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पत्र लेखन [4M]

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Question 14 Marks
अपने विद्यालय के प्रधानाचार्यजी को एक प्रार्थना-पत्र लिखिए जिसमें बुक बैंक से पाठ्य-पुस्तकें दिलवाने का निवेदन किया गया हो।
Answer

सेवा में 
श्रीमान् प्रधानाचार्य महोदय, 
राजकीय उ. मा. विद्यालय, 
टोंक। 
विषय - बुक-बैंक से पाठ्य-पुस्तकें दिलवाने के सम्बन्ध में। 
महोदय, 
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय में कक्षा नवम (स) का छात्र हूँ। मैं आर्थिक दृष्टि से पिछड़े वर्ग का गरीब परिवार का हूँ। इस कारण न तो मुझे किसी से पाठ्य-पुस्तकें प्राप्त हुई हैं और न मैं खरीद सका हूँ। बिना पाठ्य पुस्तकों के मेरी पढ़ाई सही नहीं हो रही है। मुझे बुक-बैंक से कक्षा की सभी पाठ्य-पुस्तकें उपलब्ध हो जाएँ, तो मेरा अध्ययन सुचारु चल सकता है।
अतः प्रार्थना है कि मुझे कक्षा की सभी विषयों की पाठ्य-पुस्तकें विद्यालय के बुक बैंक से दिलवाने की महती कृपा करें। 

दिनांक : 28 जुलाई, 20xx 

प्रार्थी, 
रामेश्वर बुनकर 
कक्षा-IX (स) 

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Question 24 Marks
अपने प्रधानाचार्य को चरित्र प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए एक प्रार्थना-पत्र लिखिए।
Answer

सेवा में, 
श्रीमान् प्रधानाचार्य महोदय, 
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, 
अजमेर। 
महोदय, 
निवेदन है कि मुझे समाज कल्याण विभाग कार्यालय में आर्थिक सहायता प्राप्त करने हेतु अपना चरित्र प्रमाण-पत्र जमा कराना है। मैं कक्षा सप्तम से आपके विद्यालय का नियमित छात्र हूँ तथा इस समय नवम कक्षा में अध्ययन कर रहा हूँ। 
अतः प्रार्थना है कि मुझे चरित्र प्रमाण-पत्र प्रदान करने की कृपा करें। 

प्रार्थी, 
बाबूलाल मीणा 
कक्षा-9 (अ)


दिनांक 18.10.20xx 

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Question 34 Marks
आपके कस्बे के पार्षद ने खुला शौच मुक्त स्वच्छता अभियान में जो प्रशंसनीय कार्य किये, उस सन्दर्भ में उन्हें धन्यवाद का प्रशंसा-पत्र लिखिए।
Answer

25 बी, पटेल नगर, मन्दिर मार्ग, 
उदयपुर 
दिनांक : 25 अप्रैल, 20xx 

प्रिय महेन्द्रजी, 
राजस्थान के सभी प्रमुख समाचार-पत्रों में प्रकाशित विवरण के अनुसार ज्ञात हुआ कि आपने अपने कस्बे में खुला शौच मुक्ति का अभियान चलाकर सराहनीय कार्य किया। इस कार्य में आपको जो सफलता मिली, उसके लिए हमारी ओर से साधुवाद!
साथ ही आपने स्वच्छता अभियान को नयी गति देकर अपने कस्बे का जो गौरव बढ़ाया, वह प्रशंसायोग्य तथा अनुकरणीय कार्य है। आप जैसे कर्मठ, सेवाभावी लोगों से ही देश में प्रचलित खुला शौच मुक्त स्वच्छता अभियान सफल हो सकेगा। इस प्रयास के लिए आपको धन्यवाद। आशा ही नहीं, पूर्ण विश्वास है कि आप जीवन में इसी तरह सामाजिक कार्यों का सफलता से संचालन करते रहेंगे। 

आपका शुभेच्छु, 
घनश्याम राजावत 

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Question 44 Marks
आपके विद्यालय में खेल-दिवस मनाया गया। आपने कई खेल-प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर पुरस्कार जीते। अपने पूर्व खेल-शिक्षक को पत्र लिखकर अपनी उपलब्धि के बारे में बताइए तथा आगे भी उनके दिशा-निर्देश एवं आशीर्वाद की इच्छा व्यक्त कीजिए।
Answer

