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लघुत्तरात्मक प्रश्नों उत्तर।[2M]

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Question 12 Marks
लेखक धर्मवीर भारती का कृतित्व एवं व्यक्तित्व का परिचय दीजिए।
Answer
धर्मवीर भारती का जन्म सन् 1926 में इलाहाबाद (उ.प्र.) में हुआ था। उनकी कविताएँ, कहानियाँ, उपन्यास, निबंध, गीतिनाट्य और रिपोर्ताज हिन्दी साहित्य की उपलब्धियाँ हैं। वे मूल रूप से व्यक्ति-स्वातंत्र्य, मानवीय संकट. एवं रोमानी चेतना के रचनाकार हैं। उनकी प्रमुख रचनाएँ 'कनुप्रिया', 'सात-गीत वर्ष', 'ठंडा लोहा' (कविता संग्रह); 'बंद गली का आखिरी मकान' (कहानी-संग्रह); 'सूरज का सातवाँ घोड़ा', 'गुनाहों का देवता' (उपन्यास) आदि हैं। पद्मश्री, व्यास सम्मान एवं साहित्य से जुड़े अनेक राष्ट्रीय पुरस्कार उन्हें प्राप्त हुए हैं। सन् 1997 में उनका निधन हो गया था।
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Question 22 Marks
आपकी दादी-नानी किस तरह के विश्वासों की बात करती हैं? ऐसी स्थिति में उनके प्रति आपका रवैया क्या होता है? लिखिए।
Answer
हमारी दादी-नानी अपनी धार्मिक आस्था के कारण तरह-तरह के अन्धविश्वासों की बातें करती हैं। वे शनिवार को तेल का दान करना अच्छा मानती हैं, इससे सारे अनिष्ट दूर होने का विश्वास व्यक्त करती हैं। वे महीने में चार व्रत रखना नहीं भूलती हैं, भगवानजी को भोग लगाती हैं, प्रत्येक पूर्णिमा एवं अमावस्या को पितरों के निमित्त दान पुण्य करती हैं। उनके इस तरह के कार्यों से हमें खीझ व झुंझलाहट होती है लेकिन उनके प्रति आदर व सम्मान का ध्यान रखते हुए चुप रहते हैं। वैसे इसे हम उनकी धार्मिक प्रवृत्ति का हिस्सा मानते हैं।
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Question 32 Marks
पानी का संकट वर्तमान स्थिति में भी बहुत गहराया हुआ है। इसी तरह के पर्यावरण से सम्बद्ध अन्य संकटों के बारे में लिखिए।
Answer
वर्तमान में पानी कमी का संकट काफी बढ़ रहा है। इसके साथ ही वायु की स्वच्छता का संकट बढ़ने लगा है। बड़े-बड़े कारखानों से निकलने वाले धुएँ, विषैली गैसों से, वाहनों के द्वारा गैस-उत्सर्जन से पर्यावरण अत्यधिक प्रदूषित हो रहा है। वृक्षों एवं हरियाली की कमी होने से तथा अनेक तरह के यन्त्रों की कर्ण-कटु ध्वनि से सारा पर्यावरण दूषित हो रहा है। नदियों एवं पेयजल के स्रोतों में गन्दगी फैल रही है; प्रकृति का बड़ी मात्रा में विदोहन हो रहा है। इससे मानव-जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इसी कारण आज पर्यावरण प्रदूषण से सभी लोग चिन्तित हैं।
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Question 42 Marks
त्याग तो वह होता....उसी का फल मिलता है।' अपने जीवन के किसी प्रसंग से इस सूक्ति की सार्थकता समझाइए।
Answer
जीजी का यह कथन उचित है कि त्याग संदा दूसरों के हितार्थ किया जाता है। त्याग का सम्बन्ध दान से है। इसमें स्वार्थ की अपेक्षा दूसरों के हित का भाव रहता है। लेकिन त्याग करने से उसका फल हमें भी अर्थात् त्याग करने वाले को भी अवश्य मिलता है। कुछ लोग प्याऊ लगाते हैं, धर्मशाला बनाते हैं, निःशुल्क चिकित्सा-सुविधा उपलब्ध कराते हैं तथा गरीबों की सहायता दिल खोलकर करते हैं। इस तरह के त्याग से उनका नाम-यश फैलता है तथा कभी उन पर जरा-सी आपदा आने पर अनेक लोग सहानुभूति-सहायता करने के लिए आगे आ जाते हैं।
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Question 52 Marks
पाठ के सन्दर्भ में इसी पुस्तक में दी गई निराला की कविता 'बादल-राग' पर विचार कीजिए और बताइए कि आपके जीवन में बादलों की क्या भूमिका है?
