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वर्णनात्मक प्रश्न [6M]

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Question 16 Marks
भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए तीन प्रमुख आन्दोलनों पर प्रकाश डालिए।
Answer
भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में गांधीजी द्वारा चलाए गए तीन प्रमुख आन्दोलन निम्न प्रकार हैं-
1. असहयोग आंदोलन - गांधीजी ने 1920 ई. में असहयोग आन्दोलन की शुरुआत की। इस आन्दोलन ने भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन को एक नई जागृति प्रदान की। गांधीजी का मानना था कि ब्रिटिश हाथों में एक उचित न्याय मिलना सम्भव नहीं है इसलिए उन्होंने ब्रिटिश सरकार से राष्ट्र के सहयोग को वापस लेने की योजना बनाई और इस प्रकार असहयोग आन्दोलन की शुरुआत की गई।
2. नमक सत्याग्रह (डांडी मार्च) - गांधीजी द्वारा चलाए गए आन्दोलनों में नमक सत्याग्रह सबसे खास था। गांधीजी के नेतृत्व में किया गया यह अहिंसक सविनय अवज्ञा आन्दोलन 12 मार्च, 1930 से 6 अप्रैल, 1930 तक नमक पर ब्रिटिश एकाधिकार के विरुद्ध कर प्रतिरोध और अहिंसक विरोध के प्रत्यक्ष कार्रवाई अभियान के रूप में चलाया गया। गांधीजी ने 12 मार्च को अहमदाबाद स्थित साबरमती आश्रम से अरब सागर (दांडी के तटीय शहर तक) तक 78 अनुयायियों के साथ 240 मील की यात्रा की। इस यात्रा का उद्देश्य समुद्री जल से नमक बनाकर ब्रिटिश नीति का उल्लंघन करना था।
3. भारत छोड़ो आन्दोलन - गांधीजी ने अगस्त 1942 में "भारत छोड़ो आन्दोलन की शुरुआत की। इस आन्दोलन में पूरे देश के लोग शामिल हुए जिससे अंग्रेजी शासन की जड़ें हिल गई थीं। गांधीजी ने मुम्बई के ग्वालिया टैंक मैदान से 'करो या मरो' का नारा दिया था, जिससे पूरा देश एकजुट होकर अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा हो गया। इस आन्दोलन के कारण अंग्रेजों के साथ भारत की राजनीतिक वार्ता की प्रकृति ही बदल गई और अंततः भारत की स्वतन्त्रता का मार्ग प्रशस्त हुआ।
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Question 26 Marks
सविनय अवज्ञा आन्दोलन की सीमाओं पर एक टिप्पणी लिखिए।###सविनय अवज्ञा आन्दोलन की सीमाओं पर एक संक्षिप्त निबन्ध लिखिए।###सविनय अवज्ञा आन्दोलन की क्या सीमाएँ थीं? किन्हीं दो का उल्लेख कीजिए।
Answer
सविनय अवज्ञा आन्दोलन की सीमाएं सविनय अवज्ञा आन्दोलन की प्रमुख सीमाएँ निम्नवत हैं
(i) जन यह आन्दोलन शुरु हुआ तब देश में समुदायों के बीच संदेह और अविश्वास का माहौल था।
(ii) कांग्रेस से कटे हुए मुसलमानों का एक तबका किसी साझा संघर्ष के लिए तैयार नहीं था।
(iii) भारत के विभिन्न धार्मिक नेताओं और जाति समूहों के नेताओ ने अपनी-अपनी माँगें शुरु कर दी जिससे इस आन्दोलन के प्रति इन्होंने कोई खास रुचि नहीं दिखाई।
(iv) धीरे-धीरे हिन्दू और मुसलमानों के बीच संबंध खराब होते गए कई शहरों में सांप्रदायिक टकराव और दंगे हुए जिससे दोनों समुदायों के बीच फासले बढ़ते गए।
