कीट (वयस्क व निम्फ) होता है व आम के फूल, छोटे फल तथा नई वृद्धि का रस चूसता है। | इमिडाक्लोरप्रिड-17.5 एस.एल. दवा 1 मिली प्रति तीन लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। |
| 3. | छाल भक्षक कीट (Inderbela sp.) | कीट की इल्ली (Caterpillar) तने में छेद कर छाल को खाती रहती है। तने एवं शाखाओं में सुरंग बनाकर वृक्ष को खोखला बना देती है। | रुई को पेट्रोल या केरोसीन या कीटनाशी (क्यूनॉलफॉस 25 ईसी) रसायन में भिगोकर कीट की सुरंगों के अन्दर भर देना चाहिए तथा ऊपर से चिकनी मिट्टी लगा दें। |
| 4. | व्याधि-चूर्णी फफूँद (Oidium mangi-ferae) कवक | टहनियों, पत्तियों व पुष्पक्रमों पर सफेद चूर्ण दिखाई देती है। | घुलनशील गंधक 2.5 ग्राम या कैराथेन 1 मिली. प्रति लीटर पानी में घोलकर दो बार छिड़काव करना चाहिए। |
| 5. | श्यामव्रण (Colletotrichum sp.) कवक | पत्तियों पर भूरे व काले फफोलेनुमा धब्बे दिखाई देते हैं तथा पत्तियाँ गिरने लगती हैं। | कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 3 ग्राम या मेन्कोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें तथा रोगग्रस्त टहनियों व पत्तियों को काटकर नष्ट कर दें। |