Answer
सभी के जीवन में बादलों का विशेष महत्त्व है। निराला ने बादलों को क्रान्ति का प्रतीक तथा शोषित-पीड़ित कृषक-श्रमिक वर्ग का हितकारी बताया है। बादल जब समय पर जल-वर्षण करते हैं, तब धरती पर नये जीवन का संचार होता है; पेड़-पौधे, घास, लता आदि हरे-भरे हो जाते हैं और पशु-पक्षियों की प्यास बुझ जाती है। सब ओर प्राकृतिक परिवेश हरीतिमा से व्याप्त हो जाता है, जो कि अतीव सुखदायी लगता है। इस तरह बादलों की न केवल कृषकों के जीवन में, अपितु सभी प्राणियों के जीवन के विकास में विशिष्ट भूमिका रहती है। बादल नव-जीवन संचरित करने वाले वाहक माने जाते हैं।
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Question 62 Marks
तकनीकी विकास के दौर में भी भारत की अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर है। कृषि-समाज में चैत्र, वैशाख सभी माह बहुत महत्त्वपूर्ण हैं पर आषाढ़ का चढ़ना उनमें उल्लास क्यों भर देता है?
Answer
भारत में कृषि-कार्य पूर्णतया मौसमी वर्षा पर निर्भर रहता है। आषाढ़ का महीना आते ही वर्षा ऋतु प्रारम्भ हो जाती है। इस ऋतु के शुरू होते ही झमाझम वर्षा होने लगती है, खेतों की प्यास बुझ जाती है तथा बुवाई-रोपाई होने लगती है। इस तरह भरपूर फसल होने की आशा से आषाढ़ प्रारम्भ होते ही किसान उल्लास से भर जाते हैं।
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Question 72 Marks
इंद्र सेना सबसे पहले गंगा मैया की जय क्यों बोलती है? नदियों का भारतीय सामाजिक, सांस्कृतिक परिवेश में क्या महत्त्व है?
Answer
इन्द्र सेना सबसे पहले गंगा मैया की जय बोलती है। क्योंकि गंगा भारत की पूज्य एवं पवित्र नदी है। इसके जल-सिंचन से देश में अन्न का उत्पादन होता है, गंगा नदी हमारी सांस्कृतिक आस्था है, इसके तट पर अनेक पवित्र तीर्थ एवं सांस्कृतिक केन्द्र विद्यमान हैं, जिनका हमारे धार्मिक और सामाजिक जीवन में विशेष महत्त्व है। इन सब कारणों से गंगा नदी का महत्त्व सर्वोपरि है।
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Question 82 Marks
गगरी फूटी बैल पियासा' इन्दर सेना के इस खेल गीत में बैलों के प्यासा रहने की बात क्यों मुखरित
Answer
इन्द्र सेना के इस खेल गीत में इस आशय से ऐसा कहा गया है कि वर्षा न होने से घरों के बर्तन सूखकर फूट गये हैं और खेती भी सूखी जा रही है। कृषि की रीढ़ बैल होते हैं, वे भी प्यास के कारण मरे जा रहे हैं और खेती नष्ट होने का खतरा बढ़ रहा है।
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Question 92 Marks
पानी दे गुड़धानी दे' मेघों से पानी के साथ-साथ गुड़धानी की माँग क्यों की जा रही है?