सरस-निकुंज, मोती मगरी, 
उदयपुर 
दिनांक.: 28 नवम्बर, 20xx 

पूजनीय गुरुवर, 
सादर प्रणाम! 
आशा है आप सपरिवार सानन्द होंगे। यहाँ से कुछ विलम्ब से पत्र भेज रहा हूँ, अतएव क्षमा चाहता हूँ। इस वर्ष अपने विद्यालय में खेल-दिवस धूमधाम से मनाया गया। इसमें अनेक खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। मैंने सभी प्रमुख प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और पुरस्कार भी जीते। यह सब आपकी कृपा एवं शिक्षा का सुपरिणाम रहा, जो मैं आपके बताये अनुसार खेलों में विशेष प्रयास कर भाग लेता रहा। आपकी इस कृपा के लिए मैं अपना हार्दिक आभार एवं धन्यवाद व्यक्त करता हूँ। मैं आगे भी खेल प्रतियोगिताओं में सफलता पाना चाहता हूँ। इसके लिए आपसे दिशा निर्देश प्राप्त करना चाहता हूँ। आपका मार्गदर्शन मेरे लिए आगे भी शुभ आशीर्वाद के रूप में अवश्य फलित होगा। 
आपके स्नेहिल व्यवहार का बार-बार स्मरण हो आता है। शीतकालीन अवकाश पर मैं आपके दर्शन करने अवश्य आऊँगा। आपके दिशा-निर्देश सहित आशीर्वाद के पत्र की प्रतीक्षा में, 

आपका आज्ञाकारी, 
महावीर सिंह 

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Question 54 Marks
विदेश यात्रा पर जाने वाले अपने मित्र को उसकी मंगलमय यात्रा के लिए एक शुभकामना-पत्र लिखिए।
Answer

कल्याण-भवन, 
सीकर रोड, 
जयपुर 
दिनांक : 25 जुलाई, 20xx

प्रिय मित्र सुधीर, 
सप्रेम नमस्ते! 
तुम्हारा पत्र प्राप्त हुआ, पढ़कर पता चला कि तुम अपने पिताजी के साथ एक सप्ताह की विदेश-यात्रा पर जा रहे हो। इस समाचार से मझे अत्यधिक प्रसन्नता एवं हर्ष हो रहा है। तम्हारी विदेश-भ्रमण की इच्छा पूरी होने जा रही है। इसलिए इस अवसर पर मेरी ओर से हार्दिक शुभकामना। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि तुम्हारी यह यात्रा मंगलमय तथा उल्लासपूर्ण होवे। 
अपने पूज्य पिताजी-माताजी को मेरा प्रणाम कहना। विदेश-यात्रा से लौटने पर अपने सुखद अनुभवों को पत्र द्वारा अवश्य प्रेषित करना। पुनः शुभकामना के साथ, 

तुम्हारा मित्र, 
राजीव सिंह

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Question 64 Marks
आपकी छोटी बहिन की एक प्रिय सहेली के जन्म-दिवस के उपलक्ष्य में उसे शुभकामना-पत्र लिखिए।
Answer

डी-40; कृष्णा नगर, 
भरतपुर 
दिनांक : 22 जून, 20xx 

चिरंजीवी अमृता, 
सस्नेह आशीष! 
जन्म-दिवस के उपलक्ष्य में तुम्हारा निमन्त्रण-पत्र मिला। इस शुभ-अवसर पर मेरी ओर से कोटिशः मंगल कामना। ईश्वर से प्रार्थना है कि तुम्हें लम्बी आयु प्रदान करे और जन्म-दिवस मनाने का निरन्तर अवसर मिलता रहे। तुम्हारा जन्म-दिवस मंगलमय हो, इसी शुभ-कामना के साथ छोटी बहिन के हाथों प्रेषित भेंट स्वीकार करना। 

तुम्हारी शुभचिन्तक, 
अनुराधा

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Question 74 Marks
अपने मित्र के पिताजी का असामयिक निधन होने पर एक संवेदना-पत्र लिखिए।
Answer

बी-4, प्रताप कुंज, 
बापू नगर, जयपुर 
दिनांक : 16 अगस्त, 20xx

प्रिय मित्र सुशील, 
आपका पत्र पाकर हृदय पर आघात-सा लगा। मैं सोच भी नहीं सकता था कि आपके पिताजी का इस प्रकार अकस्मात् देहावसान हो जायेगा। दो मास पूर्व जब मैं आपके यहाँ आया था, तो उस समय उनका स्वास्थ्य एकदम अच्छा' दिखाई दे रहा था, परन्तु जैसा कि आपने लिखा है कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा। मित्र, यह रोग ही ऐसा है, हृदयाघात का पहले से मालूम होना कठिन रहता है। इस संसार में जन्म और मृत्यु तो ईश्वर की इच्छा पर निर्भर है। किसका जीवनान्त कब और किस प्रकार होगा, यह ईश्वर ही जानता है। 
अब आपसे मैं यही कह सकता हूँ कि आप इस मार्मिक आघात को सहने का साहस एकत्र करें और सभी पारिवारिक जनों को सान्त्वना प्रदान करें। 
मैं भगवान् से प्रार्थना करता हूँ कि वह दिवंगत आत्मा को शान्ति एवं सद्गति प्रदान करे और पारिवारिक जनों को शोक सहन करने की क्षमता प्रदान करें। 

आपका स्नेही, 
सुशान्त

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Question 84 Marks
आप कोटा निवासी अजयकुमार हैं। आपके सुपरिचित अनिल शर्मा एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गये हैं। इस निमित्त उन्हें एक संवेदना-पत्र लिखिए।
Answer