(v) कांग्रेस ने रूढ़िवादी सवर्ण हिन्दू सनातन-पंथियों के डर से दलितों पर ध्यान नहीं दिया। लेकिन गांधीजी ने ऐलान किया कि अस्पृश्यता (छुआछूत) को खत्म किए बिना सौ साल तक भी स्वराज की स्थापना नहीं की जा सकती।
(vi) गांधीजी ने अछूतों को 'हरिजन' यानी 'ईश्वर की संतान' बताया। उन्होंने मंदिरों, सार्वजनिक तालाबों, सड़‌कों और कुँओं पर समान अधिकार दिलाने के लिए सत्याग्रह किया।
(vii) कई दलित नेता अपने समुदाय की समस्याओं का अलग राजनीतिक हल खोजना चाहते थे। उन्होंने शिक्षा संस्थानों में आरक्षण के लिए आवाज उठायी और अलग निर्वाचन क्षेत्रों की बात कही ताकि वहाँ से विधायी परिषदों के लिए केवल दलितों को ही चुनकर भेजा जा सके, क्योंकि इनकी भागीदारी सीमित थी|
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Question 36 Marks
गांधीजी ने असहयोग आन्दोलन क्यों प्रारम्भ किया? उनके द्वारा यह आन्दोलन वापस लेने के प्रमुख कारण क्या थे?###असहयोग आन्दोलन क्यों प्रारम्भ किया गया? आन्दोलनकारियों के चार कार्य लिखिए।###महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आन्दोलन का क्या अर्थ है? इसके कारण क्या थे?###असहयोग आन्दोलन किसने चलाया था? इसके किन्हीं तीन कारणों का उल्लेख कीजिए।###असहयोग आन्दोलन के मुख्य कारण क्या थे?###भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में भाग लेने वाले किन्हीं तीन नेताओं के नाम बताइए।###असहयोग आन्दोलन कब चलाया गया? इस आन्दोलन के किन्हीं दो कारणों की विवेचना कीजिए।###असहयोग आन्दोलन के कारण तथा उसके प्रभावों का उल्लेख करें।###असहयोग आन्दोलन का क्या अर्थ है? यह क्यों चलाया गया? कोई दो कारण बताइए।###असहयोग आन्दोलन कब चलाया गया? इसका क्या अर्थ है? इसके कोई दो मुख्य कारण लिखिए।
Answer
कांग्रेस ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में 1920 ई. में असहयोग आन्दोलन शुरू करने का निर्णय लिया। यह एक क्रान्तिकारी कदम था। कांग्रेस ने पहली बार सक्रिय कार्यवाही अपनाने का निश्चय किया। इस क्रान्तिकारी परिवर्तन के अनेक कारण थे। अब तक महात्मा गांधी ब्रिटिश सरकार की न्यायप्रियता में विश्वास करते थे और उन्होंने प्रथम विश्वयुद्ध में ब्रिटिश सरकार को पूरा सहयोग दिया था, किन्तु जलियाँवाला बाग नरसंहार, पंजाब में मार्शल लॉ और हण्टर कमेटी की जाँच ने उनका अंग्रेजों के न्याय से विश्वास उठा दिया। उन्होंने अनुभव किया कि अब पुराने तरीके छोड़ने होंगे। कांग्रेस से उदारवादियों के अलग हो जाने के बाद कांग्रेस पर पूरी तरह से गरमपन्थियों का नियन्त्रण हो गया। उधर तुकों और मित्रराष्ट्रों में सेवर्स की सन्धि की कठोर शर्तों से मुसलमान भी रुष्ट थे। देश में अंग्रेजों के प्रति बड़ा असन्तोष था। महात्मा गांधी ने मुसलमानों के खिलाफत आन्दोलन में उनका साथ दिया तथा असहयोग आन्दोलन छेड़ने का विचार किया।
सितम्बर, 1920 में कलकत्ता में लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में कांग्रेस के विशेष अधिवेशन में महात्मा गांधी ने असहयोग आन्दोलन का प्रस्ताव रखा। सी.आर. दास, बी.सी. पाल, ऐनी बेसेण्ट, जिन्ना और मालवीय जी ने इसका विरोध किया, लेकिन दिसम्बर, 1920 में कांग्रेस के नियमित अधिवेशन में असहयोग का प्रस्ताव बहुमत से पारित हो गया तथा विरोधियो ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
