Question 15 Marks
$F_2$ संतति में लक्षणों के नए संयोजन के बनने के कारण बताइए।
Answer
View full question & answer→$F_2$ संतति में लक्षणों के नए संयोजन के बनने के कारण को द्विसंकर क्रॉस द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है; जैसा कि मेंडल द्वारा किया गया।
आइए जानें कि मेंडल ने गोल, हरे (RRyy) बीजों वाले तथा झुर्रीदार, पीले (rr YY) बीजों वाले मटर के पौधों को चुना। मान लीजिए कि गोल आकार तथा पीला रंग प्रभावी विशेषक थे। $F_1$ पीढ़ी की सभी संततियाँ (Rr Yy) जीन प्रारूप वाले गोल, पीले बीज उत्पन्न करती हैं तथा केवल प्रभावी विशेषक प्रदर्शित करती हैं। यद्यपि सभी पौधों में अप्रभावी विशेषक के लिए जीन भी विद्यमान थे। ऐसा स्वतन्त्र अपव्यूहन नियम के कारण हुआ। इससे गोल आकार तथा पीले रंग की बीजों वाला नया संयोजन बनना सुगम हुआ। यद्यपि ये लक्षण भिन्न-भिन्न जनकों से आए थे।
$F_2$ पीढ़ी में स्वतन्त्र अपव्यूहन नियम के अनुसार एक बार फिर लक्षणों का पुर्नसंयोजन होता है।
मेंडल के द्विसंकर क्रांस वाले प्रयोग के दौरान, देखा गया कि $F_1$ पीढ़ी के सभी पौधे गोल, पीले बीज उत्पन्न करते हैं। $F_2$ पीढ़ी में, विभिन्न बीजों के लक्षण प्रारूप भिन्न थे। यह $F_2$ पीढ़ी में लक्षणों के नए संयोजन का बनना यह सिद्ध करता है कि विभिन्न लक्षण एक-दूसरे से स्वतन्त्र रूप से वंशानुगत होते हैं और इसी के चलते हमें लक्षणों के नए संयोजन अर्थात् RRYY, RRYy, RrYY, RrYy, rrYY, rrYy, rryy प्राप्त होते हैं।
आइए जानें कि मेंडल ने गोल, हरे (RRyy) बीजों वाले तथा झुर्रीदार, पीले (rr YY) बीजों वाले मटर के पौधों को चुना। मान लीजिए कि गोल आकार तथा पीला रंग प्रभावी विशेषक थे। $F_1$ पीढ़ी की सभी संततियाँ (Rr Yy) जीन प्रारूप वाले गोल, पीले बीज उत्पन्न करती हैं तथा केवल प्रभावी विशेषक प्रदर्शित करती हैं। यद्यपि सभी पौधों में अप्रभावी विशेषक के लिए जीन भी विद्यमान थे। ऐसा स्वतन्त्र अपव्यूहन नियम के कारण हुआ। इससे गोल आकार तथा पीले रंग की बीजों वाला नया संयोजन बनना सुगम हुआ। यद्यपि ये लक्षण भिन्न-भिन्न जनकों से आए थे।
$F_2$ पीढ़ी में स्वतन्त्र अपव्यूहन नियम के अनुसार एक बार फिर लक्षणों का पुर्नसंयोजन होता है।
मेंडल के द्विसंकर क्रांस वाले प्रयोग के दौरान, देखा गया कि $F_1$ पीढ़ी के सभी पौधे गोल, पीले बीज उत्पन्न करते हैं। $F_2$ पीढ़ी में, विभिन्न बीजों के लक्षण प्रारूप भिन्न थे। यह $F_2$ पीढ़ी में लक्षणों के नए संयोजन का बनना यह सिद्ध करता है कि विभिन्न लक्षण एक-दूसरे से स्वतन्त्र रूप से वंशानुगत होते हैं और इसी के चलते हमें लक्षणों के नए संयोजन अर्थात् RRYY, RRYy, RrYY, RrYy, rrYY, rrYy, rryy प्राप्त होते हैं।
