Questions

लघुत्तरात्मक प्रश्नों उत्तर।[2M]

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Question 12 Marks
"हम सब चार्ली हैं क्योंकि हम सुपरमैन नहीं हो सकते।" इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer
लेखक का अभिप्राय है कि चार्ली चैप्लिन को जीवन में काफी संघर्ष करना पड़ा, काफी अपमान झेलना पड़ा और अनेक संकटों का सामना करना पड़ा तथा जमीन से जुड़ा रहा। इसी प्रकार प्रत्येक मनुष्य को जीवन में संघर्षों का सामना करना पड़ता है। इस कारण हम भी चार्ली हैं, जबकि 'सुपरमैन' एक काल्पनिक चरित्र या एक महत्त्वाकांक्षी सपना है, वास्तविक रूप में हम सुपरमैन नहीं हो सकते।
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Question 22 Marks
चार्ली चैप्लिन के व्यक्तित्व को लेकर लेखक ने क्या धारणा व्यक्त की है? बताइये।
Answer
लेखक की यह धारणा है कि चार्ली का प्रभाव सारे संसार पर रहा है और आगे भी काफी वर्षों तक रहेगा। चार्ली का भारतीय फिल्म जगत् पर भी काफी प्रभावी रहा है। अनेक अभिनेताओं ने उसके अभिनय का अनुसरण भी किया। चार्ली का जीवन कठिनाइयों एवं संघर्षों से भरा रहा, फिर भी उसने दुनिया को अपने आप पर हँसना सिखाया तथा हास्य एवं करुण रस में अनोखा सामंजस्य स्थापित किया।
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Question 32 Marks
भारतीय परम्परा के हास्य और चाली के हास्य में क्या अन्तर बताया गया है?
Answer
भारत में अपने आप पर हँसने अथवा जानबूझकर स्वयं को हास्यास्पद बनाने की परम्परा नहीं है। यहाँ हास्य दूसरों पर किया जाता है। चार्ली का हास्य भारतीय परम्परा से इसलिए भिन्न है क्योंकि चार्ली के पात्र अपनी कमजोरियों एवं विकृतियों पर स्वयं हँसते हैं और दूसरों को भी हँसाते हैं। वे करुणाजनक दृश्य के साथ हँसा भी देते हैं या हँसाते-हँसाते रुला भी देते हैं। इस तरह चार्ली ने भारतीय परम्परा से अलग हटकर करुणा और हास्य का मेल कराया है, यही उसकी विशेषता है।
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Question 42 Marks
चार्ली की फिल्मों के पूरे विश्व में सफल होने के क्या कारण रहे हैं?
Answer
चार्ली ऐसे सार्वभौमिक कलाकार रहे, जिनके लिए काल एवं भूगोल की बाध्यता नहीं रही है। चार्ली की फिल्मों में संवादों का प्रयोग अत्यल्प है, उनमें मानवीय भावों की अधिकता है। उनकी क्रियाएँ एवं अभिनय के दृश्य अतीव सहज एवं सम्प्रेप्य हैं। संवाद न होने से दर्शकों पर गहरा प्रभाव पड़ता है तथा हास्य एवं करुणा का संयोग ही उनकी फिल्मों की सफलता का प्रमुख कारण रहा है।
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Question 52 Marks
पश्चिम में तो बार-बार चाली का पुनर्जीवन होता है।' इसका आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer
चार्ली की फिल्में कला स्थान. काल. संस्कति एवं जाति-वर्ग की सीमाओं से मक्त रहीं। पश्चिम में सभी फिल्म निर्माता चार्ली की कला से प्रभावित रहे हैं। इस कारण वे अपनी फिल्मों में चार्ली के विभिन्न रूपों का चित्रांकन करते रहे हैं। वहाँ पर नये अभिनेताओं ने चार्ली के प्रभाव को ग्रहण करने के प्रयास किये हैं। यही कारण है कि वहाँ चार्ली बार-बार जन्म लेता रहा है।
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Question 62 Marks
चार्ली की फिल्मों का चमत्कार क्या है? बताइये।
Answer
चार्ली की फिल्में भावनाओं पर टिकी हुई हैं, बुद्धि पर नहीं। उनका चमत्कार यही है कि वे पागलखाने के मरीजों से लेकर महान् वैज्ञानिक आइन्स्टाइन जैसे प्रतिभाशाली तक को आनन्द प्रदान करती हैं। चार्ली ने फिल्म कला को लोकतान्त्रिक बनाया तथा समाज की वर्ण एवं वर्ग-व्यवस्था को तोड़ा। चार्ली ने अपनी फिल्मों में उच्च वर्ग तथा शासक वर्ग की कमजोरियों पर सशक्त व्यंग्य किये।
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Question 72 Marks
चार्ली के मन पर हास्य और करुणा के संस्कार कैसे पड़े?