7/25, विज्ञान नगर, 
कोटा 
दिनांक : 25 अगस्त, 20xx 

प्रिय मित्र अनिल, 
सप्रेम नमस्ते ! 
यह समाचार सुनकर बहुत ही दुःख हुआ कि आपकी मोटर-साइकिल को पीछे से एक ट्रक ने टक्कर मार दी और आप दुर्घटनाग्रस्त हो गये। यह तो भगवान् की कृपा और परिवार के बड़े-बूढ़ों का आशीर्वाद रहा कि आप बच गये। इस दुर्घटना से आपके बायें पैर की हड्डी टूट गई। इस बात से काफी दुःख हो रहा है। 

इस समाचार को सुनकर मैं आपके पास आना चाहता हुआ भी विशेष कार्यवश नहीं आ सका। इसलिए संवेदना पत्र भेज रहा हूँ। आपके पैर में प्लास्टर चढ़ा हुआ है, इससे आपको नित्यकर्म करने में काफी परेशानी हो रही होगी। परन्तु ऐसे में क्या किया जा सकता है। ईश्वर आपको कष्ट सहने की क्षमता प्रदान करे। 

मैं समय मिलते ही आपसे मिलने का पूर्ण प्रयास करूंगा। मेरी ओर से आपके परिजनों का अभिवादन एवं पुनः संवेदना-निवेदन। 

आपका, 
अजय कुमार 

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Question 94 Marks
स्वयं को योगेश मानते हुए अपने अनुज कपिल को भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रथम स्थान प्राप्त होने के उपलक्ष्य में आयोजित प्रीतिभोज का निमन्त्रण-पत्र लिखिए।
Answer

4 अ-153, कावेरी पथ, 
मानसरोवर, 
जयपुर 

बन्धुवर श्रीमान्........ 
परम हर्ष का विषय है कि मेरे अनुज कपिल ने इस वर्ष आयोजित भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। अपार प्रसन्नता के इस अवसर पर समस्त शुभचिन्तकों एवं मित्रों के साथ एक संक्षिप्त समारोह का आयोजन रखा गया है। इस निमित्त दिनांक 25.7.20xx को हमारे आवास पर सायंकाल सात बजे प्रीति-भोज आयोजित है। इसमें सपरिवार समय पर पधारकर हमें अनुगृहीत करने की कृपा करें। 
आपके स्वागत के लिए समुत्सुक, 

विनीत : 
योगेश

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Question 104 Marks
स्वयं को आत्मप्रकाश भारद्वाज मानते हुए अपनी छोटी बहिन के शुभ-विवाह का निमन्त्रण-पत्र लिखिए।
Answer

मान्यवर श्री................... 
परमपिता परमात्मा की असीम अनुकम्पा और पूर्वजों के आशीर्वाद से मेरी सौभाग्यकांक्षिणी अनुजा करुणा का शुभ विवाह चिरंजीवी वरुणेश, निवासी कोटा के साथ दिनांक 10 मई, 20xx को सम्पन्न होना निश्चित हुआ है। 
कृपया इस शुभ-माँगलिक अवसर पर पधारकर नव वर-वधू को आशीर्वाद देकर कृतार्थ करें। 

विनीत :
आत्मप्रकाश भारद्वाज

दर्शनाभिलाषी : 
कमल, विजय 
एवं समस्त भारद्वाज परिवार 

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Question 114 Marks
अजमेर निवासी सोमदत्त की ओर से अपने छोटे भाई रामदत्त को राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा में सफल रहने पर बधाई देते हुए प्रेरणास्पद पत्र लिखिए।
Answer

अजमेर 
दिनांक : 11 जुलाई, 20xx 

प्रिय अनुज रामदत्त, 
सस्नेह आशीष! 
यह समाचार जानकर अत्यधिक प्रसन्नता हो रही है कि राष्ट्रीय प्रतिभा खोज में तुम सफल रहे हो। तुम्हारी इस सफलता पर मेरी ओर से हार्दिक बधाई। तुमने अध्ययन में जो रुचि रखी और निरन्तर जो परिश्रम किया, यह उसी का शुभ परिणाम है। भविष्य में भी यदि तुम इसी प्रकार परिश्रम करते रहोगे, तो तुम्हारा भविष्य अवश्य ही उज्ज्वल बन जायेगा। तुम्हारी इस सफलता से हमारे परिवार का गौरव बढ़ा है। आगे भी तुमसे यही अभिलाषा रखते हैं। 
मेरे सभी साथी भी तुम्हें इस उपलक्ष्य में बधाई दे रहे हैं। अपना कुशल-पत्र शीघ्र भेजना। शेष कुशल। 

तुम्हारा अग्रज, 
सोमदत्त 

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Question 124 Marks
बीकानेर निवासी अपने मित्र जितेन्द्र को राष्ट्रीय खेलों की तैराकी प्रतियोगिता में रजत पदक प्राप्त करने के उपलक्ष्य में बधाई-पत्र लिखिए।
Answer

