Question types

Model Paper 5 question types

49 questions across 11 question groups — pick any mix to generate a Hindi -अनिवार्य paper with step-by-step answer keys.

49
Questions
11
Question groups
5
Question types
Sample Questions

Model Paper 5 questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

फिर-फिर
बार-बार गर्जन
वर्षण है मूसलधार,
हृदय थाम लेता संसार,
सुन-सुन घोर वज्र हुंकार।
अशनि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर,
क्षत-विक्षत हत अचल-शरीर,
गगन-स्पर्शी स्पर्धा धीर।
हँसते हैं छोटे पौधे लघुभार-
शस्य अपार,
हिल-हिल
खिल-खिल,
हाथ हिलाते,
तुझे बुलाते,
विप्लव-रव में छोटे ही हैं शोभा पाते।
View full solution
किसबी, किसान-कुल, बनिक, भिखारी, भाट,
चाकर, चपल नट, चोर, चार, चेटकी ।
पेटको पढ़त, गुन गढ़त, चढ़त गिरी,
अटत गहन - गन, अहन अखेटकी ।।
ऊँचे - नीचे करम, धर्म - अधरम करि,
पेट ही को पचत, बेचत बेटा - बेटकी।
'तुलसी' बुझाइ एक राम घनश्याम ही तें,
आगि बड़वागितें बड़ी है आग पेटकी ।।
View full solution
मैं सोचता हूँ कि पुराने की यह अधिकार-लिप्सा क्यों नहीं समय रहते सावधान हो जाती ? जरा और मृत्यु, यह दोनों ही जगत के अतिपरिचित और अतिप्रामाणिक सत्य हैं। तुलसीदास ने अफसोस के साथ इनकी सच्चाई पर मोहर लगाई थी 'धरा को प्रमाण यही तुलसी जो फरा सो झरा, जो वरा सो बुताना!' मैं शिरीष के फूलों को देख कर कहता हूँ कि क्यों नहीं फलते ही समझ लेते बाबा कि झड़ना निश्चित है! सुनता कौन है? महाकाल देवता सपासप कोड़े चला रहे हैं जीर्ण और दुर्बल झड़ रहे हैं, जिनमें प्राणकण थोड़ा भी उर्ध्वमुखी है, वे टिक जाते हैं। दुरंत प्राणधारा और सर्वव्यापक कालाग्नि का संघर्ष निरंतर चल रहा है। मुर्ख समझते हैं कि जहाँ बने हैं, वहीं देर तक बने रहें तो काल देवता की आँख से बचा जाएँगे। भोले हैं वे। हिलते-जुलते रहो, स्थान बदलते रहो, आगे की ओर मुँह किए रहो तो कोड़े की मार से बच भी सकते हो। जमे कि मरे।
View full solution
दोनों ही लड़के राज-दरबार के भावी पहलवान घोषित हो चुके थे। अतः दोनों का भरण-पोषण दरबार से ही हो रहा था। प्रतिदिन प्रातः काल पहलवान स्वयं डोलक बजाकर दोनों से कसरत करवाता। दोपहर में, लेटे लेटे दोनों का सांसारिक ज्ञान की भी शिक्षा देता समझे। ढोलक की आवाज पर पूरा ध्यान देना। हाँ, मेरा गुरु कोई पहलवान नहीं, यही ढोल है, समझे। ढोल की आवाज के प्रताप से ही मैं पहलवान हुआ। दंगल में उत्तर कर सबसे पहले ढोलों को प्रणाम करना, समझे। ऐसी ही बहुत-सी आतें वह कहा करता। फिर मालिक को कैसे खुश रखा जाता है, कब कैसा व्यवहार करना चाहिए, आदि की शिक्षा वह नित्य दिया करता था।
किंतु उसकी शिक्षा-दीक्षा, सब किए-कराए पर एक दिन पानी फिर गया। वृद्ध राजा स्वर्ग सिधार गए। नए राजकुमार ने विलायत से आते ही राज्य को अपने हाथ में ले लिया। राजा साहब के समय शिथिलता आ गई थी, राजकुमार के आते ही दूर हो गई। बहुत से परिवर्तन हुए। उन्हीं परिवर्तनों की चपेटाघात में पड़ा पहलवान भी। दंगल का स्थान घोड़े की रेस ने लिया।