Answer
लेखक के अनुसार चार्ली के घर के पास कसाईखाने में रोज सैकड़ों जानवर लाये जाते थे। एक दिन एक ह वहाँ से भाग निकली। उसे पकडने वाले लोग उसका पीछा करते हए कई बार फिसले और गिरे। तब देखने वाले सभी लोग सड़क पर ठहाके लगाने लगे। बाद में भेड़ पकड़ी गई। तब उसका अन्त समझ चार्ली का मन रो पड़ा। इस घटना से पहले तो हास्य तथा फिर करुणा का संस्कार चार्ली के मन में पड़ गया।
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Question 82 Marks
किन परिस्थितियों ने चार्ली को हमेशा एक 'बाहरी' तथा 'घुमन्तू' चरित्र बना दिया था?
Answer
चार्ली की नानी खानाबदोश और माँ परित्यक्ता व सांधारण कलाकार थी। उसका बचपन भयानक गरीबी में बीता जिसमें उसे माँ के पागलपन से भी संघर्ष करना पड़ा। वह समाज के उच्च वर्ग द्वारा सदा दुत्कारा गया। इन सभी जटिल परिस्थितियों ने चार्ली को हमेशा एक 'बाहरी' और 'घुमन्तू' चरित्र बना दिया था।
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Question 92 Marks
अन्य कामेडियनों से बढ़कर क्या विशेषताएँ चार्ली चैप्लिन में हैं, जिनसे वह हमें 'हम' लगते हैं? बताइये।
Answer
चार्ली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे किसी भी संस्कृति को विदेशी नहीं लगते। क्योंकि चार्ली आम आदमी की पीड़ा व दर्द को व्यक्त करता है। स्वपीड़ा से जुड़ाव व संवेदना ही चार्ली को 'हम' में परिवर्तित कर देता जो व्यक्ति को देश-सीमाओं से परे ले जाकर, मैं और तुम की परिधि से निकालकर 'हम' बना देता है। यही विशेषता चार्ली के व्यक्तित्व और उसके अभिनय में है।
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Question 102 Marks
चार्ली चैप्लिन ने भारतीयों को किस प्रकार प्रभावित किया?
Answer
चार्ली चैप्लिन ने भारतीय फिल्मों एवं अभिनेताओं को भी प्रभावित किया। राजकपूर ने चार्ली चैप्लिन की नकल पर 'आवारा' और 'श्री 420' फिल्में बनाईं। इसके पश्चात् तो हिन्दी फिल्म अभिनेताओं में जानी वाकर, दिलीप कुमार, देवानन्द, शम्मी कपूर, अमिताभ बच्चन तथा श्रीदेवी आदि ने चार्ली के किसी-न-किसी रूप का प्रभाव ग्रहण किया तथा स्वयं को हँसी का पात्र बनाया। चार्ली चैप्लिन ने भारतीयों को अपने अभिनय से काफी प्रभावित किया।
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Question 112 Marks
चार्ली' की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं? संक्षेप में लिखिए।
Answer
चार्ली सार्वभौमिक कलाकार है। वह अपनी फिल्मों में चिर युवा अथवा युवकों जैसा दिखाई देता है। वह किसी भी संस्कृति में विदेशी नहीं लगता है। एक प्रकार से वह सभी दर्शकों को अपना और जाना-पहचाना लगता है। उसमें समाज के साधारण जनों की छवि दिखाई देती है, किसी सुपरमैन की नहीं। वह स्वयं पर हँसने में हास्य और करुणा में अद्भुत सामञ्जस्य रखता है।
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Question 122 Marks
आजकल विवाह आदि उत्सव समारोहों एवं रेस्तराँ में आज भी चार्ली चैप्लिन का रूप धरे किसी व्यक्ति से आप अवश्य टकराए होंगे। सोचकर बताइए कि बाजार ने चार्ली चैप्लिन का कैसा उपयोग किया है?