4 बी, आदर्श नगर, 
जयपुर 
दिनांक : 27 अक्टूबर, 20xx 

प्रिय मित्र जितेन्द्र, 
सप्रेम नमस्ते! 
यह समाचार सुनकर मुझे अपार हर्ष हुआ कि आपने राष्ट्रीय खेलों के अन्तर्गत आयोजित तैराकी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर रजत पदक प्राप्त करने में सफल रहे हो। यह आपके लिए अत्यधिक गौरव का अवसर है। आपने लगातार तैराकी अभ्यास में जो प्रयास किये, उसका परिणाम आज सामने आया है। इस सफलता से न केवल अपने प्रदेश का नाम गौरवान्वित हुआ है, अपितु देश का भी गौरव बढ़ा है। आपके इस सम्मान से हमारा पूरा परिवार आह्लादित है। मैं इस शुभ अवसर पर हार्दिक बधाई प्रेषित करता हूँ और आशा करता हूँ कि अगली बार आपको स्वर्ण-पदक की प्राप्ति होगी। 
अपने पूज्य पिताजी को मेरा चरण-स्पर्श कहना। इस सम्मान के लिए पुनः बधाई। 

तुम्हारा अभिन्न मित्र, 
अभिनव 

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Question 134 Marks
स्वयं को बीकानेर की एकता मानकर जयपुर में रह रही अपनी छोटी बहिन प्रतिभा को सी.पी.एम.टी. की परीक्षा में सफल होने पर अपनी प्रसन्नता का एक पत्र लिखिए।
Answer

रानी बाजार, 
बीकानेर 
दिनांक : 28 मई, 20xx 

प्रिय अनुजा प्रतिभा, 
सस्नेह आशीष ! 
आज ही अखबार में सी.पी.एम.टी. का रिजल्ट देखने को मिला, उसमें तुम्हारा रोल नम्बर देखकर बहुत खुशी हुई कि तुम इसमें केवल उत्तीर्ण ही नहीं हुई हो, अपितु मैरिट में भी तुमने अच्छा स्थान पाया है। इस खुशी के अवसर पर मेरी ओर से प्यार भरी बहुत-बहुत बधाई। इस समय मेरा मन अत्यधिक प्रसन्नता का अनुभव कर रहा है और तुमसे मिलने की तीव्र इच्छा हो रही है। पिताजी की हार्दिक इच्छा रही कि तुम डॉक्टर बनो। उनकी इच्छा अब पूरी हो जाएगी। हमारे लिए यह बड़े गौरव की बात है और ऐसी अनुभूति हो रही है कि तुम पिताजी का नाम रोशन करोगी और परिवार का भविष्य उज्ज्वल बनाओगी। मैं अगले सप्ताह तुमसे मिलने आ रही हूँ, साथ में तुम्हारे लिए उपहार लेकर आऊँगी। मेरी भगवान् से यही प्रार्थना है कि तुम्हें सदैव इसी प्रकार सफलता मिलती रहे। माताजी तथा पिताजी को मेरा प्रणाम कहना। शेष कुशल हैं। 

तुम्हारी शुभेच्छु अग्रजा,
एकता

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Question 144 Marks
अपने मित्र को एक पत्र लिखिए, जिसमें उसे जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित करने के उपलक्ष्य में प्रसन्नता व्यक्त की गई हो।
Answer

1251, सोजती गेट, 
जोधपुर 
दिनांक : 27 फरवरी, 20xx 

प्रिय मित्र माधवेन्द्र, 
सप्रेम नमस्कार ! 
हम यहाँ सकुशल हैं और तुम्हें परिजनों सहित सदैव कुशल चाहते हैं। आज के 'दैनिक भास्कर' में प्रकाशित समाचार से ज्ञात हुआ कि जिला प्रशासन ने 'गणतन्त्र दिवस' पर तुम्हें सम्मानित किया है। इस समाचार से मुझे अतीव प्रसन्नता हो रही है। मैं अपनी प्रसन्नता का शब्दों में वर्णन नहीं कर सकता। जिला स्तर पर साक्षरता अभियान में तुमने रात-दिन परिश्रम करके जो सराहनीय कार्य किया है, उससे हजारों निरक्षरों को अक्षर-ज्ञान के साथ वह ज्योति मिली है, जिससे उन्हें पढ़ने-लिखने की योग्यता प्राप्त हुई है। वस्तुतः यह कार्य बहुत ही पवित्र तथा मानवता का कल्याण करने वाला है। सीकर जिला प्रशासन ने तुम्हें इस कार्य के लिए सम्मानित कर तुम्हारा गौरव बढ़ाया है। मैं इसके लिए तुम्हें अपनी ओर से प्रसन्नता व्यक्त करते हुए हार्दिक बधाई देता हूँ। 

अपने पूज्य माताजी-पिताजी को मेरा प्रणाम कहना और अन्य पारिवारिक जनों को यथायोग्य अभिनन्दन। पत्रोत्तर अवश्य भेजना। 

