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लघु उत्तरीय प्रश्न [2M] - रसायन शास्त्र

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Question 12 Marks
उभयधर्मी ऑक्साइड क्या होते हैं? दो उभयधर्मी ऑक्साइडों का उदाहरण दीजिए।
Answer
वे धातु ऑक्साइड जो अम्लीय के साथ-साथ क्षारीय लक्षण भी प्रदर्शित करते हैं अर्थात् अम्ल तथा क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया करते हैं, उभयधर्मी ऑक्साइड कहलाते हैं।
उदाहरणार्थः ऐलुमिनियम ऑक्साइड $\left( Al _2 O _3\right)$ तथा जिंक ऑक्साइड (ZnO)।
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Question 22 Marks
दिए गए तथ्य को ध्यान से पढ़िए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए- कुछ आयनिक यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक नीचे दिए गए हैं-
यौगिकगलनांक (K)क्वथनांक (K)
NaCl10741686
LiCl8871600
$CaCl _2$10451900
CaO28503120
$MgCl _2$9811685
इन यौगिकों को आयनिक कहा जाता है, क्योंकि वे धातु से अधातु में इलेक्ट्रॉनों के स्थानान्तरण द्वारा बनते हैं। ऐसे यौगिकों में इलेक्ट्रॉन स्थानान्तरण को उसमें शामिल तत्त्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास द्वारा नियन्त्रित किया जाता है। प्रत्येक तत्त्व अपने निकटतम उत्कृष्ट गैस या स्थिर अष्टक के पूर्ण रूप से भरे हुए संयोजकता कोश को प्राप्त करने की कोशिश करता है।
(i) आयनिक यौगिकों के उच्च गलनांक और क्वथनांक के अलावा दो अन्य गुण बताइए।
(ii) सोडियम क्लोराइड जैसे आयनिक यौगिक का निर्माण करते समय सोडियम परमाणु अपना स्थिर विन्यास कैसे प्राप्त करता है?
Answer
(i) 1. आयनिक यौगिक ठोस, कठोर और भंगुर होते हैं।
2. वे जल में घुलनशील और पेट्रोल, केरोसिन आदि विलायकों में अघुलनशील होते हैं।
(ii) सोडियम का परमाणु क्रमांक 11 है, इसलिए इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1 है। सोडियम के बाहरी कोश में केवल 1 इलेक्ट्रॉन होता है। एक स्थिर अवस्था में आमतौर पर उसके सबसे बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसलिए स्थिर विन्यास प्राप्त करने के लिए, सोडियम परमाणु क्लोरीन को 1 इलेक्ट्रॉन दान करता है
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Question 32 Marks
धातु एवं अधातु पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer
धातु पदार्थ जो कठोर, चमकीले, आघातवर्घ्य, तन्य, ध्वनिक और ऊष्मा तथा विद्युत के सुचालक होते हैं, धातु कहलाते हैं। जैसे-सोडियम, पोटैशियम, लोहा, बेरियम आदि।
अधातु जो पदार्थ नरम, मलिन, भंगुर, ऊष्मा तथा विद्युत के कुचालक होते है, एवं जो ध्वनिक नहीं होते हैं, अधातु कहलाते हैं। जैसे-ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, फॉस्फोरस, क्लोरीन आदि।
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Question 42 Marks
धातुओं एवं अधातुओं के गुणों को लिखिए।
Answer
धातुओं के गुण -
(i) शुद्ध रूप में धातु की सतह चमकदार होती है। धातु के इस गुण-धर्म को धात्विक चमक (metallic lustre) कहते हैं।
(ii) धातुएँ सामान्यतः कठोर होती हैं। प्रत्येक धातु की कठोरता अलग-अलग होती है।
अधातुओं के गुण -
(i) अधिकांश अधातुएँ साधारण ताप पर गैस अवस्था में होती हैं। ब्रोमीन ऐसी अधातु है जो साधारण ताप पर द्रव होती है।
(ii) अधातुओं में चमक नहीं पायी जाती है।
(iii) अधातुएँ ऊष्मा और विद्युत की कुचालक होती हैं।
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Question 52 Marks
