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Model Paper 3 question types

49 questions across 11 question groups — pick any mix to generate a Hindi -अनिवार्य paper with step-by-step answer keys.

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Sample Questions

Model Paper 3 questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

'पहलवान की ढोलक' नामक कहानी में लुट्टन सिंह एक ऐसा पात्र है जो जीवन के आरंभ से लेकर मृत्यु पर्यन्त जिजीविषा का अद्भूत दस्तावेज है, कैसे? समझाइए।
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मैं निज उर के उद्‌गार लिए फिरता हूँ
मैं निज उर के उपहार लिए फिरता हूँ
है यह अपूर्ण संसार न भाता मुझको
मैं सपनों का संसार लिए फिरता हूँ।
मैं जला हृदय में अग्नि दहा करता हूँ
सुख-दुःख दोनों में मग्न रहा करता हूँ
जग भवसागर तरने को नाव बनाए
मैं मन मौजों ऊपर मस्त बहा करता हूँ।।
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बात सीधी थी पर एक बार
भाषा के चक्कर में
जरा टेड़ी फँस गई
उसे पाने की कोशिश में
भाषा को उल्टा पल्टा
तोड़ा मरोड़ा
घुमाया फिराया
कि बात या तो बने
या फिर भाषा से बाहर आए
लेकिन इससे भाषा के साथ-साथ
बात और भी पेचीदा होती चली गई।
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जाति-प्रथा के खेदजनक परिणामों की नीरस गाथा को सुनते-सुनाते आप में से कुछ लोग निश्चय ही ऊब गए होंगे। यह अस्वाभाविक भी नहीं है। अतः अब मैं समस्या के रचनात्मक पहलू को लेता हूँ। मेरे द्वारा जाति-प्रथा की आलोचना सुनकर आप लोग मुझसे यह प्रश्न पूछना चाहेंगे कि यदि मैं जातियों के विरुद्ध हूँ, तो फिर मेरी दृष्टि में आदर्श-समाज क्या है? ठीक है, यदि ऐसा पूछेंगे, तो मेरा उत्तर होगा कि मेरा आदर्श-समाज स्वतंत्रता, समता, भ्रातृत्व पर आधारित होगा। क्या यह ठीक नहीं है. भ्रातृता अर्थात् भाईचारे में किसी को क्या आपत्ति हो सकती है ? किसी भी आदर्श समाज में इतनी गतिशीलता होगी होनी चाहिए जिससे कोई भी वांछित परिवर्तन समाज के एक छोर से दूसरे तक संचालित हो सके। ऐसे समाज के बहुविधि हितों में सब का भाग होना चाहिए तथा सबको उसकी रक्षा के प्रति सजग रहना चाहिए। सामाजिक जीवन में अबाध संपर्क के अनेक साधन व अवसर उपलब्ध होने चाहिए। तात्पर्य यह कि दूध-पानी के मिश्रण की तरह भाईचारे का यही वास्तविक रूप है, और इसी का दूसरा नाम लोकतंत्र है। क्योंकि लोकतंत्र केवल शासन की एक पद्धति ही नहीं है, लोकतंत्र मूलतः सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति तथा समाज के सम्मिलित अनुभवों के आदान-प्रदान का नाम है। इनमें यह आवश्यक है कि अपने साथियों के प्रति श्रद्धा व सम्मान का भाव हो।
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वर्षा के बादलों के स्वामी है इंद्र और इंद्र की सेना टोली बाँधकर कीचड़ से लथपथ निकलती, पुकारते हुए मेषों को, पानी माँगते हुए प्यासे गलों और सूखे खेतों के लिए। पानी की आशा पर जैसे सारा जीवन आकर टिक गया हो। बस एक चात मेरे समझ में नहीं आती थी कि जब चारों ओर पानी की इतनी कमी है तो लोग घर में इतनी कठिनाई से इक‌ट्ठा करके रखा हुआ पानी बाल्टी भर-भर कर इन पर क्यों फेंकते हैं। कैसी निर्मम बर्बादी है पानी की। देश की कितनी क्षति होती है इस तरह के अंधविश्वासों से। कौन कहता है इन्हें इंद्र की सेना। अगर इंद्र महाराज से ये पानी दिलवा सकते हैं तो खुद अपने लिए पानी क्यों नहीं माँग लेते ? क्यों मोहल्ले भर का पानी नष्ट करवाते घूमते हैं, नहीं यह सब पाखंड है। अंधविश्वास है। ऐसे ही अंधविश्वासों के कारण हम अंग्रेजों से पिछड़ गए और गुलाम बन गए। 
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मन मोहिनी प्रकृति की गोद में बसा है।
सुख स्वर्ग सा जहाँ है वह देश कौनसा है?