तुम्हारा शुभाकांक्षी मित्र,
अखिलेन्द्र

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Question 154 Marks
स्वयं को दीपशिखा, विज्ञान नगर, कोंटा की निवासिनी मानते हुए अजमेर में अध्ययनरत अपनी छोटी बहिन को अस्वस्थ रहने से उचित इलाज कराने के साथ ही व्यायाम करने की सलाह देते हुए एक पत्र लिखिए।
Answer

15 क, विज्ञान नगर, 
कोटा 
दिनांक : 22 दिसम्बर, 20xx 

चिरंजीवी अनुजा, 
सस्नेह आशीष !
यहाँ सब कुशल हैं, तुम्हारी कुशलता की कामना करते हैं। दो दिन पूर्व तुम्हारा पत्र मिला। तुम्हारी अस्वस्थता का समाचार पढ़कर चिन्ता हो रही है। तुम अपना इलाज किसी अच्छे डॉक्टर से करवाना। इस काम में लापरवाही नहीं करना। साथ ही प्रतिदिन सुबह-शाम को व्यायाम भी करते रहना, क्योंकि व्यायाम करने से शरीर का रक्त संचार उचित गति से होता है तथा स्फूर्ति भी आ जाती है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए उपचार और प्रतिदिन नियमित व्यायाम दोनों का अत्यधिक महत्त्व है। इसलिए मेरी सलाह का ध्यान रखना और अपने समाचार शीघ्रातिशीघ्र भेजती रहना। 

पूज्य पिताजी तुम्हें आशीष कह रहे हैं। शेष कुशल, तुम्हारे पत्र की प्रतीक्षा में, 

तुम्हारी शुभेच्छु 
दीपशिखा 

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Question 164 Marks
आप दिल्ली निवासी मीनाक्षी हैं। अपनी सहेली कुमारी रंजना को एक पत्र लिखिए कि वह आगामी गणतन्त्र दिवस समारोह आपके साथ ही मनाये।
Answer

पालम विहार, 
दिल्ली 
दिनांक : 10 जनवरी, 20xx 

प्रिय रंजना, 
सप्रेम अभिनन्दन ! 
तुम्हें यह जानकर खुशी होगी कि दिल्ली में गणतन्त्र दिवस विशाल स्तर पर मनाया जाता है और इसमें लाखों लोग भाग लेते हैं। हमारे विद्यालय में भी इस अवसर पर विज्ञान एवं चित्रकला प्रदर्शनी लगाई जा रही है, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ 'अमर शहीद' नाटक का अभिनय किया जाएगा। समारोह की तैयारी अभी से बड़े उत्साह और लगन से की जा रही है। मेरा आग्रह है कि इस अवसर पर तुम यहाँ आ जाओ तथा इस वर्ष यह समारोह हमारे साथ मनाओ। मैं तुम्हारे लिए पिताजी से कहकर जनपथ पर होने वाले सरकारी समारोह के 'पास' भी मँगवा लूंगी। सुबह के समय हम इस समारोह को देखेंगी, तत्पश्चात् हम विद्यालय के समारोह में सम्मिलित हो जाएंगी। 
मुझे विश्वास है कि तुम अवश्य आओगी। मैं तुम्हारे आगमन की प्रतीक्षा में रहूँगी। इसी आशा के साथ, 

तुम्हारी सहेली, 
मीनाक्षी 

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Question 174 Marks
स्वयं को विमला, निवासी भरतपुर मानकर अपनी माताजी को एक पत्र लिखिए, जिसमें दशहरा अवकाश पर शैक्षणिक भ्रमण पर जाने के कार्यक्रम की सूचना दी गई हो।
Answer

भरतपुर
दिनांक : 12 अक्टूबर, 20xx

परम पूजनीया माताजी, 
सादर प्रणाम ! 

मैं यहाँ सकुशल हूँ और आप सबकी कुशलता के लिए सदैव ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ। 
मेरे विद्यालय की सभी छात्राएँ दशहरा अवकाश पर शैक्षणिक भ्रमण के लिए बस द्वारा आगरा, मथुरा-वृन्दावन जा रही हैं। हमारे साथ दो शिक्षक एवं तीन शिक्षिकाएँ, दो चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी और व्यायाम प्रशिक्षक भी जा रहे हैं। भ्रमण का कार्यक्रम दो दिन तक आगरा के दर्शनीय स्थलों एवं ऐतिहासिक स्मारकों को देखने का है और एक दिन मथुरा तथा एक दिन वृन्दावन व आसपास के क्षेत्रों का भ्रमण करने का है। इस शैक्षणिक भ्रमण से हमारे ज्ञान की वृद्धि होगी और हमें नये स्थानों को देखने, वहाँ की बोली-भाषा, रहन-रहन और संस्कृति आदि का ज्ञान होगा। 
इस शैक्षणिक भ्रमण से लौटने के बाद जब भी अवकाश मिलेगा, मैं आपके पास आ जाऊँगी। सुदर्शन और रंजना को मेरी ओर से प्यार। पत्रोत्तर अवश्य भेजना। 

आपकी आज्ञाकारिणी पुत्री,
विमला

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Question 184 Marks
स्वयं को दिल्ली निवासी राजेश गुप्ता मानकर अपने बड़े भाई सुरेन्द्र गुप्ता को एक पत्र लिखिए, जिसमें अपनी माताजी के अस्वस्थ हो जाने की सूचना भेजी गई हो।
Answer

58, जनकपुरी,
नई दिल्ली
दिनांक : 5 अगस्त, 20xx

आदरणीय भाई साहब, 
सादर प्रणाम ! 