संक्षारण के निवारण की दो विधियों को लिखिए।
Answer
संक्षारण के निवारण की दो विधियां निम्नलिखित हैं-
(i) पेंट करना- लोहे की वस्तुओं को जंग से बचाने के लिए यह सबसे प्रचलित विधि है। लोहे की सतह पर पेंट करके, वायु तथा नमी को इसके सम्पर्क में आने से रोक दिया जाता है जिससे लोहे पर अंग नहीं लगता है।
(ii) तेल व ग्रीस लगाकर- जब लोहे की सतह पर तेल या ग्रीस की पतली परत चढ़ा दी जाती है तो इसका वायु व नमी से सम्पर्क हो जाता है जिससे इसका जंग से बचाव हो जाता है।
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Question 62 Marks
फफोलेदार कॉपर से शुद्ध कॉपर धातु प्राप्त करने की विद्युत अपघटनी विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।
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Question 72 Marks
सोडियम व क्लोरीन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
Answer
सोडियम (Na): 2, 8, 1 व क्लोरीन (Cl): 2, 8, 7
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Question 82 Marks
आयनिक यौगिकों के गलनांक उच्च होते हैं। कारण बताइए।
Answer
आयनिक यौगिकों में परस्पर आयनिक आकर्षण बहुत ही अधिक शक्तिशाली होता है। इस शक्तिशाली बंध को तोड़ने के लिए अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अतः इनके गलनांक उच्च होते हैं।
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Question 92 Marks
सिनाबार से मरकरी प्राप्त करने का रासायनिक समीकरण लिखिए।###मरकरी के एक अयस्क का नाम एवं सूत्र लिखिए तथा इससे मरकरी प्राप्त करने का रासायनिक समीकरण भी लिखिए।
Answer
सिनाबार (HgS) मरकरी का एक अयस्क है। गर्म करने पर यह पहले मरकरी ऑक्साइड (HgO) में बदलता है और अधिक गर्म करने पर धात्विक मरकरी में बदल जाता है।
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Question 102 Marks
(i) निम्न पर टिप्पणी दीजिए- यशदलेपन
(ii) क्या होता है जब? Na धातु ठंडे जल से अभिक्रिया करती है।
Answer
(i) इस्पात और लोहे को जंग से बचाने के लिए उन पर जस्ते की पतली परत चढ़ाने की विधि यशदलेपन कहलाती है। जस्ते की परत नष्ट हो जाने पर भी यशदलेपन वस्तु जंग से सुरक्षित रहती है।
(ii) $2 Na (s)+2 H _2 O (l) \longrightarrow 2 NaOH (a q)+ H _2(g)+$ऊर्जा
सोडियम धातु इतनी तेजी से पानी से अभिक्रिया करती है कि उत्पन्न हाइड्रोजन आग पकड़ लेती है।
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Question 112 Marks
निम्नलिखित तत्त्वों के युग्मों के संयोग से बनने वाले स्थायी द्विअंगी यौगिकों के सूत्र लिखिए।
(i) Mg तथा N (ii) K तथा O (iii) Al तथा O
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Question 122 Marks
कॉपर ग्लांस अयस्क से किस प्रकार ताँबा विगलित किया जाता है?###कॉपर सल्फाइड $\left( Cu _2 S\right)$ से कॉपर धातु किस प्रकार प्राप्त की जाती है तथा रासायनिक समीकरण भी लिखिए।
Answer
कॉपर ग्लांस $\left( Cu _2 S\right)$ को वायु में गर्म करते हैं, तो आंशिक रूप से ऑक्सीकृत होता है तथा ऑक्सीकृत उत्पाद शेष कॉपर ग्लांस से क्रिया करके कॉपर धातु देते हैं।
$\begin{array}{l}2 Cu _2 S+3 O _2 \xrightarrow{\Delta} 2 Cu _2 O +2 SO _2 \\ 2 Cu _2 O + Cu _2 S \xrightarrow{\Delta} 6 Cu + SO _2\end{array}$
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Question 132 Marks
आघातवर्ध्यता तथा तन्यता को समझाते हुए लिखिए कि यह किस प्रकार तत्त्वों का गुण है?
