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BOARD SAMPLE PAPER - 2024 question types

46 questions across 11 question groups — pick any mix to generate a Hindi -अनिवार्य paper with step-by-step answer keys.

46
Questions
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Question groups
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Sample Questions

BOARD SAMPLE PAPER - 2024 questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

"दादा की समझ में गुड़ ज्यादा निकालने की अपेक्षा भाव अधिक मिलना चाहिये"। 'जूझ अध्याय का यह कथन वर्तमान समाज की प्रतिस्पर्द्धा तथा धन लोलुपता की प्रवृत्ति की ओर इंगित करता है कथन के सन्दर्भ में अपने विचार लिखिए।
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दीवाली की शाम घर पुते और सजे
चीनी के खिलौने जगमगाते लावे
वो रूपवती मुखड़े पै इक नर्म दमक
बच्चे के घरौंदे में जलाती है दिए
आँगन में ठुमक रहा है जिदयाया है
बालक तो हई, चाँद पै ललचाया है
दर्पण उसे दे के कह रही है माँ
देख आईने में चाँद उतर आया है
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कर यत्न मिटे सब, सत्य किसी ने जाना ?
नादान वही! है, हाय जहाँ पर दाना।।
फिर मूढ़ न क्या जग, जो इस पर भी सीखे ?
मैं सीख रहा हूँ, सीखा ज्ञान भुलाना।।
मैं और, और जग और, कहाँ का नाता,
मैं बना-बना कितने जग रोज मिटाताः
जग जिस पृथ्वी पर जोड़ा करता वैभव,
मैं प्रति पग से उस पृथ्वी को ठुकराता
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मेरे भ्रमण की भी एकांत साथिन भक्तिन ही रही है। बदरी-केदार के ऊँचे-नीचे और तंग पहाड़ी रास्ते में जैसे वह हठ करके मेरे आगे चलती रही है, वैसे ही गाँव की धूल भरी पगडण्डी पर मेरे पीछे रहना नहीं भूलती। किसी भी समय कहीं भी जाने के लिये प्रस्तुत होते ही मैं भक्तिन को छाया के समान साथ पाती हूँ।
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रात्रि की विभीषिका को सिर्फ पहलवान की ढोलक ही ललकार कर चुनौती देती रहती थी। पहलवान संध्या से सुबह तक चाहे जिस खयाल से ढोलक बजाता हो, किन्तु गाँव के अर्द्धमृत, औषधि उपचार-पथ्य-विहीन प्राणियों में वह संजीवनी शक्ति ही भरती थी। बूढ़े बच्चे, जवानों की शक्तिहीन आँखों के आगे दंगल का दृश्य नाचने लगता था।
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मिला खोजती थी जिसको हे बचपन ठगा दिया तूने।
अरे जवानी के फंदे में मुझको फंसा दिया तूने।
माना, मैने, युवाकाल का जीवन खूब निराला है।
आकांक्षा, पुरूषार्थ, ज्ञान का उदय मोहने वाला है।
किन्तु यह झंझट है भारी, युद्ध क्षेत्र संसार बना।
चिन्ता के चक्कर में पढ़कर, जीवन भी है भार बना।
आजा बचपन एक बार फिर दे दे अपनी निर्मल शांति।
व्याकुल व्यथा मिटाने वाली यह अपनी प्राकृत विश्रांति।
Questions :
i) लेखक को किसने ठगा है ?
ii) लेखक के लिए संसार कैसा बन गया है ?
iii) युवाकाल की कौनसी विशेषता लेखक को मोहित करती है ?
iv) 'अरे जवानी के फंदे में मुझको फंसा दिया तूने' लेखक को जवानी फन्दे के समान क्यों लगती है ?
v) लेखक बचपन को पुनः क्यों बुलाना चाहता है ?
vi) बचपन से किस विश्रांति की मांग लेखक कर रहा है ?
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करूणा भी भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों में से एक है। हम एक दूसरे के सुख-दुख में सहयोग एवं सदभाव रखते रहे हैं। स्त्री का सम्मान, संकट के समय साहस न खोना उदारता तथा अनेक विचारों के आदान-प्रदान के साथ हमारी समन्वयात्मक दृष्टि आदि ऐसे तत्व हैं जिन्हें हम दैनिक व्यवहार में अपनातें है। हमारी संस्कृति में देश की सीमाओं को केवल भू-भाग ही नहीं माना बल्कि अपनी माता से भी बढ़कर माना गया है" माता भूमि पुत्रोऽहं पृथिव्याः" अर्थात भूमि माता है और मैं इसका पुत्र हूँ। हमारे वेद, पुराण, शास्त्र धर्मग्रन्थ भी संस्कृति के पोषक और प्रसारक रहे हैं, जिनमें जीवन की चेतना के विभिन्न स्रोत समाहित हैं। हमारे साहित्य में भारतीय जीवन दर्शन के स्रोत समाहित हैं।
(i) भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों में से एक तत्व कौनसा है ?
(ii) सुत' शब्द का पर्यायवाची शब्द गद्यांश में से छाँटकर लिखिये।
(iii) हमारी संस्कृति में देश की सीमाओं को किसके समान बताया गया है ?
(iv) संस्कृति के किन तत्वों को हम दैनिक जीवन में अपनाते हैं ?
(v) जीवन की चेतना के विभिन्न स्रोत किनमें समाहित हैं ?
(vi) प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए ?
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान जयपुर में विभिन्न पदों पर आवेदन करने हेतु समाचार पत्र में प्रकाशित करने के लिये एक विज्ञप्ति लिखिए।
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