Question 16 Marks
भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए तीन प्रमुख आन्दोलनों पर प्रकाश डालिए।
Answer
View full question & answer→भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में गांधीजी द्वारा चलाए गए तीन प्रमुख आन्दोलन निम्न प्रकार हैं-
1. असहयोग आंदोलन - गांधीजी ने 1920 ई. में असहयोग आन्दोलन की शुरुआत की। इस आन्दोलन ने भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन को एक नई जागृति प्रदान की। गांधीजी का मानना था कि ब्रिटिश हाथों में एक उचित न्याय मिलना सम्भव नहीं है इसलिए उन्होंने ब्रिटिश सरकार से राष्ट्र के सहयोग को वापस लेने की योजना बनाई और इस प्रकार असहयोग आन्दोलन की शुरुआत की गई।
2. नमक सत्याग्रह (डांडी मार्च) - गांधीजी द्वारा चलाए गए आन्दोलनों में नमक सत्याग्रह सबसे खास था। गांधीजी के नेतृत्व में किया गया यह अहिंसक सविनय अवज्ञा आन्दोलन 12 मार्च, 1930 से 6 अप्रैल, 1930 तक नमक पर ब्रिटिश एकाधिकार के विरुद्ध कर प्रतिरोध और अहिंसक विरोध के प्रत्यक्ष कार्रवाई अभियान के रूप में चलाया गया। गांधीजी ने 12 मार्च को अहमदाबाद स्थित साबरमती आश्रम से अरब सागर (दांडी के तटीय शहर तक) तक 78 अनुयायियों के साथ 240 मील की यात्रा की। इस यात्रा का उद्देश्य समुद्री जल से नमक बनाकर ब्रिटिश नीति का उल्लंघन करना था।
3. भारत छोड़ो आन्दोलन - गांधीजी ने अगस्त 1942 में "भारत छोड़ो आन्दोलन की शुरुआत की। इस आन्दोलन में पूरे देश के लोग शामिल हुए जिससे अंग्रेजी शासन की जड़ें हिल गई थीं। गांधीजी ने मुम्बई के ग्वालिया टैंक मैदान से 'करो या मरो' का नारा दिया था, जिससे पूरा देश एकजुट होकर अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा हो गया। इस आन्दोलन के कारण अंग्रेजों के साथ भारत की राजनीतिक वार्ता की प्रकृति ही बदल गई और अंततः भारत की स्वतन्त्रता का मार्ग प्रशस्त हुआ।
1. असहयोग आंदोलन - गांधीजी ने 1920 ई. में असहयोग आन्दोलन की शुरुआत की। इस आन्दोलन ने भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन को एक नई जागृति प्रदान की। गांधीजी का मानना था कि ब्रिटिश हाथों में एक उचित न्याय मिलना सम्भव नहीं है इसलिए उन्होंने ब्रिटिश सरकार से राष्ट्र के सहयोग को वापस लेने की योजना बनाई और इस प्रकार असहयोग आन्दोलन की शुरुआत की गई।
2. नमक सत्याग्रह (डांडी मार्च) - गांधीजी द्वारा चलाए गए आन्दोलनों में नमक सत्याग्रह सबसे खास था। गांधीजी के नेतृत्व में किया गया यह अहिंसक सविनय अवज्ञा आन्दोलन 12 मार्च, 1930 से 6 अप्रैल, 1930 तक नमक पर ब्रिटिश एकाधिकार के विरुद्ध कर प्रतिरोध और अहिंसक विरोध के प्रत्यक्ष कार्रवाई अभियान के रूप में चलाया गया। गांधीजी ने 12 मार्च को अहमदाबाद स्थित साबरमती आश्रम से अरब सागर (दांडी के तटीय शहर तक) तक 78 अनुयायियों के साथ 240 मील की यात्रा की। इस यात्रा का उद्देश्य समुद्री जल से नमक बनाकर ब्रिटिश नीति का उल्लंघन करना था।
3. भारत छोड़ो आन्दोलन - गांधीजी ने अगस्त 1942 में "भारत छोड़ो आन्दोलन की शुरुआत की। इस आन्दोलन में पूरे देश के लोग शामिल हुए जिससे अंग्रेजी शासन की जड़ें हिल गई थीं। गांधीजी ने मुम्बई के ग्वालिया टैंक मैदान से 'करो या मरो' का नारा दिया था, जिससे पूरा देश एकजुट होकर अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा हो गया। इस आन्दोलन के कारण अंग्रेजों के साथ भारत की राजनीतिक वार्ता की प्रकृति ही बदल गई और अंततः भारत की स्वतन्त्रता का मार्ग प्रशस्त हुआ।