Answer
आघातवर्ध्यता - धातुओं का वह गुण जो उन्हें पीटे जाने पर बिना तोड़े पतली चादर में परिवर्तित होने की क्षमता प्रदान करता है, आघातवर्ध्यता कहलाता है। आघातवर्ध्यता धातुओं का एक विशिष्ट भौतिक गुणधर्म है। सोना तथा चाँदी सर्वाधिक आघातवर्धनीय धातुएँ है, ऐलुमिनियम तथा कॉपर भी उच्च आघातवर्धनीय धातुएँ हैं। बिस्कुट चॉकलेट, दवाइयाँ, सिगरेट आदि की पैकिंग में ऐलुमिनियम पत्रकों का प्रयोग किया जाता है।
तन्यता- वे धातुएँ जिनसे अत्यन्त पतले तार खींचे जा सकते है, तन्य कहलाती है तथा इस गुणधर्म को तन्यता कहते हैं। तन्यता धातुओं का एक अन्य विशिष्ट गुणधर्म है। सोना सर्वाधिक तन्य धातु है।
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Question 142 Marks
एक उदाहरण देते हुए संक्षारण की व्याख्या कीजिए तथा संक्षारण से सुरक्षा के उपायों को लिखिए।###संक्षारण को समझाइए। इसके दो उदाहरण लिखिए।
Answer
नम वायु के सम्पर्क में आने पर सतह की धातु का क्षरण, संक्षारण कहलाता है। यह एक ऑक्सीकारक प्रक्रम है। लोहे पर जंग लगना, चाँदी का बदरंग होना, ताँबे तथा कांसा पर हरी परत का निर्माण आदि संक्षारण के उदाहरण हैं।
लोहे की संक्षारण से सुरक्षा करने के लिए निम्न विधियाँ प्रयुक्त करते हैं; जैसे-पेण्ट लगाकर, तेल लगाकर, ग्रीस लगाकर, यशदलेपन (लोहे की वस्तुओं पर जस्ते की परत चढ़ाकर), क्रोमियम लेपन, ऐनोडीकरण या मिश्र धातु बनाकर। क्योंकि इन प्रक्रियाओं से लोहे का सम्पर्क वायु एवं नमी से नहीं हो पाता और लोहा संक्षारित नहीं होता।
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Question 152 Marks
जिंक धातु के सल्फाइड अयस्क के धातु निष्कर्षण का रासायनिक समीकरण देते हुए वर्णन कीजिए।###जिंक सल्फाइड से जिंक धातु प्राप्त करने का रासायनिक समीकरण लिखिए।
Answer
सान्द्रित जिंक ब्लैंड अयस्क का $927^{\circ} C$ पर वायु की उपस्थिति में परावर्तनी भट्ठी में भर्जन करते हैं। इस अभिक्रिया में जिंक सल्फाइड (जिंक ब्लैंड) जिंक सल्फेट व जिंक ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है।
$\begin{aligned} 2 ZnS +3 O _2 & \xrightarrow{927^{\circ} C } 2 ZnO +2 SO _2 \uparrow \\ ZnS +2 O _2 & \xrightarrow{\Delta} ZnSO _4 \\ 2 ZnSO _4 & \xrightarrow[927^{\circ} C ]{\Delta} 2 ZnO + SO _2 \uparrow+ O _2 \uparrow\end{aligned}$
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Question 162 Marks
अयस्क व खनिज को परिभाषित कीजिए। अयस्क तथा खनिज में क्या अन्तर है?###अयस्क व खनिज को स्पष्ट कीजिए।###उदाहरण देते हुए खनिज तथा अयस्क को स्पष्ट कीजिए।###खनिज तथा अयस्क की परिभाषा एवं उदाहरण लिखिए।###खनिज तथा अयस्क में अन्तर समझाइए।
Answer
अयस्क Ores जिस खनिज से किसी धातु को प्रचुर मात्रा में कम व्यय पर आसानी से प्राप्त किया जा सके, उस खनिज को उस विशिष्ट धातु का अयस्क कहते हैं। जैसे-ऐलुमिनियम, बॉक्साइट।
खनिज Minerals प्रकृति में पृथ्वी के अन्दर धातुएँ तथा उनके यौगिक जिस रूप में पाये जाते हैं, उनको खनिज कहते हैं। जैसे-लोहा, कोयला आदि।
खनिज तथा अयस्क में अन्तर सभी अयस्क खनिज होते हैं, परन्तु सभी खनिज अयस्क नहीं होते हैं।
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Question 172 Marks
धातुमल किसे कहते हैं? समझाइए।
Answer
अयस्क में उपस्थित अशुद्धियों की गालक से क्रिया के फलस्वरूप गलनीय पदार्थ को धातुमल कहते हैं।
उदाहरणार्थ: जब क्षारीय गालक $MgCO _3$ अम्लीय अशुद्धि $SiO _2$ के साथ क्रिया करता है, तो मैग्नीशियम सिलिकेट धातुमल के रूप में पृथक् हो जाता है।
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Question 182 Marks
कॉपर की छड़ को $AgNO _3$ विलयन में डालने पर कुछ समय बाद विलयन का रंग नीला हो जाता है। विद्युत रासायनिक श्रेणी के आधार पर समझाइए।###क्या होता है जब कॉपर की छड़ को सिल्वर नाइट्रेट विलयन में डालते हैं?###रासायनिक समीकरण द्वारा कारण सहित समझाइए-कॉपर की छड़ को सिल्वर नाइट्रेट के विलयन में डालने पर विलयन का रंग नीला हो जाता है, क्यों?
