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लघु उत्तरीय प्रश्न (3 गुण)

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Question 13 Marks
छापेखाने ने यूरोप में धर्मसुधार आन्दोलन को किस प्रकार प्रोत्साहित किया?
Answer
जर्मनी के धर्मसुधारक मार्टिन लूथर ने रोम कैथोलिक चर्च की कुरीतियों की आलोचना करते हुए अपने 95 निबन्ध लिखे। इसकी एक छपी प्रति विटनबर्ग के गिरजाघर के द्वार पर लगा दी गई। इसमें मार्टिन लूथर ने चर्च को शास्त्रार्थ करने की चुनौती दी। मार्टिन लूथर के लेख बड़ी संख्या में छापे गए और लोगों द्वारा पढ़े जाने लगे। इसके फलस्वरूप चर्च में विभाजन हो गया और प्रोटेस्टेन्ट धर्मसुधार की शुरुआत हुई। कुछ ही समय में न्यू टेस्टामेन्ट के लूथर के अनुवाद की 5000 प्रतियाँ बिक गईं और तीन महीने के अन्दर दूसरा संस्करण निकालना पड़ा। मार्टिन लूथर ने कहा. "मुद्रण ईश्वर की दी हुई महानतम देन है, सबसे बड़ा उपहार।" कुछ इतिहासकारों के अनुसार छपाई ने नया बौद्धिक वातावरण बनाया और इससे धर्म सुधार आन्दोलन के नये-नये विचारों के प्रसार में सहायता मिली। 
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Question 23 Marks
उन्नीसवीं शताब्दी के यूरोप में बच्चों, महिलाओं और मजदूरों के रूप में नये पाठक वर्ग का किस प्रकार से विकास हुआ?
Answer
(1) उन्नीसवीं शताब्दी के यूरोप में प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य होने के परिणामस्वरूप बच्चों के रूप में नये पाठक-वर्ग का उदय हुआ। मुद्रकों ने बच्चों के लिए पाठ्यपुस्तकों का प्रकाशन शुरू किया।
(2) उन्नीसवीं सदी में पेनी मैगजीन्स या एक-पैसिया पत्रिकाएँ महिलाओं के लिए प्रकाशित की गईं। ये पत्रिकाएँ विशेष रूप से महिलाओं के लिए होती थीं। 19वीं सदी में जब उपन्यास-साहित्य का प्रकाशन होने लगा तो महिलाएँ उनकी महत्त्वपूर्ण पाठिकाएँ मानी गईं।
(3) 19वीं सदी में इंग्लैण्ड में किराये पर पुस्तकें देने वाले पुस्तकालय स्थापित किये गये, जिनका उपयोग सफेद-कालर मजदूरों, दस्तकारों एवं निम्नवर्गीय लोगों को शिक्षित करने के लिए किया गया।
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Question 33 Marks
उन्नीसवीं शताब्दी में यूरोप में मुद्रण तकनीक में हुए विकास का वर्णन कीजिए।
Answer
अठारहवीं शताब्दी के अन्त तक प्रेस धातु से बनने लगे थे। उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य तक न्यूयार्क के रिचर्ड एम. हो ने शक्ति-चालित बेलनाकार प्रेस का आविष्कार किया जिससे प्रति घण्टे 8000 प्रतियाँ छप सकती थीं।
उन्नीसवीं सदी के अन्त तक आफसेट प्रेस का प्रचलन हो गया था, जिससे एक साथ छह रंग की छपाई की जा सकती थी।
इसके बाद बिजली चालित प्रेस का भी आविष्कार हुआ। इसकी सहायता से छपाई का काम बड़ी तेजी से होने लगा।
इसके अतिरिक्त कागज डालने की विधि में सुधार हुआ, प्लेट की गुणवत्ता अच्छी हुई तथा स्वचालित पेपर-रील और रंगों के लिए फोटो-विद्युतीय नियंत्रण भी काम में आने लगे।
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Question 43 Marks
19वीं शताब्दी के भारत में मुद्रण संस्कृति का महिलाओं के जीवन पर प्रभाव बताइए।
Answer
19वीं सदी में भारत में मुद्रण संस्कृति ने महिलाओं के जीवन को निम्न प्रकार से प्रभावित किया-
महिलाओं की जिंदगी और उनकी भावनाओं पर गंभीरता से पुस्तकें लिखी गईं।
मध्यम वर्ग की महिलाएँ पहले की तुलना में पढ़ने में अधिक रुचि लेने लगीं।
उदारवादी माता-पिता महिलाओं को पढ़ने के लिए विद्यालयों में भेजने लगे।
महिला लेखिकाओं ने महिलाओं की समस्याओं पर चर्चा की तथा उनके विभिन्न मुद्दे केन्द्र में आए।
कई पत्रिकाओं ने लेखिकाओं को जगह दी और उन्होंने नारी-शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।
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Question 53 Marks
भारतीय उपन्यासकारों ने भारतीय एवं विदेशी जीवनशैली में किस प्रकार तालमेल स्थापित करने का प्रयास किया? स्पष्ट करें।
