मिला खोजती थी जिसको हे बचपन ठगा दिया तूने।
अरे जवानी के फंदे में मुझको फंसा दिया तूने।
माना, मैने, युवाकाल का जीवन खूब निराला है।
आकांक्षा, पुरूषार्थ, ज्ञान का उदय मोहने वाला है।
किन्तु यह झंझट है भारी, युद्ध क्षेत्र संसार बना।
चिन्ता के चक्कर में पढ़कर, जीवन भी है भार बना।
आजा बचपन एक बार फिर दे दे अपनी निर्मल शांति।
व्याकुल व्यथा मिटाने वाली यह अपनी प्राकृत विश्रांति।
Questions :
i) लेखक को किसने ठगा है ?
ii) लेखक के लिए संसार कैसा बन गया है ?
iii) युवाकाल की कौनसी विशेषता लेखक को मोहित करती है ?
iv) 'अरे जवानी के फंदे में मुझको फंसा दिया तूने' लेखक को जवानी फन्दे के समान क्यों लगती है ?
v) लेखक बचपन को पुनः क्यों बुलाना चाहता है ?
vi) बचपन से किस विश्रांति की मांग लेखक कर रहा है ?
अरे जवानी के फंदे में मुझको फंसा दिया तूने।
माना, मैने, युवाकाल का जीवन खूब निराला है।
आकांक्षा, पुरूषार्थ, ज्ञान का उदय मोहने वाला है।
किन्तु यह झंझट है भारी, युद्ध क्षेत्र संसार बना।
चिन्ता के चक्कर में पढ़कर, जीवन भी है भार बना।
आजा बचपन एक बार फिर दे दे अपनी निर्मल शांति।
व्याकुल व्यथा मिटाने वाली यह अपनी प्राकृत विश्रांति।
Questions :
i) लेखक को किसने ठगा है ?
ii) लेखक के लिए संसार कैसा बन गया है ?
iii) युवाकाल की कौनसी विशेषता लेखक को मोहित करती है ?
iv) 'अरे जवानी के फंदे में मुझको फंसा दिया तूने' लेखक को जवानी फन्दे के समान क्यों लगती है ?
v) लेखक बचपन को पुनः क्यों बुलाना चाहता है ?
vi) बचपन से किस विश्रांति की मांग लेखक कर रहा है ?