इस आन्दोलन के मुख्य बिन्दु थे- खिताबों तथा मानव पदों का त्याग, स्थानीय निकायों में नामजदगी वाले पदों से इस्तीफा, सरकारी दरबारो या सरकारी अफसरों के सम्मान में आयोजित उत्सवों में भाग न लेना, बच्चों को स्कूलों से हटा लेना, अदालतों का बहिष्कार, फौज में भरती का बहिष्कार आदि।
असहयोगियो के लिए अहिंसा तथा सत्य का पालन करना आवश्यक था। गांधी जी को विश्वांस था कि इस आन्दोलन से एक वर्ष में 'स्वराज' की प्राप्ति हो जाएगी।
इस आन्दोलन का भारतीय जनता पर गहरा प्रभाव पड़ा। विदेशी वस्तुओं की होली जलाई गई। बहुत-से छात्रों ने स्कूल तथा कॉलेजों का बहिष्कार किया। महात्मा गांधी ने 'केसर-ए-हिन्द' का खिताब छोड़ दिया। 13 नवम्बर, 1921 को प्रिंस ऑफ वेल्स के भारत आगमन के समय बम्बई (मुम्बई) में हड़ताल रखी गई। दिसम्बर, 1921 में प्रिंस के कोलकाता आगमन पर भी हड़ताल रखी गई। ब्रिटिश सरकार ने इस आन्दोलन को कचलने के लिए व्यापक दमन चक्र चलाया। महात्मा गांधी के अलावा सभी कांग्रेसी नेताओ को गिरफ्तार कर लिया गया। चौरी-चौरा की एक अप्रिय घटना के कारण महात्मा गांधी ने यह आन्दोलन 1922 ई. में वापस ले लिया।
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Question 46 Marks
भारत में 'राष्ट्रवाद' के उदय के प्रमुख कारण क्या थे?###भारतीय 'राष्ट्रवाद' के उदय के तीन कारणों को लिखिए।###भारत में राष्ट्रवाद के उदय के कारणों का उल्लेख कीजिए।###भारत में राष्ट्रवाद के उदय के कारणों की व्याख्या कीजिए###राष्ट्रवाद क्या है? भारत में राष्ट्रवाद या सामूहिक अपनेपन के भाव का उदय किस प्रकार हुआ?
Answer
राष्ट्रवाद - राष्ट्रवाद वह भावना अथवा विचारधारा है जिसके माध्यम से जनता में राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक एकीकरण सम्भव हुआ। राष्ट्रवाद की भावना तब पनपती है जब लोग ये महसूस करने लगते हैं कि वे एक ही राष्ट्र के अंग हैं। तब वे एक-दूसरे को एकता के सूत्र में बाँधने वाली कोई साझा बात ढूँढ़ लेते हैं। सामूहिक अपनेपन की यह भावना आंशिक रूप से संयुक्त संघर्षों से पैदा हुई थी। इतिहास व साहित्य, लोक-कथाएँ व गीत, चित्र व प्रतीक सभी ने राष्ट्रवाद को साकार करने में अपना योगदान दिया था। भारत में राष्ट्रवाद की भावना पनपने में योगदान देने वाले कुछ प्रमुख कारक निम्नलिखित है-
(i) 20वीं सदी में राष्ट्रवाद के विकास के साथ भारत की पहचान भी भारत माता की छवि का रूप लेने लगी। यह तस्वीर पहली बार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने बनाई थी। 1870 के दशक में उन्होंने मातृभूमि की स्तुति के रूप में 'वंदे मातरम्' गीत लिखा था। बाद में इसे उन्होंने अपने उपन्यास 'आनंदमठ' में शामिल कर लिया। यह गीत बंगाल में स्वदेशी आंदोलन में खूब गाया गया। स्वदेशी आंदोलन की प्रेरणा से अबनीन्द्रनाथ टैगोर ने भारत माता की विख्यात छवि को चित्रित किया। इस पेटिंग में भारत माता को एक संन्यासिनी के रूप में दर्शाया गया है। इस मातृछवि के प्रति श्रद्धा को राष्ट्रवाद में आस्था का प्रतीक माना जाने लगा।
