Question 15 Marks
ईंधन सैल की संरचना का वर्णन कीजिए। ईंधन सैल की संरचना का नामांकित चित्र बनाइये।
Answer
View full question & answer→ईंधन सैल $($Fuel cells$)-$ वह गैल्चैनी सेल जिसमें हाइड्रोजन $\left( H _2\right)$, मेथेन $\left( CH _4\right)$ तथा मेधेनॉल $\left( CH _3 OH \right)$ जैसे ईंधनो

ईंधन सेल में $I_2$ तथा $O_2$ गैसों के बुलबुलों को सीध $($porous$)$ कार्बन इलेक्ट्रॉडों के माध्यम से सांद्र जलीय $\text{NaOH}$ विलयन में प्रवाहित करते हैं। इलेक्ट्रॉड अभिक्रिया का वेग बढ़ाने के लिए सूक्ष्म विभाजित प्लैटिनम या पैलेडियम धातु $($उत्प्रेरक$)$ को इलेक्ट्रॉडों में मिश्रित किया जाता है। इलेक्ट्रॉड अभिक्रियाएँ निम्न प्रकार होती हैं$-$
कैथोड $\ce{O2(g) + 2H2O(l) +4c^-\rightarrow 4OH^-(aq)}$
ऐनोड$\ce{- 2H2(g) +4OH^- (aq) \rightarrow 4H2O(/)+4c^-}$
सम्पूर्ण अभिक्रिया को इस प्रकार लिखा जा सकता है$-$
$\ce{2H2(g) + O2(g) \rightarrow 2H2O(1) 2H2(g) + O2(g) \rightarrow 2H2O(l)}$
$H_2$ तथा $O_2$ गैस प्रवाहित करते रहने तक विद्युत प्राप्त होती रहती है अतः यह सेल कभी समाप्त नहीं होता। ऊष्मीय संयंत्रों की दक्षता केवल $40\%$ होती है जबकि ईंधन सेल की दक्षता $70\%$ होती है। $br$ ईंधन सेल को अपोलो अंतरिक्ष कार्यक्रम में विद्युत प्रदान करने के लिए प्रयोग में लिया गया था तथा $H_2$ व $0_2$ की अभिक्रिया से प्राप्त जल वाष्प को संघनित करके इसे अंतरिक्ष यात्रियों हेतु पेयजल के रूप में प्रयुक्त किया गया।

ईंधन सेल में $I_2$ तथा $O_2$ गैसों के बुलबुलों को सीध $($porous$)$ कार्बन इलेक्ट्रॉडों के माध्यम से सांद्र जलीय $\text{NaOH}$ विलयन में प्रवाहित करते हैं। इलेक्ट्रॉड अभिक्रिया का वेग बढ़ाने के लिए सूक्ष्म विभाजित प्लैटिनम या पैलेडियम धातु $($उत्प्रेरक$)$ को इलेक्ट्रॉडों में मिश्रित किया जाता है। इलेक्ट्रॉड अभिक्रियाएँ निम्न प्रकार होती हैं$-$
कैथोड $\ce{O2(g) + 2H2O(l) +4c^-\rightarrow 4OH^-(aq)}$
ऐनोड$\ce{- 2H2(g) +4OH^- (aq) \rightarrow 4H2O(/)+4c^-}$
सम्पूर्ण अभिक्रिया को इस प्रकार लिखा जा सकता है$-$
$\ce{2H2(g) + O2(g) \rightarrow 2H2O(1) 2H2(g) + O2(g) \rightarrow 2H2O(l)}$
$H_2$ तथा $O_2$ गैस प्रवाहित करते रहने तक विद्युत प्राप्त होती रहती है अतः यह सेल कभी समाप्त नहीं होता। ऊष्मीय संयंत्रों की दक्षता केवल $40\%$ होती है जबकि ईंधन सेल की दक्षता $70\%$ होती है। $br$ ईंधन सेल को अपोलो अंतरिक्ष कार्यक्रम में विद्युत प्रदान करने के लिए प्रयोग में लिया गया था तथा $H_2$ व $0_2$ की अभिक्रिया से प्राप्त जल वाष्प को संघनित करके इसे अंतरिक्ष यात्रियों हेतु पेयजल के रूप में प्रयुक्त किया गया।