Answer
आजकल विवाहोत्सवों, समारोहों एवं होटलों में चार्ली के रूप एवं वेशभूषा में सुसज्जित व्यक्ति को मेहमानों के स्वागतार्थ रखा जाता है। लोगों के ध्यानाकर्षण एवं हँसी-मजाक के लिए भी बाजार ने चाल चैप्लिन की सहायता को अनदेखा करके उसके नकली रूप का उपयोग किया है।
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Question 132 Marks
चार्ली हमारी वास्तविकता है, जबकि सुपरमैन स्वप्न'-आप इन दोनों में खुद को कहाँ पाते हैं?
Answer
चार्ली चैप्लिन की फिल्मों में हमारे जीवन की वास्तविकता का वर्णन है। उसका अभिनय हमारे जीवन से। जुड़ा हुआ है, उसमें हम अपना रूप देखते हैं। सुपरमैन की संकल्पना तो एक स्वप्न है कल्पनाएँ, जिसकी पूर्ति यथार्थ जीवन में सम्भव नहीं है। अतः हम स्वयं को सुपरमैन के रूप में नहीं देख पाते हैं।
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Question 142 Marks
आपके विचार से मूक और सवाक् फिल्मों में से किसमें ज्यादा परिश्रम करने की आवश्यकता है और क्यों?
Answer
हमारे विचार से मूक फिल्मों में ज्यादा परिश्रम करने की आवश्यकता है। मूक फिल्मों के सभी भावों को शारीरिक चेष्टाओं द्वारा ही व्यक्त किया जाता है, जो कि अत्यधिक श्रम-साध्य है। जबकि सवाक् फिल्मों में वाणी अथवा संवादों के द्वारा करुणा, स्नेह, शोक आदि भावों को व्यक्त करना काफी सरल रहता है।
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Question 152 Marks
चार्ली सबसे ज्यादा स्वयं पर कब हँसता है?
Answer
चार्ली स्वयं पर सबसे ज्यादा तब हँसता है. जब वह स्वयं को गर्वोन्नत, आत्मविश्वास से लबरेज, सफलता, सभ्यता, संस्कृति तथा समृद्धि की प्रतिमूर्ति, दूसरों से अधिक शक्तिशाली तथा श्रेष्ठ रूप में दिखाता है। तब वह ऐसा अवसर निर्मित कर देता है कि सारी गरिमा को त्याग कर हास्य का पात्र बन जाता है।
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Question 162 Marks
चार्ली चैप्लिन की फिल्मों में निहित त्रासदी/करुणा/हास्य का सामंजस्य भारतीय कला और सौन्दर्यशास्त्र की परिधि में क्यों नहीं आता?
Answer
भारतीय कला और सौन्दर्यशास्त्र रस को महत्त्व देता है, परन्तु इसमें हास्य और करुण रस को परस्पर विरोधी मानकर दोनों को एकसाथ नहीं रखा जाता है। इसके विपरीत चार्ली चैप्लिन की फिल्मों में त्रासदी, करुणा और हास्य का सामंजस्य दिखाई देता है। भारतीय काव्यशास्त्र में हास्य दूसरों को लेकर होता है, हँसी में करुणा की स्थिति नहीं रहती है। इसी कारण चार्ली चैप्लिन की फिल्मों में निहित त्रासदी, करुणा एवं हास्य भारतीय कला एवं सौन्दर्यशास्त्र की परिधि में नहीं आता है।
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Question 172 Marks
जीवन की जद्दोजहद ने चार्ली के व्यक्तित्व को कैसे सम्पन्न बनाया?