मैं यहाँ सकुशल हूँ और आपकी कुशलता की ईश्वर से सदैव प्रार्थना करता हूँ। मैंने पिछले सप्ताह आपको पत्र भेजा था, तब तक माताजी की तबीयत ठीक थी, परन्तु अचानक ही पिछले चार दिन से माताजी की तबीयत खराब हो गई है। इन्हें तेज बुखार है और पीठ एवं पेट में दर्द बता रही हैं। मैं लगातार तीन दिन से. इन्हें डॉक्टर के पास ले जा रहा हूँ 
और दवा भी दे रहा हूँ, परन्तु इनके स्वास्थ्य की स्थिति में कोई सुधार नहीं दिखाई दे रहा है। अपने पड़ोस के डॉक्टर साहब की राय है कि इन्हें किसी बड़े अस्पताल में भर्ती कराना पड़ेगा और इनकी आँतों पर आई सूजन का इलाज करवाना होगा। इस कारण आप पत्र मिलते ही अवकाश लेकर आ जावें, तभी इनका सही इलाज सम्भव हो सकेगा। 

माताजी अस्वस्थता की हालत में बार-बार आपको याद कर रही हैं। भाभीजी को मेरा प्रणाम तथा बच्चों को प्यार। आपके आगमन की प्रतीक्षा में। 

आपका अनुज, 
राजेश गुप्ता

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Question 194 Marks
सुषमा जौहरी, माणक चौक, भोपाल की ओर से प्रिय सहेली प्रभावती, उदयपुर को टिड्डी दल के आक्रमण के समय किये गये कार्यों का वर्णन करते हुए पत्र लिखिए।
Answer

भोपाल 
दिनांक : 7 अप्रैल, 20xx 

प्रिय प्रभावती, 
सप्रेम नमस्कार ! यहाँ पर हम सभी प्रसन्न हैं और आशा करती हूँ कि तुम वहाँ पर प्रसन्न होंगी। 
गत.महीने हमारे यहाँ टिड्डी दल आ गया था। शहर के सभी पेड़-पौधों के पत्तों और कोंपलों को टिड्डी दल चट कर गया है। उपवन एवं बगीचों की हरियाली भी उनके आक्रमण से नष्ट हो गई है। इस अवसर पर हमने भी अपने विद्यालय के पेड़-पौधों की रक्षा की। हम सभी ने मिलकर उपले जलाकर धुआँ किया, डी.डी.टी. का छिड़काव किया तथा कपड़े के पुतले हिलाकर टिड्डियों को भगाया। इस प्रकार सप्ताह भर तक हमारा यही कार्यक्रम रहा। हमारे शहर के अन्य विद्यालयों की भी यही स्थिति रही। 
अब यहाँ का वातावरण ठीक है। तुम्हारा अध्ययन कैसे चल रहा है? पत्रोत्तर अवश्य अवश्य भेजना। अपने पूज्य . पिताजी-माताजी को मेरा प्रणाम और छोटे भाई-बहिनों को प्यार। 

तुम्हारी सहेली, 
सुषमा

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Question 204 Marks
स्वयं को जयपुर निवासी रमेश मानकर बीकानेर निवासी अपने पिताजी को एक पत्र लिखिए, जिसमें अपनी परीक्षा की तैयारी आदि का उल्लेख कीजिए।
Answer

जयपुर 
दिनांक : 22 फरवरी, 20xx

पूजनीय पिताजी, 
सादर चरण स्पर्श ! 
मैं यहाँ पर सकुशल हूँ और आपकी सपरिवार कुशलता के लिए ईश्वर से सदैव प्रार्थना करता हूँ। 
आपका भेजा हुआ पत्र तथा मनीआर्डर दोनों एक ही दिन मिले हैं। इस समय मेरी पढ़ाई अच्छी तरह से चल रही है। अब वार्षिक परीक्षा के लिए लगभग एक माह रह गया है। मैं आजकल सभी विषयों का नियमित अध्ययन कर रहा हूँ। अंग्रेजी और हिन्दी की तीन बार आवृत्ति कर चुका हूँ। सामान्य विज्ञान और सामाजिक ज्ञान का कोर्स भी दो बार पूरा कर लिया है। अब गणित की विशेष तैयारी में लगा हुआ हूँ। आजकल मैं रात में साढ़े दस बजे तक पढ़ता हूँ और फिर सो जाता हूँ। प्रातःकाल चार बजे उठकर अध्ययन करने लग जाता हूँ। इस तरह मेरा अध्ययन-क्रम नियमित एवं सुव्यवस्थित चल रहा है और आपके आशीर्वाद से मुझे प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने की पूर्ण आशा है। 
पूज्या माताजी को चरण-स्पर्श तथा सुनीता व सुनील को प्यार। 
कुशल पत्र की प्रतीक्षा में, 