Answer
पानी के साथ ही गुड़धानी की माँग एक तुकबन्दी भी है और विशेष अभिप्राय भी है। मेघ जब पानी देंगे तो अनाज उगेगा, गुड़-चना आदि की उपज होगी और पेट-पूर्ति के साधन सुलभ होंगे। उसी कारण पीने, नहाने-धोने एवं खेती के लिए पानी चाहिए, तो खाने के लिए गुड़धानी अर्थात् अनाज चाहिए। अतएव इन दोनों की माँग एकसाथ की जाती थी।
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Question 102 Marks
जीजी ने 'इन्द्र सेना' पर पानी फेंके जाने को किस तरह सही ठहराया?
Answer
जीजी ने लेखक को बताया कि देवता से कुछ माँगे जाने से पहले उसे कुछ चढ़ाना पड़ता है। किसान भी तीस-चालीस मन गेहूँ पाने के लिए पहले पाँच-छ: सेर गेहूँ की बुवाई करता है। इन्द्र सेना पर भी यही बात लागू होती है। इन्द्र वर्षा के देवता हैं। इन्द्र सेना को पानी देने से इन्द्र देवता प्रसन्न होते हैं और बदले में झमाझम वर्षा करते हैं। एक प्रकार से इन्द्र सेना पर पानी फेंकना वर्षा-जल की बुवाई है। इस तरह पहले कुछ त्याग करो, फिर उसका फल पाने की आशा करो।
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Question 112 Marks
लोगों ने लड़कों की टोली को 'मेढक-मण्डली' नाम किस आधार पर दिया? यह टोली अपने आपको 'इंद्र सेना' कहकर क्यों बुलाती थी?
Answer
गाँव के कुछ लोगों को लड़कों का नंग-धडंग होकर कीचड़ में लथपथ होना अच्छा नहीं लगता था। वे उनके अन्धविश्वास एवं ढोंग से चिढ़ते थे। इस कारण वे उन लड़कों की टोली से चिढ़ने के कारण 'मेढक-मण्डली' नाम से पुकारते थे। लड़कों की वह टोली वर्षा के देवता इन्द्र से वर्षा करने की प्रार्थना करती थी। वे लोक-विश्वास के आधार पर इन्द्रदेव के दूत बनकर सबसे पानी इसलिए माँगते थे, ताकि इन्द्रदेव भी उन्हें वर्षा का दान करें। इसी से वे अपने आपको 'इन्द्र सेना' कहकर बुलाते थे।
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Question 122 Marks
"विज्ञान का सत्य बड़ा है या सहज प्रेम का रस?"काले मेघा पानी दे' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Answer
आज विज्ञान का युग है और वैज्ञानिक विकास को देखने से स्पष्ट हो जाता है कि विज्ञान का सत्य बड़ा है। जीजी ने लेखक को सहज प्रेम-भाव में इन्द्र सेना पर पानी फेंकना उचित आचरण बताया। लेखक न चाहता हुआ भी उसके अनुसार कार्य करने लगा। इसका कारण जीजी का सहज प्रेम ही था।
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Question 132 Marks
काले मेघा पानी दे' के आधार पर समझाइए कि लेखक ने भारतीयों का अंग्रेजों से पिछड़ने व .. उनका गुलाम बनने के क्या कारण बताये हैं? वह उस स्थिति में सुधार चाहते हुए भी क्यों नहीं कर पाता है?
Answer
लेखक ने भारतीयों का अंग्रेजों से पिछड़ने एवं उनका गुलाम होने का कारण पाखण्ड और अन्धविश्वास बताया है। भारतीयों में रूढ़िवादी धार्मिक मान्यता एवं सांस्कृतिक परम्पराओं के कारण अशिक्षित या अर्द्ध-शिक्षित लोग अन्धविश्वासों से छुटकारा नहीं पाते हैं। रूढ़ संस्कारों के कारण चाहते हुए भी इस स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है।
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Question 142 Marks
काले मेघा पानी दे' संस्मरण द्वारा लेखक ने क्या सन्देश व्यक्त किया है?
