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उत्सर्ग question types

29 questions across 8 question groups — pick any mix to generate a हिन्दी paper with step-by-step answer keys.

29
Questions
8
Question groups
5
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Sample Questions

उत्सर्ग questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

राजा को जब बलिदान की जानकारी मिली तो उन्होंने क्या किया?
  • A
    सैनिकों को दण्डित किया
  • B
    जंगल जलवा दिए
  • पेड़ों की कटाई रुकवा दी
  • D
    विश्नोई समाज से क्षमा माँगी

Answer: C.

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खेजड़ी का वृक्ष विश्नोई समाज के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?
  • A
    यह फलदार होता है
  • B
    इससे आय होती है
  • यह आस्था और जीवन से जुड़ा है
  • D
    यह छाया देता है

Answer: C.

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अमृता देवी की कितनी बेटियों ने उनका साथ दिया?
  • A
    दो
  • B
    चार
  • तीन
  • D
    एक

Answer: C.

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अमृता देवी ने पेड़ों को बचाने के लिए क्या किया?
  • A
    राजा से निवेदन किया
  • पेड़ों से लिपट गई
  • C
    गाँव छोड़ दिया
  • D
    अदालत में केस किया

Answer: B.

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खण्ड 'अ'खण्ड 'ब'
1. अमृता देवी(क) पर्यावरण प्रेमी समुदाय
2. विश्नोई समाज(ख) राजस्थान में स्थित
3. खेजड़ली गाँव(ग) बलिदान देने वाले
4. 363 लोग(घ) पेड़ों की रक्षा के लिए
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"ये खेजड़ी हमारी माँ है, हम सिर कटवा लेंगे, परन्तु पेड़ नहीं कटने देंगे।" अमृता देवी अपनी पुत्रियों और पति सहित पेड़ों से लिपट गई और सिपाहियों को ललकारा "खेजड़ी से पहले मेरी गर्दन पर वार करना होगा अन्यथा ये खेजड़ी नहीं कटेगी।" सैनिकों ने सबसे पहला वार अमृता की गर्दन पर किया और देखते ही देखते रामोजी, भागू, अणसी और रतनी ने अपने बलिदान की गाथा लिख दी। रेगिस्तान की स्वर्णमयी धरती रक्त की धारा से लाल हो गई। अमृता के बलिदान से प्रेरित होकर उपस्थित नर-नारियों ने हरी-भरी खेजड़ियों को अपने गले लगाकर सर्वोच्च बलिदान का वरण किया। शक्ति, शौर्य और शांति के लिए विख्यात मरुधरा पर एक के बाद एक 363 वृक्ष-प्रेमियों ने पेड़ों से लिपटकर अपने प्राणों की आहुति दे दी।
(क) 'खेजड़ी से पहले मेरी गर्दन पर वार करना होगा।' यह पंक्ति किसने कही थी?
(ख) रक्त की धारा से कौन लाल हो गयी?
(ग) मरुधरा क्यों विख्यात है?
(घ) कितने वृक्ष प्रेमियों ने पेड़ों से चिपक कर अपने प्राणों की आहुति दी?
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अमृता देवी ने अपने पति रामोजी का आह्वान करते हुए कहा, "हमें चलना होगा। हमें जांभोजी द्वारा बताए गए नियम 'जीव दया पालणी, रूंख लीलो नहीं घावै' का पालन करना है।" बिलौना छोड़कर अमृता और उनके पीछे रामोजी, भागू, अणसी तथा रतनी जंगल की तरफ दौड़ पड़े। इसकी सूचना खेजड़ली ग्राम तथा आसपास के गाँवों में भी तेजी से फैल गई तथा आसपास के प्रकृति प्रेमी विश्नोई पंथ के अनुयायियों ने भी खेजड़ली पहुँचने का प्रण कर लिया और जो जहाँ था वहाँ से खेजड़ली की ओर दौड़ पड़ा।
(क) अमृता ने किसका आह्वान किया?
(ख) जांभोजी का नियम क्या था?
(ग) जंगल की तरफ कौन-कौन गया?
(घ) किसके अनुयायियों ने खेजड़ली पहुंचने का प्रण लिया?
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