View full solution
खड़-खड़-खड़-खड़ करने वाले
ओ पीपल के पीले पत्ते ।
अब न तुम्हारा रहा जमाना ।।
शक्ल पुरानी, रंग पुराना,
सीख पुरानी, ढंग पुराना
अब न तुम्हारा रहा जमाना।
आज गिरी, कि गिरो कल परसों,
तुमको तो अब गिरना ही है।
बदल गयी ऋतु, राह देखती,
लाल-लाल पत्तों की दुनिया।
हरे-हरे कुछ भूरे भूरे,
टूसों से लद रही डलियाँ
इनका स्वागत करते जाओ,
पतझर आया झरते जाओ 
ओ पीपल के पीले पत्ते ।
अब न तुम्हारा रहा जमाना ।।
(i) पद्यांश का मूल भाव लिखिए।
(ii) 'अब न तुम्हारा रहा जमाना' कवि ने ऐसा क्यों कहा है ?
(iii) 'इनका स्वागत करते जाओ' कवि ने ऐसा क्यों कहा है ?
(iv) 'बदल गई ऋतु' का लाक्षणिक अभिप्राय क्या है ?
(v) कवि के अनुसार पीपल के पीले पत्ते किसके प्रतीक है ?
(vi) पतझड़ के आने पर क्या होता है ?
View full solution
सड़क चलते आदमी को आम आदमी कहा जाता है। यह कितना अजीब है ना। सड़क खास होती है, उस पर चलने वाला आदमी आम ही होता है। वह चलता है पर अपनी छाप नहीं छोड़ पाता। उस पर सड़क अपनी छाप छोडती है। शायद इसीलिए उसे सड़क-छाप आदमी कहते हैं। वह अकेला चलता है, समूह में चलता है, जुलूस में चलता है, सड़क के किनारे खडे हो जुलूस देखता है। कुछ समझता है, कुछ समझ नहीं पाता। जानने की कोशिश करता है उसे पता नहीं चलता। वह आश्चर्य से देखता है। खास आदमी उसे आश्चर्य से देखते हुए देखते हैं। वे कहते हैं यह आम आदमी है। ये खास आदमी, आम आदमी की ओर आश्चर्य से देखने और उसे न समझ पाने के बावजूद, आम आदमी नहीं होते। खास आदमी जो आम आदमी को समझ नहीं पाते, आम आदमी को मूर्ख कहते हैं। स्वयं न समझ पाने के बावजूद वे मूर्ख नहीं होते। इसलिए कि वे खास आदमी होते हैं। न जानने, न समझ पाने के बावजूद वे मूर्ख कैसे हो सकते हैं? आम आदमी न समझ पाने के कारण आम आदमी होता है। खास आदमी न समझ पाने के बावजूद खास आदमी होता है। 
(I) सड़क छाप आदमी किसे कहते हैं ? 
(ii) जो अकेला चलता है, समूह में चलता है, जुलूस में चलता है और सड़क के किनारे खड़े होकर जुलूस देखता है वह कौन है? 
(iv) खास आदमी आम आदमी को समझ नहीं पाते इसलिए भी आम आदमी को क्या कहते हैं ? 
(v) आम आदमी को और क्या कहा जा सकता है ?
(vi) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए। 
View full solution
अध्यक्ष, नगर निगम, इन्दौर को अध्यक्ष, नगर निगम जयपुर की ओर से स्वच्छता कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु सुझाव व उपाय आमंत्रित करते हुए अर्द्धसरकारी पत्र लिखिए।
View full solution
स्वयं को प्रधानाचार्य, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बीकानेर मानते हुए निर्देशक, माध्यमिक शिक्षा बीकानेर को "स्वच्छता अभियान" हेतु बजट स्वीकृति के लिए एक अर्द्ध-शासकीय पत्र का प्रारूप लिखिए।
View full solution

Generate a Model Paper 5 paper free

Pick question groups from the list above, set marks and difficulty, and export a branded PDF with step-by-step answer keys. First 3 chapters free — no signup.

Download App