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Question 13 Marks
ऊँट की निम्न नस्लों का उत्पत्ति स्थान, लक्षण एवं उपयोगिता तालिका बनाकर लिखिये ।
अ. बीकानेरी
ब. मेवाड़ी
स. जैसलमेरी
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 23 Marks
भेड़ की मारवाड़ी नस्ल का उत्पत्ति स्थान वितरण, शारीरिक विशेषतायें एवं उपयोगितायें बताइए ।
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 33 Marks
मेरिनो नस्ल की भेड़ का उत्पत्ति स्थान, वितरण, विशेषतायें एवं उपयोगितायें लिखिए ।
Answer
स्वप्रयत्न
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Question 43 Marks
ऊँट की आहार व्यवस्था को समझाइए।
Answer
ऊँट प्रतिदिन अपने शरीर के भार का 1.5-2.0% चारा शुष्क पदार्थ के रूप में ग्रहण कर सकता है। इसके अतिरिक्त 30-80 ग्राम नमक प्रतिदिन प्रति पशु को देना आवश्यक है। गर्भकाल के अन्तिम चरणों में दूध देने वाले पशुओं तथा बोझा ढोने वाले ऊँटों को लगभग 25% अतिरिक्त पोषक बल आहार के रूप में उपलब्ध कराना चाहिए।
ऊँट के लिए सन्तुलित आहार देने के लिए निम्न मिश्रण तैयार कर सकते हैं-
(1) भूसा और फलीदार चारा - 1 : 1
(2) भूसा और मोंठ - 65 : 35
ऊँट प्रायः शुष्क चारा ही पसन्द करता है, किन्तु यदि लगभग 25% हटा चारा उपलब्ध कराया जाये तो अच्छा रहता है।
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Question 53 Marks
बीटल नस्ल की बकरी का उद्गम स्थान तथा प्रमुख लक्षण लिखिए।
Answer
उद्गम तथा वितरण- इस जाति की बकरियाँ पंजाब में स्यालकोट, गुजरात तथा झेलम क्षेत्र में पायी जाती हैं।
प्रमुख लक्षण
सिर एवं ग्रीवा-
इस जाति के पशु के कान लम्बे, रोमन नाक जो कि जमुनापारी की भाँति होती है। सींग समतल परन्तु बाहर तथा भीतर की ओर घुमावदार होते हैं। साधारणतः बकरों में दाढ़ी पायी जाती है जो मादाओं में नहीं होती है।
धड़- इस जाति की बकरियाँ शरीर में जमुनापारी बकरियों से कुछ छोटी होती हैं। इनका रंग प्रायः लाल होता है। पशु देखने में दुधारू पशुओं की तरह प्रतीत होता है।
उत्पादन क्षमता- एक ब्यांत का औसत उत्पादन 262 लीटर तथा औसतन प्रतिदिन 1-8 लीटर दूध देती है। दूध में वसा का प्रतिशित 4.5 होता है।
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Question 63 Marks
भारत में बकरी की प्रसिद्धि के कारण समझाइए ।
Answer
भारत में बकरी एक प्रसिद्ध पशु है और इसकी प्रसिद्धि के निम्न कारण हैं-
(1) बकरी दूध, खाद, बाल, चमड़ी तथा गोश्त के लिए लाभप्रद पशु है।
(2) बकरी के दूध में वसा की औसतन मात्रा 4.5 प्रतिशत होती है।
(3) बकरी के दूध में अन्य पशुओं के दूध की भाँति उचित मात्रा में खनिज लवण तथा विटामिन पाये जाते हैं।
(4) यह पशु जंगलों में झाड़ियों की पत्तियाँ खाकर भी निर्वाह कर लेता है और आपातकाल में इसे अच्छा चारा, दाना देने की विशेष आवश्यकता नहीं होती है।
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Question 73 Marks
जाफराबादी भैंस के प्रमुख लक्षण लिखिए।
Answer
पशु का शरीर भारी - भरकम तथा लम्बा होता है। रंग काला एवं इसका माथा भारी तथा उठा हुआ होता है। सींग चौड़े तथा गर्दन की तरफ झुके होते हैं। सींग के आगे का भाग गोल छल्लेदार होता है। इसके नर पशुओं का भार 500 - 600 किग्रा. तथा मादा पशुओं का भार 450 - 500 किग्रा. होता है। प्रथम व्यांत की उम्र 42 से 48 माह है।
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Question 83 Marks
दो काजी प्रजातियों के नाम एवं उनके लक्षण तथा वार्षिक दुग्ध उत्पादन बताइए।
Answer
दो काजी जातियाँ-
जातियाँउद्गम स्थानशरीर का रंगवार्षिक उत्पादन (ली.)
हरियाणारोहतक, हिसार, करनालहल्का या गहरा भूरा, सफेद भूरा1150
थारपारकरपाकिस्तान का सिन्ध क्षेत्रसफेद भूरा1300
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Question 93 Marks
गंगतीरी गाय के प्रमुख लक्षण लिखिए।
Answer
सिर एवं ग्रीवा- इनका माथा चौड़ा, सींग मोटे तथा गर्दन छोटी होती है। ये मध्यम ऊँचाई तथा शान्त स्वभाव की होती है। इनका रंग सफेद, सिर लम्बा तथा आँखें चमकीली होती हैं।
अयन का विकास- अयन विकसित होता है। पशु का प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन औसतन 3.5 लीटर होता है।
उत्पादन क्षमता- इस जाति के पशु कार्य के लिए अच्छे रहते हैं। गाय का भार लगभग 270 किग्रा. तथा नर का भार 320 किग्रा. तक होता है।
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