आपका आज्ञाकारी पुत्र, 
रमेश 

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Question 214 Marks
आप नाम से कुमारी रश्मि, निवासी आगरा हैं। अपनी सहेली कुमारी ललिता, निवासी कोलकाता को अपने यहाँ ग्रीष्मावकाश व्यतीत करने हेतु पत्र लिखिए।
Answer

23, आनन्द भवन, संजय पैलेस, 
आगरा 
दिनांक : 25 अप्रैल, 20xx 

प्रियं ललिता, 
सप्रेम नमस्ते ! 
यहाँ पर हम सभी प्रसन्न हैं और आशा करती हूँ कि तुम भी वहाँ पर प्रसन्न होंगी। बहुत दिनों से तुम्हारा कोई पत्र नहीं आया। अब परीक्षा भी समाप्त हो गई है। 

मेरा आग्रह है कि इस बार ग्रीष्मावकाश व्यतीत करने के लिए तुम यहाँ आगरा चली आओ। तुम पहले भी कई बार यहाँ के ताजमहल, किला और सीकरी के ऐतिहासिक दर्शनीय स्थलों को देखने की इच्छा व्यक्त करती रही हो। अब यहाँ आ जाने से तुम्हारी इस इच्छा की पूर्ति भी हो जाएगी तथा बहुत दिनों के बाद हम दोनों सहेलियों को साथ-साथ रहने का सुअवसर भी मिल जाएगा। तुम्हारे साथ रहने से ग्रीष्मावकाश व्यतीत करने में खूब आनन्द मिलेगा। इस सम्बन्ध में मैंने मम्मी-पापा से भी बात की है, वे भी बड़े आग्रह के साथ तुम्हें आगरा आने के लिए कह रहे हैं। 

‘अपने पूज्य माता-पिता को मेरी ओर से प्रणाम तथा छोटे भाई-बहिन को प्यार। शीघ्र पत्र लिखकर अपने आगमन की तिथि और कार्यक्रम की सूचना भेजना। 

पत्रोत्तर की प्रतीक्षा में, 

तुम्हारी सहेली, 
रश्मि 

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Question 224 Marks
आप भरतपुर निवासी श्यामलाल हैं। बीकानेर में अध्ययनरत अपने छोटे भाई नगेन्द्र को पत्र लिखकर नियमित रूप से अध्ययन में मन लगाने की सलाह दीजिए।
Answer

भरतपुर
दिनांक : 20 अगस्त, 20xx 

प्रिय अनुज नगेन्द्र, 
शुभाशीष ! 
अभी कुछ दिन पूर्व तुम्हारा पत्र प्राप्त हुआ। उसमें तुमने लिखा कि तुम्हारा मन बीकानेर में कम लगता है। यह तो निश्चित है कि राजस्थान में बीकानेर की जलवायु गर्म है। अपने यहाँ भरतपुर की जलवायु ज्यादा अच्छी है। इसी कारण तुम्हें वहाँ परेशानी भी हो रही है। परन्तु यह सूत्र याद रखना कि संघर्ष व कठिन परिश्रम से ही सफलता मिलती है। वहाँ से अधिक अपने अध्ययन में मन लगाना चाहिए। प्रारम्भ से ही अध्ययन करोगे तो परीक्षा के टेस्टों में अच्छे नम्बर आएँगे तथा वार्षिक परीक्षा में भी अच्छे नम्बर प्राप्त करके प्रथम श्रेणी बना लोगे। निश्चित कार्यक्रम बनाकर सुबह से सायंकाल तक अपने समय का सदुपयोग करो। पढ़ाई के साथ थोड़ा खेलकूद एवं व्यायाम भी आवश्यक है। यह अच्छी बात है कि तुम्हारे विद्यालय में खेलकूद अनिवार्य कर रखे हैं। 
माताजी व पिताजी का तुम्हें आशीर्वाद। 
पत्रोत्तर की प्रतीक्षा में, 

तुम्हारा शुभेच्छु, 
श्यामलाल

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Question 234 Marks
आप इटावा निवासी महेन्द्र हैं। अपने छोटे भाई सुरेन्द्र को, जो आगरा के गाँधी छात्रावास में रहकर अध्ययनरत है, एक पत्र लिखिए, जिसमें अपव्यय से बचने एवं बचत के सम्बन्ध में उपयोगी सुझाव दीजिए।
Answer