जिसका चरण निरन्तर रत्नेश धो रहा है।
नदियाँ जहाँ सुधा की घारा बहा रही हैं
सींचा हुआ सलोना वह देश कौनसा है?
जिसके बड़े रसीले फल, कन्द, नाज, मेवे सब
अंगने सजे हैं वह देश कौनसा है?
जिसके सुगन्ध वाले सुन्दर प्रसून प्यारे
दिन रात हँस रहे हैं वह देश कौनसा है?
मैदान गिरिवनों में हरियाली लहकती
आनंदमय जहाँ है वह देश कौनसा है?
जिसके अनंत धन से धरती भरी पड़ी है
संसार का शिरोमणि वह देश कौनसा है?
(i) भारतवर्ष कहाँ बसा हुआ है ?
(ii) भारतवर्ष के चरण निरंतर कौन थो रहा है?
(iii) भारतवर्ष की नदियों का जल कैसा है ?
iv) कवि ने दिन-रात हँसता हुआ किसे बताया है ?
(v) कवि ने संसार का शिरोमणि किसे कहा है ?
(vi) प्रस्तुत पद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
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मेरा मन पूछता है-किस ओर? मनुष्य किस ओर बढ़ रहा है? पशुता की ओर या मनुष्यता की ओर, अस्त्र बढ़ाने की ओर या अस्त्र काटने की ओर? मेरी निर्बोध बालिका ने मानो मनुष्य जाति से ही प्रश्न किया है-जानते हो, नाखून क्यों बढ़ते हैं? यह हमारी पशुता के अवशेष हैं। मैं भी पूछता हूँ जानते हो, अस्व-शस्त्र क्यों बढ़ रहे हैं? ये हमारी पशुता की निशानी है। भारतीय भाषाओं में प्रायः ही अंग्रेजी के इण्डिपेण्डेन्स' शब्द का समानार्थक शब्द नहीं व्यवहत होता। 15 अगस्त को जब अंग्रेजी भाषा के पत्र 'इण्डिपेण्डेन्स' की घोषणा कर रहे थे, देशी भाषा पत्र 'स्वाधीनता दिवस' की चर्चा कर रहे थे। 'इण्डिपेण्डेन्स' का अर्थ है अनधीनता या किसी की अधीनता का अभाव पर 'स्वाधीनता' शब्द का अर्थ है-अपने अधीन रहना। अंग्रेजी में कहना हो, तो 'सेल्फडिपेण्डेन्स' कह सकते हैं। मैं कभी-कभी सोचता हूँ कि इतने दिनों तक अंग्रेजी की अनुवर्तिता करने के बाद भी भारतवर्ष 'इण्डियेण्डेन्स' को अनधीनता क्यों नहीं कह सका? उसने अपनी आजादी के जितने भी नामकरण किये स्वतंत्रता, स्वराज्य, स्वाधीनता उन सब में 'स्व' का बन्धन अवश्य रखा। भारतीय चित्त जो आज भी 'अनधीनता' के रूप में न सोचकर 'स्वाधीनता' के रूप में सोचता है, वह हमारे दीर्घकालीन संस्कारों का फल है। यह 'स्व' के बन्धन को आसानी से नहीं छोड़ सकता। 
(i) मनुष्य किस ओर बढ़ रहा है ? 
(ii) 'इण्डिपेण्डेन्स' शब्द का क्या अर्थ है और लेखक उसे 'स्वाधीनता' के अर्थ में ग्रहण क्यों नहीं करता ? 
(iii) मनुष्य किस बंधन को आसानी से नहीं छोड़ सकता ? 
(iv) हमारी पशुता के अवशेष किसे कहा गया है ? 
(v) हमने अपनी आजादी के कितने नामकरण किए हैं ? 
(vi) गद्यांश का उचित शीर्षक बताइए। 
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स्वयं को प्रधानाचार्य, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बीकानेर मानते हुए निर्देशक, माध्यमिक शिक्षा बीकानेर को "स्वच्छता अभियान" हेतु बजट स्वीकृति के लिए एक अर्द्ध-शासकीय पत्र का प्रारूप लिखिए।
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मुख्य प्रबंधक, पंजाब नेशनल बैंक, जयपुर की ओर से अपनी शाखा महेश नगर हेतु कुछ कम्प्यूटर और कैमरे लगवाने हेतु निविदा आमंत्रित करते हुए समाचार-पत्र में निविदा सूचना का प्रारूप तैयार कीजिए।
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यशोधर बाबू को किशन दा की मृत्यु के संबंध में क्या जानकारी मिली ?
  • A
    बीमारी से मरने की
  • B
    किसी के द्वारा मार दिए जाने की
  • C
    जो हुआ होगा से मरने की
  • D
    कुछ भी नहीं मिली
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वाक्य में प्रयुक्त व्यंग्यार्थं जब किसी शब्द विशेष पर निर्भर न होकर शब्द का अर्थ देने से प्रकट होता है, वहाँ ‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾‾ व्यंजना शब्द शक्ति होती है।
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