Answer
लेखक ने यह सन्देश दिया है कि विज्ञान अपनी जगह सत्य है तथा उसके आविष्कारों से सभी परिचित हैं। फिर भी जनता के सामूहिक चित्त में अन्धविश्वास और लौकिक कर्मकाण्ड का इतना प्रभाव है कि विज्ञान भी उसके सामने कमजोर पड़ जाता है। अतएव परम्परागत मान्यताओं तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण में जन-भावना के अनुसार समन्वय रखना जरूरी है।
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Question 152 Marks
"गगरी फूटी की फूटी रह जाती है, बैल पियासे के पियासे रह जाते हैं।" इस कथन से क्या व्यंजना की गई है?
Answer
यह कथन प्रतीकात्मक है। वर्तमान में हमारे देश में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। जनता के कल्याण के लिए बनने वाली विकास योजनाओं रूपी गगरी में भ्रष्टाचार के छेद हो गये हैं। योजनाएँ तो खूब बनती हैं, पर उनका लाभ आम जनता को नहीं मिलता है, इस तरह उक्त कथन से समकालीन भ्रष्ट शासन की व्यंजना की गई है।
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Question 162 Marks
"इन बातों को आज पचास से ज्यादा बरस होने को आये"-लेखक को पचास वर्ष पूर्व की कौन-सी बात कचोटती है?
Answer
लेखक को पचास वर्ष जीजी ने दान और त्याग के साथ ही आचरण को लेकर जो कुछ कहा था, वह बात आज के सन्दर्भ में लेखक को कचोटती है, क्योंकि आज लोग त्याग और दान को भूल गये हैं। देश एवं समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को नहीं निभाते हैं। केवल स्वार्थ, भ्रष्टाचार, अधिकार-प्राप्ति और छल-कपट रह गया है।
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Question 172 Marks
जीजी के अनुसार आज भारत के लोगों का आचरण किस प्रकार का हो गया है?
Answer
आज भारत में लोगों का आचरण स्वार्थी हो गया है। स्वार्थपरता के कारण वे दूसरों की कठिनाइयों एवं कष्टों की कोई चिन्ता नहीं करते हैं। लोग परमार्थ और परोपकार को भूलते जा रहे हैं। समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का ध्यान नहीं रखते परन्तु अपने अधिकारों की बात करते हैं। अब देशप्रेम कोरे उपदेश का विषय बन गया है।
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Question 182 Marks
जीजी के प्यार के कारण लेखक के सामने क्या मुश्किल आ गई थी?
Answer
लेखक आर्यसमाजी प्रभाव के कारण इन्द्र सेना के आचरण को, धार्मिक परम्पराओं को अन्धविश्वास और पाखण्ड मानता था। परन्तु उनके सामने यह मुश्किल थी कि जीजी के प्यार के कारण अनिच्छा से वह पूजा-पाठ एवं गहरी श्रद्धा होने से उनका साथ देता था और उनके स्नेह के कारण मजबूरी में सारे धार्मिक अनुष्ठान करता था।
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Question 192 Marks
"यह सच भी है कि यथा प्रजा तथा राजा।" इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer
कहावत प्रसिद्ध है - 'यथा राजा तथा प्रजा', अर्थात जैसा राजा होगा, प्रजा भी वैसी ही होगी। राजा दानी, त्यागी और परोपकारी होगा, तो प्रजा भी उसी के अनुरूप आचरण करेगी, परन्तु प्रजा के आचरण का प्रभाव राजा पर भी पड़ता है। जनता त्याग-भावना का आचरण करती है तो तब राजा अर्थात् देवता भी त्याग करते हैं, जनता की प्रार्थना सुनकर इच्छित फल देते हैं।
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Question 202 Marks
"हम चटखारे लेकर इसके या उसके भ्रष्टाचार की बातें करते हैं।" इससे लेखक ने क्या आक्षेप किया है?