इटावा 
दिनांक : 15 अगस्त, 20xx 

प्रिय अनुज सुरेन्द्र, 
शुभाशीष! 
यहाँ सब सकुशल हैं और तुम्हें सदा सानन्द चाहते हैं। दो दिन पूर्व तम्हारा कुशल-पत्र मिला। समाचार ज्ञात हुए। तुमने कुछ पुस्तकें खरीदने तथा अन्य खर्चे हेतु रुपये भेजने के लिए लिखा है, इसलिए तुम्हारे लिए आठ सौ रुपये मनीआर्डर से भेज रहा हूँ। ऐसा मालूम होता है कि तुम अधिक खर्चा कर रहे हो। अभी से अपनी आदत सुधार लो और अपव्यय से बचने की चेष्टा करो। प्रत्येक कार्य में आवश्यकता के अनुसार ही व्यय करो। यदि तुम अभी से बचत करना सीख जाओगे, तो तुम आगे चलकर स्वावलम्बी बन सकोगे। अपव्यय की आदत पड़ने से कई बुरे व्यसन भी लग जाते हैं, जबकि बचत करने से मन में शान्ति एवं विश्वास पनपता है। अतः तुम अभी से अपव्यय से बचकर बचत का ध्यान रखो।

अपनी पढ़ाई पर विशेष ध्यान रखना। कुशल पत्र भेजते रहना। पिताजी व माताजी तुम्हें आशीष कह रहे हैं। 

तुम्हारा शुभेच्छु,
महेन्द्र

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Question 244 Marks
आप कमला हैं। आपके गाँव में उच्च माध्यमिक विद्यालय न होने से आपने आगरा शहर के विद्यालय में प्रवेश लिया है। उस विद्यालय के वातावरण, शिक्षण-व्यवस्था एवं अपनी निवास-व्यवस्था के सम्बन्ध में अपनी माता को पत्र लिखिए।
Answer

आगरा 
दिनांक : 25 जुलाई, 20xx 

परम पूज्या माताजी, 
सादर चरण स्पर्श! 

आपके आशीर्वाद से मैं यहाँ कुशल हूँ और आप सबकी प्रसन्नता की सदैव कामना करती हूँ। 
हमारे विद्यालय का वातावरण बहुत ही अच्छा है। हमारे सभी शिक्षक एवं शिक्षिकाएँ अतीव स्नेही स्वभाव की हैं। विद्यालय का अनुशासन बहुत अच्छा है, सभी छात्र-छात्राएँ अनुशासन का पालन करती हैं और शिक्षण के अतिरिक्त खेल-कूद तथा अन्य प्रवृत्तियों में भी भाग लेती हैं। 
यहाँ मेरे निवास की व्यवस्था कन्या छात्रावास में हो गई है। यह छात्रावास शहर की भीड़-भाड़ से कुछ दूर और हमारे विद्यालय के समीप शान्त वातावरण में स्थित है। इसमें सुबह चाय-नाश्ता, दोपहर और सन्ध्या को भोजन की अच्छी व्यवस्था है। यहाँ मुझे किसी प्रकार की असुविधा नहीं है। अतः इस सम्बन्ध में भी आपको मेरी चिन्ता नहीं करनी चाहिए। 
आलोक और दीप्ति को मेरा आशीष-प्यार। आप मेरी जरा भी चिन्ता न करें। पत्रोत्तर शीघ्र दें। 

आपकी पुत्री, 
कमला 

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Question 254 Marks
स्वयं को मथुरा निवासी पंकज पाण्डे मानते हुए नवविवाहिता बहिन को पत्र लिखकर ज्ञात कीजिए कि ससुराल के नवीन वातावरण में वह कैसा अनुभव कर रही है?
Answer

मथुरा 
दिनांक : 25 अप्रैल, 20xx 

 

चिरंजीवी बहिन, 
सस्नेह अभिनन्दन! 
हम सब यहाँ सकुशल हैं और तुम्हारी अपने नये परिवार के साथ सदैव कुशलता की कामना करते हैं। 
जब से तुम्हें अपने ससुराल के लिए विदा किया है, यहाँ कुछ सूना-सूना सा लग रहा है, परन्तु तुम्हारे लिए यह सौभाग्य का विषय है कि जैसा वर और घर हम चाहते थे, वैसा ही तुम्हें मिला है। तुम्हारी ससुराल के लोग अच्छे, सभ्य और सम्पन्न हैं तथा तुम्हें वहाँ किसी बात की कमी नहीं होगी, फिर भी नये-नये वातावरण में कुछ अटपटा और अपरिचित-सा अवश्य लगता होगा। तुम पत्र द्वारा लिखना कि वहाँ का वातावरण कैसा अनुभव कर रही हो? तुम्हारे साथ सास-ससुर, देवर-ननद का व्यवहार कैसा है और तुम्हारे पति का बर्ताव कैसा है? क्या तुम्हें वहाँ किसी बात की दिक्कत तो नहीं होती है? अपने पत्र द्वारा लिखना और वहाँ के पूर्ण समाचार भेजना। 
अपने ससुराल के सभी लोगों को हमारी तरफ से यथायोग्य वंदन आदि कहना। मम्मी-पापाजी तुम्हें आशीर्वाद कह रहे हैं तथा प्रमोद प्रणाम कह रहा है। पत्रोत्तर की प्रतीक्षा में। 

तुम्हारा शुभेच्छु,
पंकज पाण्डे

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पत्र लेखन [4M] - Hindi STD 9 Questions - Vidyadip