Answer
विद्युत रासायनिक श्रेणी का प्रत्येक तत्त्व अपने से नीचे स्थित तत्त्वों को उसके विलयन से विस्थापित कर सकता है। श्रेणी में Cu का स्थान Ag से ऊपर है, अतः यह $AgNO _3$ से निम्नलिखित क्रिया देगा-
$Cu (s)+2 AgNO _3 \longrightarrow Cu ^{2+}+2 NO _3^{-}+2 Ag \downarrow$
इस प्रकार विलयन में क्यूत्रिक आयन विद्यमान होने से विलयन का रंग नीला हो जाएगा।
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Question 192 Marks
विद्युत रासायनिक श्रेणी के आधार पर व्याख्या कीजिए कि क्यों कॉपर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल में घुलकर हाइड्रोजन गैस मुक्त नहीं करता है?
Answer
हम जानते हैं कि जो धातु सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन से ऊपर स्थित हैं, वे ही अम्लों में से हाइड्रोजन विस्थापित कर पाती है। वैद्युत रासायनिक श्रेणी में कॉपर हाइड्रोजन से नीचे स्थित है। अतः कॉपर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल में घुलकर हाइड्रोजन गैस मुक्त नहीं करता है।
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Question 202 Marks
निस्तापन क्रिया को उदाहरण देते हुए समझाइए।###निस्तापन की व्याख्या कीजिए।
Answer
सान्द्रित अयस्क को उसके गलनांक के नीचे ताप पर वायु की अनुपस्थिति या कम मात्रा में गर्म करके उसमें से नमी, हाइड्रेशन जल तथा अन्य वाष्पशील पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया को निस्तापन कहते हैं। इस प्रक्रम में अयस्क को बिल्कुल भी पिघलने नहीं दिया जाता है। धातु कार्बोनेटों तथा हाइड्रॉक्साइडों को गर्म करके कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल निष्कासित करके धातु ऑक्साइडों को प्राप्त करना भी निस्तापन ही कहलाता है। निस्तापन प्रक्रम के फलस्वरूप अयस्क शुष्क तथा छिद्रमय (porous) हो जाता है।
उदाहरणार्थ: बॉक्साइट $\left( Al _2 O _3 \cdot 2 H _2 O \right)$ अयस्क का निस्तापन करने पर उसमें उपस्थित हाइड्रोजन जल वाष्पित होकर बाहर निकल जाता है।
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Question 212 Marks
भर्जन क्या है? यह क्रिया किन सान्द्रित अयस्कों के लिए प्रयोग में लायी जाती है?###भर्जन को उदाहरण देते हुए समझाइए।###भर्जन क्रिया में प्रयुक्त होने वाली भ‌ट्ठी का नामांकित चित्र बनाइए तथा समीकरण दीजिए।###भर्जन क्या है ? कॉपर पायराइट के भर्जन में होने वाली अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए।###भर्जन पर टिप्पणी कीजिए।
Answer
सान्द्रित अयस्क को अकेले या किसी अन्य पदार्थ के साथ मिला करके उसके गलनांक के नीचे (बिना पिघलाये) वायु की नियन्त्रित मात्रा को उपस्थिति में गर्म करने की क्रिया को भर्जन कहा जाता है। यह क्रिया मुख्यत सल्फाइड अयस्कों के लिए प्रयुक्त की जाती है। भर्जन तथा निस्तापन में केवल इतना ही अन्तर होता है कि भर्जन निस्तापन की अपेक्षा कुछ अधिक ताप तथा वायु की नियन्त्रित मात्रा की उपस्थिति में पूर्ण होती है। भर्जन क्रिया के द्वारा अयस्क आंशिक या पूर्ण रूप से ऑक्सीकृत हो जाता है तथा अयस्क मे उपस्थित सल्फर, आर्सेनिक, ऐण्टीमनी आदि अशुद्धियाँ ऑक्सीकृत होकर वाष्पशील ऑक्साइडों के रूप में पृथक् हो जाती हैं। भर्जन की क्रिया को परावर्तनी भट्ठी में कराते हैं।
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उदाहरणार्थ: सान्द्रित कॉपर पायराइट $\left( CuFeS _2\right)$ को कम ताप तथा वायु की नियन्त्रित मात्रा की उपस्थिति में परावर्तनी भ‌ट्ठी में गर्म करने पर अग्रलिखित भक्रियाएँ सम्पन्न होती हैं-
$\begin{aligned} 2 CuFeS _2+ O _2 & \longrightarrow Cu _2 S+2 FeS + SO _2 \uparrow \\ 2 Cu _2 S+3 O _2 & \longrightarrow 2 Cu _2 O +2 SO _2 \uparrow \\ 2 FeS +3 O _2 & \longrightarrow 2 FeO +2 SO _2 \uparrow\end{aligned}$
अयस्क में उपस्थित S तथा As की अशुद्धियाँ वाष्पशील ऑक्साइडों में परिवर्तित जाती है।
$\begin{aligned} S + O _2 & \longrightarrow SO _2 \uparrow \\ 4 As +3 O _2 & \longrightarrow 2 As _2 O _3 \uparrow\end{aligned}$
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