(ii) राष्ट्रवाद का विचार भारतीय लोक कथाओं को पुनर्जीवित करने के आंदोलन से भी मज़बूत हुआ। 19वीं सदी के अंत में राष्ट्रवादियों ने भाटों व चारणों द्वारा गाई-सुनाई जाने वाली लोक कथाओं को दर्ज करना शुरू कर दिया। उनका मानना था कि यही कहानियाँ हमारी परंपरागत संस्कृति की तस्वीर पेश करती हैं जो बाहरी ताकतों के प्रभाव से भ्रष्ट और दूषित हो चुकी है। अपनी राष्ट्रोंय पहचान को ढूँढ़ने और अपने अतीत में गौरव का भाव पैदा करने के लिए लोक परंपरा को बचाकर रखना जरूरी था।
(iiii) राष्ट्रवादी नेता लोगों में राष्ट्रवाद की भावना भरने के लिए चिह्नों और प्रतीकों के बारे में जागरूक होते गए। 1921 ई. तक गांधीजी ने भी स्वराज का झंडा तैयार कर लिया था। यह तिरंगा था (सफेद, हरा और लाल)। इसके मध्य में गांधीवाद प्रतीक चरखे को जगह दी गई जो आत्म-सहायता का प्रतीक था। जुलूसों में यह झंडा थामे चलना शासन के प्रति अवज्ञा का संकेत था।
(iv) इतिहास की पुनर्व्याख्या राष्ट्रवाद की भावना पैदा करने का एक और साधन था। अंग्रेजों की नजर में भारतीय पिछड़े हुए और आदिम लोग थे जो अपना शासन खुद नहीं सँभाल सकते। इसके जवाब में भारत के लोग अपनी महान उपलब्धियों की खोज में अतीत की ओर देखने लगे। उन्होंने इस गौरवमयी प्राचीन युग के बारे में लिखना शुरू किया जब कला और वास्तुशिल्प, विज्ञान और गणित, धर्म और संस्कृति, कानून और दर्शन, हस्तकला और व्यापार फल-फूल रहे थे। इस राष्ट्रवादी इतिहास में पाठकों को अतीत में भारत की महानता व उपलब्धियों पर गर्व करने और ब्रिटिश शासन के तहत दुर्दशा से मुक्ति के लिए संघर्ष का मार्ग अपनाने का आह्वान किया जाता था।
इस प्रकार राष्ट्रवाद की भावना फैलाने में विभिन्न तत्त्वों ने योगदान दिया।
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Question 56 Marks
महात्मा गांधीजी के सत्याग्रह पर एक निबन्ध लिखिए।###भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में गांधीजी के योगदान का मूल्यांकन कीजिए।###भारत छोड़ो आन्दोलन पर एक संक्षिप्त निबंध लिखिए।###महात्मा गांधी ने राष्ट्रीय स्वाधीनता संग्राम में सत्याग्रह एवं अहिंसा का किस प्रकार प्रयोग किया? कोई दो उदाहरण दीजिए।###महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए किन्हीं तीन आन्दोलनों के नाम लिखिए।###महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए किन्हीं तीन सत्याग्रह आन्दोलनों के कारण और परिणाम बताइए।
Answer
महात्मा गांधी अप्रैल, 1893 में दक्षिण अफ्रीका गये थे तथा जनवरी, 1915 में वे भारत लौटे। उन्होंने एक नए तरह के जनांदोलन के रास्ते पर चलते हुए वहाँ की नस्लभेदी सरकार से सफलतापूर्वक लोहा लिया था। इस पद्धति को वे 'सत्याग्रह' कहते थे।
भारत आने के बाद गांधीजी ने कई स्थानों पर सत्याग्रह आन्दोलन चलाया। 1917 ई. में उन्होंने बिहार के चम्पारण इलाके का दौरा किया और दमनकारी बागान व्यवस्था के खिलाफ किसानों को संघर्ष के लिए प्रेरित किया। 1918 ई. में उन्होंने गुजरात के खेड़ा जिले के किसानों की मदद के लिए सत्याग्रह का आयोजन किया। फसल खराब हो जाने और प्लेग की महामारी के कारण खेड़ा जिले के किसान लगान चुकाने की हालत में नहीं थे। वे चाहते थे कि लगान वसूली में ढील दी जाए। 1918 ई. में ही गांधीजी सूती कपड़ा कारखानों के मजदूरों के बीच सत्याग्रह आन्दोलन चलाने अहमदाबाद जा पहुँचे।