Answer
इससे लेखक ने वर्तमान काल में पनप रहे भ्रष्टाचार पर आक्षेप किया है। आज भ्रष्टाचार सर्वत्र व्याप्त है। आज हर किसी के भ्रष्टाचार पर बातें खूब की जाती हैं, परन्तु स्वयं के भ्रष्टाचरण पर सब चुप रहते हैं। इससे समाज, देश तथा मानवता का पतन हो रहा है।
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Question 212 Marks
"हम अपने घर का पानी इन पर फेंकते हैं, वह भी बुवाई है।" जीजी के इस कथन का क्या आशय है? क्या आप इससे सहमत हैं?
Answer
किसान को अगर तीस-चालीस मन गेहूँ उगाना है तो वह पाँच-छ: सेर अच्छा गेहूँ लेकर उसकी जमीन में बुवाई कर देता है। इस तरह बुवाई करने से उसको कई गुना अनाज प्राप्त होता है। इसी प्रकार इन्दर सेना पर हम जो पानी फेंकते हैं, वह भी पानी की बुवाई है। इससे बादलों से कई गुना अधिक पानी मिलता है। हम जीजी के इस तर्क से सहमत नहीं हैं, क्योंकि इसमें अन्धविश्वास की अधिकता है।
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Question 222 Marks
इन्द्र सेना पर पानी फेंकने से मना करने पर जीजी ने क्या प्रयास किया और लेखक को कैसे समझाया?
Answer
तब जीजी ने उसके मुँह में मठरी डालते हुए समझाया कि इन्द्र सेना पर पानी फेंकना पानी की बर्बादी नहीं है, यह पानी का अर्घ्य चढ़ाना है। जो चीज हमारे पास कम हो और प्रिय भी हो, उसका दान करना ही सच्चा त्याग है। इन्द्र सेना को पानी देने से इन्द्र देवता प्रसन्न होंगे और वे हमें पानी देंगे अर्थात् वर्षा करेंगे।
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Question 232 Marks
जीजी के त्याग व दान के विषय में क्या विचार थे? 'काले मेघा पानी दो' अध्याय के आधार पर बताइये।
Answer
इस सम्बन्ध में जीजी के विचार थे कि जो चीज मनुष्य पाना चाहता है, उसे पहले खुद देना पड़ता है—त्याग करना पड़ता है। बिना त्याग के दान नहीं होता है। जो चीज बहुत कम है, उसका त्याग करने से ही लोक-कल्याण होता है। इससे स्वार्थ-भावना कम होती है और परोपकार भावना बढ़ती है।
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Question 242 Marks
समय पर वर्षा न होने से गाँववासी कौन-कौनसे उपाय करते थे?
Answer
गाँववासी अपनी आस्था के अनुसार इन्द्रदेवता को प्रसन्न करने के लिए सामूहिक रूप से पूजा-पाठ कराते, कथा-कीर्तन एवं रात्रि-जागरण आदि सारे कार्य करते। इन सब उपायों के बाद भी वर्षा नहीं होती, तो इन्द्र सेना आकर इन्द्रदेवता से जल-वर्षण की प्रार्थना करती थी।
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Question 252 Marks
इन्द्र सेना' अनावृष्टि दूर करने के लिए क्या करती थी?
Answer
इन्द्र सेना' में गाँव के दस-बारह वर्ष से सोलह-अठारह वर्ष के सभी लड़के नंग-धडंग उछल-कूद, शोर-शराबे के साथ कीचड़-मिट्टी को शरीर पर मलते हुए घर-घर.जाते थे और 'बोल गंगा मैया की जय' का नारा लगाते हुए पानी की माँग करते थे। वे आस्था के कारण इन्द्र देवता से बारिश करने के लिए प्रार्थना करते हुए ऐसा करते हैं।
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Question 262 Marks
काले मेघा पानी दे' शीर्षक निबन्ध का मूल भाव या प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
Answer
निबन्ध का प्रतिपाद्य यह है कि विज्ञान तर्क की कसौटी पर खरी उतरने वाली बात को ही सत्य मानता है। साथ ही विश्वास भावना के आधार पर अनहोनी-होनी सबको सत्य मान लेता है। भारतीय समाज में अन्धविश्वास होते हुए भी उनमें सामाजिक कल्याण की भावना सांस्कृतिक चेतना एवं संस्कारों से पल्लिवत होती है।
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