जल समेट प्रबन्ध कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं?
Answer
जल समेट प्रबन्ध कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य निम्न हैं- (1) जलागम में त्वरित/अत्यधिक भू-क्षरण से रोकथाम। (2) विश्वसनीय एवं शुद्ध जल की आपूर्ति। (3) बाढ़ एवं सूखे का नियन्त्रण। (4) विशेष समस्याओं, जैसे- भूस्खलन, खनिज क्षेत्र, नदी-नाला कटाव आदि का नियन्त्रण।
(1) इसमें भू-जल में शुद्ध जल जायेगा। (2) इससे भू-जल की मात्रा निश्चित रूप से बढ़ेगी। (3) इससे गली-मुहल्ले के नाले वर्षा में बन्द नहीं होंगे व घरों में पानी भरने जैसी स्थिति नहीं होगी। (4) इससे भू-जल स्तर बना रहेगा।
निम्न कृषण क्रियाओं के लिए जल आवश्यक है- (1) पौधों का सम्पूर्ण विकास जल पर निर्भर करता है अतः कर्षण क्रिया में जल की अत्यन्त आवश्यकता होती है। (2) जल की पूर्ति बढ़ाकर फसलों की परिपक्वता काल को बढ़ाया जा सकता है। (3) खाद एवं उर्वरक को देने के बाद उन्हें ठोस से द्रव रूप में बदलने के लिए जल की आवश्यकता होती है। (4) जल से फसलों का तापमान नियन्त्रित रहता है।
भूमि में अतिरिक्त जल से होने वाली हानियाँ- I. मृदा में वायुसंचार में बाधा आना। II. हानिकारक लवणों का इकट्ठा होना। III. मृदा के ताप का कम होना। पड़ना। IV. लाभदायक जीवाणुओं की क्रियाशीलता पर प्रभाव पड़ना। V. भूमि का दलदली होना। VI. भूपरिष्करण क्रियाओं में बाधा। VII. जड़ों का पूर्ण विकास नहीं होना।
I. फसल को अल्पावधि सूखे से बचाकर उत्पादन सुनिश्चित करने हेतु। II. पौध वृद्धि हेतु फसल क्षेत्र के ऊपर अल्प वायुमण्डल को ठण्डा रखकर उसे पौध वृद्धि के लिए अनुकूल बनाने हेतु। III. कर्षण परत को नरम कर उसे कर्षण क्रियाओं हेतु अनुकूल बनाने के लिए। IV. मृदा में स्थित लवणों का निक्षालन करने या उसे तनु (Dilute) करने के लिए।