ठगा भी गया हूँ, धोखा भी खाया है, परन्तु बहुत कम स्थलों पर विश्वासघात नाम की चीज मिलती है। केवल उन्हीं बातों का हिसाब रखो, जिनमें धोखा खाया है तो जीवन कष्टकर हो जायेगा, परन्तु ऐसी घटनाएँ भी बहुत कम नहीं हैं जब लोगों ने अकारण सहायता की है, निराश मन को ढांढ़स दिया है और हिम्मत बधाई है। कविवर रवीन्द्रनाथ ने अपने प्रार्थना-गीत में भगवान से प्रार्थना की थी कि संसार में केवल नकसान ही उठाना पड़े, धोखा ही खाना पड़े तो ऐसे अवसरों पर भी हे प्रभो! मुझे ऐसी शक्ति दो कि मैं तुम्हारे ऊपर सन्देह न करूँ।
(क) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(ख) किन बातों को याद रखने से जीवन कष्टमय बनता है?
(ग) कविवर रवीन्द्रनाथ ने क्या प्रार्थना की थी?
(घ) निराश मन को ढांढ़स बढ़ाने से क्या अनुभव होता है?
(क) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
(ख) किन बातों को याद रखने से जीवन कष्टमय बनता है?
(ग) कविवर रवीन्द्रनाथ ने क्या प्रार्थना की थी?
(घ) निराश मन को ढांढ़स बढ़ाने से क्या अनुभव होता है?