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काव्य-खण्ड Chapter 5 सहर्ष स्वीकारा है question types

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32
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4
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Sample Questions

काव्य-खण्ड Chapter 5 सहर्ष स्वीकारा है questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

भय' शब्द पर सोचिए। सोचिए कि मन में किन-किन चीजों का भय बैठा है? उससे निबटने के लिए आप क्या करते हैं और कवि की मनःस्थिति से अपनी मनःस्थिति की तुलना कीजिए।
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लापता कि वहाँ भी तो तुम्हारा ही सहारा है!! 
इसलिए कि जो कुछ भी मेरा है 
या मेरा जो होता-सा लगता है, होता-सा संभव है 
सभी वह तुम्हारे ही कारण के कार्यों का घेरा है, कार्यों का वैभव है। 
अब तक तो जिंदगी में जो कुछ था, जो कुछ है 
सहर्ष स्वीकारा है 
इसलिए कि जो कुछ भी मेरा है 
वह तुम्हें प्यारा है। 
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ममता के बादल की मँडराती कोमलता - 
भीतर पिराती है 
कमजोर और अक्षम अब हो गई है आत्मा यह 
छटपटाती छाती को भवितव्यता डराती है
बहलाती सहलाती आत्मीयता बरदाश्त नहीं होती है!!
सचमुच मुझे दंड दो कि हो जाऊँ 
पाताली अँधेरे की गुहाओं में विवरों में 
धुएँ के बादलों में 
बिल्कुल मैं लापता 
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सचमुच मुझे दण्ड दो कि भूलूँ मैं भूलूँ मैं 
तुम्हें भूल जाने की 
दक्षिण ध्रुवी अन्धकार-अमावस्या
शरीर पर, चेहरे पर, अन्तर में पा लूँ मैं 
झेलूँ मैं, उसी में नहा लूँ मैं
इसलिए कि तुमसे ही परिवेष्टित आच्छादित 
रहने का रमणीय यह उजेला अब 
सहा नहीं जाता है। 
नहीं सहा जाता है। 
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जाने क्या रिश्ता है, जाने क्या नाता है 
जितना भी उँडेलता हूँ, भर-भर फिर आता ह 
दिल में क्या झरना है? 
मीठे पानी का सोता है 
भीतर वह, ऊपर तुम 
मुसकाता चाँद ज्यों धरती पर रात-भर 
मुझ पर त्यों तुम्हारा ही खिलता वह चेहरा है! कठिन-शब्दार् :सोता = स्रोत, झरना। 
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जिंदगी में जो कुछ है, जो भी है 
सहर्ष स्वीकारा है। 
इसलिए कि जो कुछ भी मेरा है 
वह तुम्हें प्यारा है। 
गरबीली गरीबी यह, ये गम्भीर अनुभव सब 
यह विचार-वैभव सब 
दृढ़ता यह, भीतर की सरिता यह अभिनव सब 
मौलिक है, मौलिक है 
इसलिए कि पल-पल में 
जो कुछ भी जाग्रत है अपलक है - 
संवेदन तुम्हारा है!! 
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