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अति लघु उत्तरीय प्रश्न(2 गुण)

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Question 12 Marks
अठारहवीं सदी में फ्रांसीसी समाज किस प्रकार संगठित था? समाज के कुछ वर्गों को क्या विशेष सुविधाएँ प्राप्त थीं?
Answer
1789 की क्रांति से पूर्व फ्रांसीसी समाज तीन एस्टेट्स में व्यवस्थित था। ये तीन एस्टेट्स निम्न प्रकार थे-
प्रथम एस्टेट-इस वर्ग में चर्च के उच्च श्रेणी के पादरी थे। उन्हें कई विशेषाधिकार प्राप्त थे तथा कोई कर नहीं चुकाना पड़ता था। ये किसानों से टाइद नामक धार्मिक कर भी वसूल करते थे। द्वितीयं एस्टेट-इस वर्ग में उच्च सरकारी अधिकारी तथा बड़े-बड़े जमींदार होते थे। यह कुलीन वर्ग कहलाता था। इन्हें भी अनेक विशेषाधिकार प्राप्त थे। ये भी कोई कर नहीं चुकाते थे। यह वर्ग किसानों से सामन्ती कर वसूल करता था।
तृतीय एस्टेट-इस वर्ग में किसान, कारीगर, व्यवसायी, छोटे कर्मचारी, वकील, डॉक्टर आदि थे। इन पर करों का समस्त बोझ था। इनसे अतिरिक्त बेगार भी ली जाती थी।
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Question 22 Marks
एस्टेट्स जेनराल (प्रतिनिधि सभा) क्या थी? लुई XVI ने तीसरी एस्टेट की किस मांग को स्वीकार नहीं किया?
Answer
एस्टेट्स जेनराल (प्रतिनिधि सभा) एस्टेट्स जेनराल फ्रांस की एक राजनीतिक संस्था थी। इसमें तीनों एस्टेट अपने-अपने प्रतिनिधि भेजते थे। प्राचीन राजतंत्र के अन्तर्गत फ्रांसीसी सम्राट अपनी मर्जी से कोई कर नहीं लगा सकता था। इसके लिए उसे एस्टेट्स जेनराल की बैठक बुलाकर नये करों के लिए उसकी मंजूरी लेनी होती थी।
फ्रांसीसी सम्राट लुई XVI ने 5 मई, 1789 को नये करों के प्रस्ताव के अनुमोदन के लिए एस्टेट्स जेनराल की बैठक बुलाई थी। एस्टेट्स जेनराल के नियमों के अनुसार प्रत्येक वर्ग को एक मत देने का अधिकार था। किन्तु इस बार तीसरी एस्टेट के प्रतिनिधियों ने मांग रखी कि अबकी बार पूरी सभा द्वारा मतदान कराया जाना चाहिए, जिसमें प्रत्येक सदस्य को एक मत देने का अधिकार होगा। लुई सोलह ने तीसरी एस्टेट की इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
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Question 32 Marks
1789 की क्रांति से पूर्व फ्रांसीसी समाज किस प्रकार व्यवस्थित था? इसमें तीसरे एस्टेट की भूमिका का उल्लेख करिए।
Answer
1789 की क्रांति से पूर्व फ्रांसीसी समाज तीन एस्टेट्स में व्यवस्थित था। ये तीन एस्टेट्स निम्न प्रकार थे-
प्रथम एस्टेट-इस वर्ग में चर्च के उच्च श्रेणी के पादरी थे। उन्हें कई विशेषाधिकार प्राप्त थे तथा कोई कर नहीं चुकाना पड़ता था। ये किसानों से टाइद नामक धार्मिक कर भी वसूल करते थे। द्वितीयं एस्टेट-इस वर्ग में उच्च सरकारी अधिकारी तथा बड़े-बड़े जमींदार होते थे। यह कुलीन वर्ग कहलाता था। इन्हें भी अनेक विशेषाधिकार प्राप्त थे। ये भी कोई कर नहीं चुकाते थे। यह वर्ग किसानों से सामन्ती कर वसूल करता था।
तृतीय एस्टेट-इस वर्ग में किसान, कारीगर, व्यवसायी, छोटे कर्मचारी, वकील, डॉक्टर आदि थे। इन पर करों का समस्त बोझ था। इनसे अतिरिक्त बेगार भी ली जाती थी।
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Question 42 Marks
तीसरे एस्टेट की अधिकांश महिलाओं की क्या स्थिति थी?
Answer
तीसरे एस्टेट की अधिकांश महिलाएँ जीविका निर्वाह के लिए सिलाई-बुनाई, कपड़ों की धुलाई, फल फूल, सब्जियां बेचना अथवा सम्पन्न घरों में घरेलू कार्य किया करती थीं। अधिकांश महिलाओं के पास पढ़ाई-लिखाई तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण के मौके नहीं थे। बहुत सारी महिलाएं वेश्यावृत्ति भी करती थीं।
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Question 52 Marks
फ्रांस में क्रान्ति की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई?
Answer
फ्रांस में क्रान्ति की शुरुआत निम्न परिस्थितियों में हुई-
समाज में सामाजिक असमानता व्याप्त थी।
अन्यायपूर्ण कर लगे हुए थे जो केवल तृतीय एस्टेट के लोगों को चुकाने पड़ते थे।
दार्शनिकों तथा विद्वानों के विचारों का प्रसार।
मध्य वर्ग का उदय।
अत्यधिक महँगाई। स्वेच्छाचारी और निरंकुश शासन।
एस्टेट्स जेनराल की बैठक में तृतीय एस्टेट की इस माँग को ठुकरा दिया जाना कि प्रत्येक सदस्य को एक मत का अधिकार होगा।
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Question 62 Marks
निम्नलिखित राजनीतिक प्रतीकों के मायने लिखिए-
(अ) टूटी जंजीर (ब) अपनी पूंछ में मुँह लिए साँप (स) छड़ों का बींदार गट्ठर।
Answer
(अ) टूटी जंजीर-टूटी जंजीर दासों की आजादी का प्रतीक है। (ब) अपनी पूँछ में मुँह लिए साँप-यह समानता का प्रतीक है। अंगूठी का कोई ओर-छोर नहीं होता है। (स) छड़ों का बींदार गट्ठर-यह एकता का प्रतीक है। अकेली छड़ को आसानी से तोड़ा जा सकता है पर पूरे गट्ठर को नहीं।
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Question 72 Marks
फ्रांसीसी क्रांति का आरंभ किस घटना से माना जाता है?
Answer
5 मई, 1789 को तीसरे एस्टेट के प्रतिनिधियों की नये करों के प्रस्ताव पर पूरी सभा द्वारा मतदान करने की मांग जिसमें प्रत्येक सदस्य को एक मत देने का अधिकार होगा, को सम्राट लुई सोलहवें द्वारा ठुकरा देने की घटना से फ्रांसीसी क्रांति का आरंभ माना जाता है।
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