Answer
चार्ली चैप्लिन को बचपन में परित्यक्ता माँ के साथ बहुत गरीबी में रहना पड़ा। बीमार होने पर माँ ने उसे स्नेह, करुणा और मानवता का पाठ पढ़ाया। बाद में माँ पागल हो गई तो उसे भी संभालना पड़ा। चार्ली को बड़े-बड़े पूँजीपतियों, सामन्तों तथा उद्योगपतियों ने बहुत दुत्कारा-अपमानित किया। जटिल परिस्थितियों से सतत संघर्ष करके तथा साथ ही घुमन्तू रहने पर बड़े-बड़े लोगों, शासकों एवं पूँजीपतियों के जीवनगत यथार्थ को नजदीक से देखा और बाद में करोड़पति हो जाने पर भी अपने मूल्यों पर स्थिर रहा।
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Question 182 Marks
लेखक ने कलाकृति और रस के सन्दर्भ में किसे श्रेयस्कर माना है और क्यों? क्या आप कुछ ऐसे उदाहरण दे सकते हैं जहाँ कई रस साथ-साथ आए हों?
Answer
लेखक ने माना है कि कलाकृति में एक से अधिक रस हों। इससे कलाकृति समृद्ध और रुचिकर बनती है। जीवन में हर्ष और विषाद के क्षण तो आते रहते हैं। उसी प्रकार काव्यों में भी शृंगार और वीर, रौद्र और वीर, हास्य और शृंगार आदि रसों का समावेश एक साथ किया जाता है। परन्तु रसशास्त्र में हास्य और करुण को तथा श्रृंगार और शान्त रस को परस्पर विरोधी बताया गया है। संस्कृत के नाटकों में एक रस मुख्य तथा अन्य रस सहयोगी रूप में रखे गये हैं।
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Question 192 Marks
लेखक ने चार्ली का भारतीयकरण किसे कहा और क्यों? गांधी और नेहरू ने भी उनका सान्निध्य क्यों चाहा?
Answer
लेखक ने राजकपूर द्वारा बनाई गई 'आवारा' फिल्म को चार्ली का भारतीयकरण कहा। राजकपूर ने 'दि ट्रैम्प' का शब्दानुवाद किया था। 'आवारा' एवं 'श्री 420' फिल्म में राजकपूर ने चार्ली की परम्परा का अनुकरण कर दर्शकों को खूब हँसाया। इसी क्रम में देवानन्द, दिलीप कुमार, शम्मी कपूर, अमिताभ बच्चन तथा श्रीदेवी ने भी स्वयं पर हँसने-हँसाने की परम्परा को आगे बढ़ाया। महात्मा गाँधी और नेहरूजी भी कभी-कभी चार्ली की तरह अपने पर हँसते थे। गाँधीजी चैप्लिन के साथ रहकर प्रसन्न होते थे। वे चाली की इस कला के बड़े प्रशंसक भी थे।
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Question 202 Marks
चैप्लिन ने न सिर्फ फिल्म-कला को लोकतान्त्रिक बनाया बल्कि दर्शकों की वर्ग तथा वर्ण व्यवस्था को तोड़ा।' इस पंक्ति में लोकतान्त्रिक बनाने का और वर्ण-व्यवस्था तोड़ने का क्या अभिप्राय है? क्या आप इससे सहमत हैं?
Answer
चार्ली चैप्लिन ने दर्शकों के किसी वर्ग-विशेष या वर्ण-विशेष को महत्त्व न देकर अपनी फिल्मों को आम आदमी से जोड़कर लोकतान्त्रिक रूप दिया। इस तरह चैप्लिन ने फिल्म जगत् में चल रही वर्ण-व्यवस्था को तोड़ा। चैप्लिन का किसी राजनीतिक विचारधारा, वाद या उच्च जाति-वर्ग आदि से लगाव नहीं था। इस कारण कलाकारों की रूढ़ मान्यताओं को न मानकर चैप्लिन ने ऐसी फिल्में बनायीं, जो समाज के सर्वसाधारण लोगों एवं सभी देशों में लोकप्रिय हुईं।
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Question 212 Marks
लेखक ने ऐसा क्यों कहा है कि अभी चैप्लिन पर करीब 50 वर्षों तक काफी कुछ कहा जाएगा?
Answer
चार्ली चैप्लिन के विषय में अभी पचास वर्षों तक काफी कुछ कहा जायेगा। क्योंकि चार्ली ने भारतीय जन-जीवन पर कितना प्रभाव छोड़ा है, इसका अभी तक मूल्यांकन नहीं हुआ है तथा चार्ली की कुछ फिल्में या रीलें ऐसी मिली हैं, जो अभी तक प्रदर्शित नहीं हुई हैं। इस कारण उनकी भी चर्चा होगी
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