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अति लघु उत्तरीय प्रश्न [2M]

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17 questions · self-marked practice — reveal the answer and mark yourself.

Question 12 Marks
नये उपभोक्ता पैदा करने में विज्ञापनों की भूमिका की विवेचना कीजिए।
Answer
नये उपभोक्ता पैदा करने में विज्ञापनों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है। विज्ञापन विभिन्न उत्पादों को आवश्यक और वांछनीय बना देते हैं। वे लोगों की सोच बदल देते हैं तथा नई आवश्यकताएँ उत्पन्न कर देते हैं। विज्ञापनों ने विभिन्न उत्पादों के बाजार के विस्तार में और एक नयी उपभोक्ता संस्कृति का निर्माण करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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Question 22 Marks
मिलों के साथ प्रतिस्पर्धा का मुकाबला कर पाने के मामले में महीन वस्त्र बुनने वाले बुनकर अन्य लोगों से अच्छी स्थिति में क्यों थे?
Answer
अच्छे किस्म के कपड़े की माँग केवल उच्च वर्ग के लोगों में ही थी। उसमें उतार-चढ़ाव भी कम आते थे। फसलें खराब होने अथवा अकालों से बनारसी अथवा बालूचरी साड़ियों की बिक्री पर प्रभाव नहीं पड़ता था। इसके अतिरिक्त कारखाने विशेष प्रकार की बुनाई की नकल नहीं कर सकते थे।
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Question 32 Marks
"प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात् भारतीय बाजार में मैनचेस्टर की पहले वाली स्थिति नहीं रही।" स्पष्ट कीजिए।
Answer
प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात् भारतीय बाजार में मैनचेस्टर की पहले वाली स्थिति नहीं रही। आधुनिकीकरण के अभाव, प्रतिस्पर्धा में पिछड़ने तथा कपास के उत्पादन में कमी आदि कारणों से ब्रिटेन से होने वाले सूती कपड़े के निर्यात में भारी गिरावट आ गई। उपनिवेशों में स्थानीय उद्योगपतियों ने घरेलू बाजारों पर अधिकार कर लिया।
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Question 42 Marks
उन्नीसवीं शताब्दी के अन्त में भारत की प्रारम्भिक सूती मिलों में मोटे सूती धागे का उत्पादन क्यों किया जाता था?
Answer
उन्नीसवीं शताब्दी के अन्त में जब भारतीय व्यवसायी उद्योग स्थापित करने लगे. उस समय भारत आने वाले ब्रिटिश मालों में धागा बहुत अच्छा नहीं था। इसलिए भारत की प्रारम्भिक सूती मिलों में कपड़े की बजाय मोटे सूती धागे ही बनाए जाते थे। इस धागे का भारत के हथकरघा बुनकर प्रयोग करते थे अथवा उन्हें चीन को निर्यात कर दिया जाता था।
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Question 52 Marks
लेबलों ने मैनचेस्टर के कपड़ों के लिए भारत में बाजार तैयार करने में क्या सहायता पहँचाई?
Answer
लेबल से खरीददारों को कम्पनी का नाम व उत्पादन का स्थान ज्ञात हो जाता था। लेबल चीजों की गुणवत्ता का प्रतीक भी था। जब किसी लेबल पर मोटे अक्षरों में 'मेड इन मैनचेस्टर' लिखा दिखाई देता तो खरीददारों को कपड़ा खरीदने में किसी प्रकार का संकोच नहीं होता था।
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Question 62 Marks
भारत में औद्योगिक उत्पादन पर प्रभुत्व रखने वाली यूरोपीय प्रबन्धकीय एजेन्सियों की कुछ विशेष प्रकार के उत्पादों में ही रुचि क्यों थी?
Answer
भारत में औद्योगिक उत्पादन पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने वाली यूरोपीय प्रबन्धक एजेन्सियों की कुछ विशेष प्रकार के उत्पादों, जैसे-चाय, कॉफी के बागान, खनन, नील व जूट व्यवसाय में ही रुचि थी। ये ऐसे उत्पाद थे जिनकी मुख्य रूप से निर्यात के लिए आवश्यकता थी।
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Question 72 Marks
जॉबर कौन होते थे? उनके कार्यों को स्पष्ट कीजिए?
Answer
जॉबर-उद्योगपति नए मजदूरों की भर्ती के लिए प्रायः एक व्यक्ति रखते थे जो जॉबर कहलाता था। इन्हें अलग-अलग इलाकों में सरदार या मिस्त्री भी कहते थे। जॉबर कोई पुराना और विश्वस्त कर्मचारी होता था।
जॉबर के कार्य-वह अपने गाँव से लोगों को लाता था, उन्हें काम का भरोसा देता था, उन्हें शहर में जमने के लिए मदद देता था और मुसीबत में पैसे से मदद करता था। बाद में जॉबर मदद के बदले पैसे व तोहफों की माँग करने लगे और मजदूरों की जिंदगी को नियंत्रित करने लगे।
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Question 82 Marks
फ्लाइंग शटल पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer
फ्लाइंग शटल (फ्लाइ शटल) रस्सियों और पुलियों के द्वारा चलने वाला एक यांत्रिक औजार है जिसका बुनाई के लिए प्रयोग किया जाता है। यह क्षैतिज धागे को लम्बवत् धागे में पिरो देती है। इससे बुनकरों को बड़े करघे चलाना और चौड़े अरज के कपड़ा बनाने में सहायता मिली। 
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Question 92 Marks
जमशेदजी जीजीभोये के बारे में आप क्या जानते हैं?