इस कामयाबी से उत्साहित गांधीजी ने 1919 ई. में प्रस्तावित रॉलेट ऐक्ट के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह आन्दोलन चलाने का फैसला लिया। भारतीय सदस्यों के भारी विरोध के बावजूद इस कानून को इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल ने बहुत जल्दबाजी में पारित कर दिया था। इस कानून के जरिए सरकार को राजनीतिक गतिविधियों को कुचलने और राजनीतिक कैदियों को दो साल तक बिना मुकदमा चलाए जेल में बंद रखने का अधिकार मिल गया था। महात्मा गांधी ऐसे अन्यायपूर्ण कानूनों के खिलाफ अहिंसक ढंग से नागरिक अवज्ञा चाहते थे।
रॉलेट सत्याग्रह में सफलता मिलने के बाद उन्होंने असहयोग आन्दोलन शुरु किया। यह आन्दोलन 1 अगस्त, 1920 को शुरू हुआ था और इसके तहत ब्रिटिश सरकार के खिलाफ असहयोग जताने के लिए लोगों से अपील की थी। इस आन्दोलन में स्कूल, कॉलेज, न्यायालय न जाएँ और न ही कर चुकाएँ, ये सारी चीजें लोगों को करने के लिए कहा गया था। तत्पश्चात् इस आन्दोलन का स्वरूप सविनय अवज्ञा आन्दोलन में परिवर्तित हो गया।
इसके बाद गांधीजी ने नमक सत्याग्रह (जिसे दांडी सत्याग्रह या दांडी आन्दोलन के नाम से भी जाना जाता है।) शुरू किया। ब्रिटिश सरकार ने नमक पर एकाधिकार कर दिया था जिसके बाद 12 मार्च, 1930 को गांधीजी ने अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से दांडी गाँव तक 24 दिनों का पैदल मार्च निकाला था। गांधीजी ने फिर ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारत छोड़ो आन्दोलन शुरू किया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का 8 अगस्त, 1942 को बंबई में सत्र हुआ था जिसमें गांधीजी ने 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' का नारा दिया था। इस आन्दोलन के बाद गांधीजी को गिरफ्तार कर लिया गया था लेकिन उसके बाद न भी युवा कार्यकर्ता हड़ताल और तोड़फोड़ करते रहे और आन्दोलन को जारी रखा। अंततः 15 अगस्त, 1947 को भारत एक अलग देश बना। इस प्रकार सविनय अवज्ञा आन्दोलन, दांडी सत्याग्रह और भारत छोड़ो आन्दोलन ऐसे प्रमुख उदाहरण थे जिनमें गांधीजी ने आत्मबल को सत्याग्रह के हथियार के रूप में प्रयोग किया।
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Question 66 Marks
गांधीजी की नमक यात्रा का वर्णन कीजिए।###नमक सत्याग्रह क्यों प्रारम्भ किया गया था? उसका संक्षिप्त विवरण दीजिए।###1930 में महात्मा गांधी ने नमक को अपने आन्दोलन का आधार क्यों बनाया? इस आन्दोलन का क्या प्रभाव पड़ा?###सविनय अवज्ञा आन्दोलन कब चलाया गया था? इसके प्रमुख तीन कारणों का उल्लेख कीजिए।###नमक सत्याग्रह से आप क्या समझते हैं?###सविनय अवज्ञा आन्दोलन से आप क्या समझते हैं?###सविनय अवज्ञा आन्दोलन का क्या अर्थ है? इसे क्यों चलाया गया? इसका क्या प्रभाव पड़ा?