Answer
अनेक भारतीय उपन्यासकारों ने अपने उपन्यासों का आधार पूर्व और पश्चिम की संस्कृति को बनाया। जैसे 'इंदुलेखा' उपन्यास की नायिका संस्कृत एवं अंग्रेजी की विद्वान है।
इस उपन्यास का नायक नायर वर्ग का अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त उच्च कोटि का संस्कृत विद्वान है जो पश्चिमी पोशाक के साथ-साथ नायर रीति-रिवाजों का पालन करता है।
इसी प्रकार उपन्यासों की नायिकाओं ने भी पश्चिमी मूल्यों के साथ अपनी पारम्परिक जीवनशैली को अपनाकर दोनों में तालमेल स्थापित किया है।
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Question 63 Marks
19वीं सदी के मध्य तक भारतीय परिवारों ने शिक्षा को बढ़ावा नहीं दिया। इन परिवारों की शंकाएँ क्या थी? उन परिवारों पर भी प्रकाश डालिए जिन्होंने नारी शिक्षा को बढ़ावा दिया।
Answer
(अ) 19वीं सदी के मध्य तक भारतीय परिवारों ने शिक्षा को बढ़ावा नहीं दिया। रूढ़िवादी परिवारों की शंकाएँ ये थीं-
परम्परागत हिन्दू मानते थे कि पढ़ी-लिखी कन्यायें विधवा हो जाती हैं।
दकियानूसी मुसलमानों को लगता था कि पढ़ने से औरतें बिगड़ जायेंगी।
(ब) लेकिन उदारवादी परिवारों ने नारी शिक्षा को बढ़ावा दिया। ये परिवार अपने यहाँ औरतों को घर पर पढ़ाने लगे और 19वीं सदी के मध्य में जब स्कूल बने तो उन्हें स्कूल भेजने लगे। कई पत्रिकाओं ने लेखिकाओं को जगह दी और उन्होंने नारी शिक्षा के प्रसार पर बल दिया।
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Question 73 Marks
भारत में मुद्रण युग से पहले की पांडुलिपियों पर टिप्पणी लिखिए।
Answer
भारत में मुद्रण युग से पहले की पांडुलिपियाँ-भारत में संस्कृत, अरबी, फारसी और विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में हस्तलिखित पांडुलिपियों की एक समृद्ध परम्परा थी। पांडुलिपियाँ ताड़ के पत्तों या हाथ से बने कागज पर नकल कर बनाई जाती थीं। कभी-कभी तो पत्तों पर बेहतरीन तस्वीरें भी बनाई जाती थीं। इन्हें तख्तियों की जिल्द में या सिलकर बाँध दिया जाता था। लेकिन ये पांडुलिपियाँ नाजुक होती थीं; काफी महँगी होती थीं। इन्हें सावधानी से पकड़ना पड़ता था तथा इन्हें पढ़ना भी आसान नहीं था। इसलिए इनका व्यापक दैनिक इस्तेमाल नहीं होता था।
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Question 83 Marks
“सत्रहवीं सदी तक आते-आते चीन में शहरी संस्कृति के फलने-फूलने से छपाई के प्रयोग में विविधता आई।" स्पष्ट कीजिए।
Answer
सत्रहवीं सदी तक आते-आते चीन में शहरी संस्कृति के फलने-फूलने से छपाई के प्रयोग में निम्न विविधता आई-
विद्वान और अधिकारी वर्ग के साथ-साथ अब व्यापारी भी अपने दैनिक कारोबार की जानकारी लेने के लिए मुद्रित सामग्री का प्रयोग करने लगे।
अब पढ़ना एक शौक भी बन गया। नए पाठक-वर्ग को काल्पनिक किस्से, कविताएँ, आत्मकथाएँ, शास्त्रीय साहित्यिक रचनाओं के संकलन और रूमानी नाटक पसन्द थे।
धनी महिलाओं ने पढ़ना शुरू कर दिया। कुछ महिलाओं ने अपने द्वारा रचित काव्य और नाटक भी छापे।
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Question 93 Marks
संसारभर में पुस्तकों की बढ़ती हुई माँग को पूरा करने के लिए अपनाए गए किन्हीं तीन उपायों की व्याख्या कीजिए।
Answer
संसारभर में पुस्तकों की बढ़ती हुई माँग को पूरा करने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए गए-
गुटेनबर्ग ने प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार कर किताबों की बढ़ती माँग को पूरा करने में सफलता प्राप्त की। लगभग 100 वर्षों के दौरान (1450-1550) यूरोप के अधिकांश देशों में छापेखाने लग गए। पुस्तक उत्पादन में भी अत्यधिक बढ़ोतरी हुई।
19वीं सदी के मध्य तक न्यूयार्क के रिचर्ड एम. हो ने शक्तिचालित बेलनाकार प्रेस को कारगर बना दिया।
19वीं सदी के अन्त तक ऑफसेट प्रेस आ गया, जिससे एक साथ छ: रंग की छपाई सम्भव थी।
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