Answer
जमशेदजी जीजीभोये- जमशेदजी जीजीभोये एक पारसी बुनकर के बेटे थे। अपने समय के बहुत सारे लोगों की तरह उन्होंने भी चीन के साथ व्यापार और जहाजरानी का काम किया था। उनके पास जहाजों का एक विशाल बेड़ा था। अंग्रेज और अमेरिकी जहाज कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा के कारण 1850 के दशक तक उन्हें सारे जहाज बेचने पड़े।
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Question 102 Marks
"उन्नीसवीं शताब्दी के आरम्भ में वेतन बढ़ने के बाद भी मजदूरों की दशा में सुधार का स्पष्ट पता नहीं चलता।" व्याख्या कीजिए।
Answer
यद्यपि उन्नीसवीं सदी के प्रारम्भ में मजदूरों के वेतनों में कुछ वृद्धि हुई, परन्तु इससे उनकी दशा में सुधार का पता नहीं चलता क्योंकि मजदूरों की आय केवल वेतन की दर पर ही निर्भर नहीं होती थी। यह रोजगार की अवधि पर भी निर्भर करती थी।
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Question 112 Marks
उद्योगों में मौसमी आधार पर काम करने वाले कामगारों की स्थिति पर प्रकाश डालिए।
Answer
अनेक उद्योगों में कामगार मौसमी आधार पर काम करते थे, इसलिए उन्हें बीच-बीच में काफी समय तक खाली बैठना पड़ता था। कुछ लोग सर्दियों के बाद गाँवों में चले जाते थे, परन्तु अधिकतर मजदूर शहर में रहते हुए ही कोई छोटा-मोटा काम ढूँढ़ने का प्रयास करते थे।
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Question 122 Marks
बाजार में श्रम की प्रचुरता के मजदूरों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़े?
Answer
बाजार में श्रम की प्रचुरता से मजदूरों का जीवन बहुत प्रभावित हुआ। काम पाने के लिए गाँवों से बड़ी संख्या में मजदूर शहरों में आने लगे । रोजगार चाहने वाले बहुत से लोगों को कई सप्ताहों तक प्रतीक्षा करनी पड़ती थी। वे पुलों के नीचे निजी तथा विधि विभाग द्वारा संचालित रैनबसेरों में रहते थे। 
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Question 132 Marks
17वीं तथा 18वीं शताब्दी में छोटे तथा गरीब किसान शहरी सौदागरों के लिए काम करने के लिए क्यों तैयार हो गए थे?
Answer
17वीं तथा 18वीं सदी में छोटे तथा गरीब किसानों के पास छोटे-छोटे खेत तो थे, परन्तु वे खेत परिवार के सदस्यों का पेट नहीं भर सकते थे। इसलिए जब शहरी सौदागर उनके पास आए और उन्होंने उत्पादन के लिए पेशगी धनराशि दी तो किसान उनके लिए काम करने को तुरन्त तैयार हो गए।
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Question 142 Marks
"आदि-औद्योगिक व्यवस्था से शहरों और गाँवों के बीच एक घनिष्ठ सम्बन्ध विकसित हुआ।" व्याख्या कीजिए।
Answer
आदि-औद्योगिक व्यवस्था से शहरों और गाँवों के बीच एक घनिष्ठ सम्बन्ध स्थापित हुआ। यद्यपि सौदागर शहरों में रहते थे, परन्तु उनके लिए ऊन खरीदने, सूत कातने, बुनकर, फुलर्स तथा रंगसाजी का काम अधिकतर गाँवों में चलता था। लन्दन में तो कपड़ों की फिनिशिंग होती थी।
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Question 152 Marks
गिल्ड्स से आप क्या समझते हैं? इनके क्या कार्य थे?
Answer
यूरोपीय शहरों में विभिन्न व्यापारियों, उत्पादकों, दस्तकारों द्वारा अपने हितों की रक्षा के लिए बनाये गये संगठन गिल्ड्स कहलाते थे। गिल्ड्स से जुड़े उत्पादक कारीगरों को प्रशिक्षण देते थे, उत्पादकों पर नियन्त्रण रखते थे, प्रतिस्पर्धा तथा मूल्य तय करते थे तथा व्यवसाय में नए लोगों को आने से रोकते थे।
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Question 162 Marks
गाँवों में गरीब किसान और दस्तकार यूरोप के शहरी सौदागरों के लिए काम करने के लिए क्यों तैयार हो गए?
Answer
सत्रहवीं तथा अठारहवीं शताब्दी में गाँवों में खुले खेतों के समाप्त होने तथा कॉमन्स की बाड़ाबन्दी से छोटे और गरीब किसानों को आय के नवीन स्रोत ढूँढ़ने पड़ रहे थे। जब शहरी सौदागरों ने उन्हें माल का उत्पादन करने के लिए पेशगी राशि दी, तो किसान उनके लिए तुरन्त काम करने के लिए तैयार हो गए।
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Question 172 Marks
नयी सदी के उदय' और 'दो जादूगर' तस्वीरें क्या बतलाती है?
Answer
ये तस्वीरें आधुनिक विश्व की विजयगाथा कहती हैं। इस गाथा में आधुनिक विश्व द्रुत तकनीकी बदलावों व आविष्कारों, मशीनों व कारखानों, रेलवे और वाष्पपोतों की दुनिया के रूप में दर्शाया गया है। इसमें औद्योगीकरण का इतिहास विकास की कहानी के रूप में सामने आता है और आधुनिक युग तकनीक प्रगति के भव्य युग के रूप में उभरता है। 
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