Answer
31 जनवरी, 1930 को गांधीजी ने वायसराय इरविन को एक पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने 11 माँगों का उल्लेख किया था। इन मॉगो के जरिए वे समाज के सभी वर्गों को जोड़ना चाहते थे। इनमें सबसे महत्त्वपूर्ण माँग नमक कर को खत्म करने के बारे में थी। नमक का अमीर-गरीब सभी इस्तेमाल करते थे। यह भोजन का एक अभिन्न हिस्सा था। इसलिए नमक पर कर और उसके उत्पादन पर सरकारी इजारेदारी को महात्मा गांधी ने ब्रिटिश सरकार का सबसे दमनात्मक पहलू बताया था। यहीं से सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरु होता है। महात्मा गांधी का यह पत्र एक चेतावनी की तरह था। उन्होंने लिखा था कि यदि 11 मार्च तक इन माँगों को नहीं माना गया तो कांग्रेस सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू कर देगी। इरविन झुकने को तैयार नहीं थे। महात्मा गांधी ने अपने 78 विश्वस्त वॉलंटियरों के साथ नमक यात्रा शुरू कर दी। यह यात्रा साबरमती में गांधी जी के आश्रम से 240 किलोमीटर दूर दांडी नामक गुजराती तटीय कस्बे में जाकर खत्म होनी थी। गांधीजी की टोली ने 24 दिन तक हर रोज लगभग 10 मील का सफर तय किया। गांधीजी जहाँ भी रुकते हजारों लोग उन्हें सुनने आते। इन सभाओं में गांधीजी ने स्वराज का अर्थ स्पष्ट किया और आह्वान किया कि लोग शांतिपूर्वक अंग्रेजों की अवज्ञा करें। 6 अप्रैल को वे दांडी पहुँचे और उन्होंने समुद्र का पानी उबालकर नमक बनाना शुरू कर दिया। यह कानून का उल्लंघन था। यहीं से सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू होता है।
हजारों लोगों ने नमक कानून तोड़ा और सरकारी नमक कारखाने के सामने प्रदर्शन किया। आंदोलन फैला तो विदेशी कपड़ों का बहिष्कार किया जाने लगा। शराब की दुकानों की पिकेटिंग होने लगी। किसानों ने लगान और चौकीदारी कर चुकाने से इनकार कर दिया। गाँवों में तैनात कर्मचारी इस्तीफे देने लगे।
इन घटनाओं से चितित औपनिवेशिक सरकार कांग्रेसी नेताओं को गिरफ्तार करने लगी। सरकार ने दमन चक्र चलाया तो गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन वापस ले लिया।
प्रभाव - महात्मा गांधी के नेतृत्व में 1930 ई. में कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया। इस आंदोलन का श्रीगणेश महात्मा गांधी की दांडी यात्रा और नमक कानूनों को तोड़कर शुरू किया गया। कई उतार-चढ़ाव के साथ यह आंदोलन 1934 ई. तक चलता रहा। इस आंदोलन को 1934 ई. में. वापस ले लिया गया फिर भी इसने राष्ट्रीय आंदोलन पर निम्नलिखित अपने गहरे प्रभाव छोड़े-
(i) सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान लोगों का ब्रिटिश शासन से विश्वास जाता रहा और वे ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध लड़ने के लिए एकजुट होने लगे।
(ii) सविनय अवज्ञा आंदोलन के चलाए जाने के साथ भारत में क्रांतिकारी आंदोलन फिर से जागृत हो गए। इसी काल में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त आदि क्रांतिकारी देशभक्तों ने दिल्ली में असेंबली में दो बम फेंके।
(iiii) इस आंदोलन के दौरान भारतीयों को ब्रिटिश सरकार की कठोर यातनाओं को सहना पड़ा परंतु अपने संघर्ष से जो अनुभव उन्हें मिला वह अमूल्य था। इस अनुभव ने आगे आने वाले स्वतंत्रता संघर्ष में उनका बड़ा मार्गदर्शन किया और एक सफल संघर्ष के दाँव-पेंच समझा दिए।
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Question 76 Marks
भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में सविनय अवज्ञा आंदोलन के महत्त्व का वर्णन कीजिए।
Answer
महात्मा गांधी के नेतृत्व में 1930 ई. में कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया। इस आंदोलन का श्रीगणेश महात्मा गांधी की दांडी यात्रा और नमक कानूनों को तोड़कर शुरू किया गया। कई उतार-चढ़ाव के साथ यह आंदोलन 1934 ई. तक चलता रहा। इस आंदोलन को 1934 ई. में. वापस ले लिया गया फिर भी इसने राष्ट्रीय आंदोलन पर निम्नलिखित अपने गहरे प्रभाव छोड़े-
(i) सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान लोगों का ब्रिटिश शासन से विश्वास जाता रहा और वे ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध लड़ने के लिए एकजुट होने लगे।
(ii) सविनय अवज्ञा आंदोलन के चलाए जाने के साथ भारत में क्रांतिकारी आंदोलन फिर से जागृत हो गए। इसी काल में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त आदि क्रांतिकारी देशभक्तों ने दिल्ली में असेंबली में दो बम फेंके।
(iiii) इस आंदोलन के दौरान भारतीयों को ब्रिटिश सरकार की कठोर यातनाओं को सहना पड़ा परंतु अपने संघर्ष से जो अनुभव उन्हें मिला वह अमूल्य था। इस अनुभव ने आगे आने वाले स्वतंत्रता संघर्ष में उनका बड़ा मार्गदर्शन किया और एक सफल संघर्ष के दाँव-पेंच समझा दिए।
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