$\quad$ दूसरा घिसा टायर लगाकर बस फिर चली। अब हमने वक्त पर पन्ना पहुँचने की उम्मीद छोड दी थी। पन्ना कभी भी पहुँचने की उम्मीद छोड़ दी थी। पन्ना क्या, कहीं भी, कभी भी पहुँचने की उम्मीद छोड़ दी थी। लगता था, जिंदगी इसी बस में गुजारनी है और इससे सीधे उस लोक को प्रयाण कर जाना है। इस पृथ्वी पर उसकी कोई मंजिल नहीं है। हमारी बेताबी, तनाव खत्म हो गए। हम बड़े इत्मीनान से घर की तरह बैठ गए। चिंता जाती रही। हँसी-मजाक चालू हो गया।
(क) उपर्युक्त गद्यांश किस पाठ से उद्धृत है? बताइये।
(ख) बस में घिसा टायर क्यों लगाया गया था और क्यों?
(ग) लेखक ने कहाँ सही वक्त पर पहुँचने की उम्मीद छोड़ दी थी?
(घ) लेखक किसकी चिन्ता से मुक्त हो गया था?
View full solution →(क) उपर्युक्त गद्यांश किस पाठ से उद्धृत है? बताइये।
(ख) बस में घिसा टायर क्यों लगाया गया था और क्यों?
(ग) लेखक ने कहाँ सही वक्त पर पहुँचने की उम्मीद छोड़ दी थी?
(घ) लेखक किसकी चिन्ता से मुक्त हो गया था?