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काव्य-खण्ड - 1 सूरदास question types

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Sample Questions

काव्य-खण्ड - 1 सूरदास questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

चरन-कमल बंद हरि राई ।।
जाकी कृपा पंगु गिरि लंधै, अंधे कौ सब कुछ दरसाई॥
बहिरौ सुनै, गैंग पुनि बोलै, रंक चलै सिर छत्र धराई ।
सूरदास स्वामी करुनामय, बार-बार बंद तिहिं पाई ॥
(I) उपरोक्त पद्यांश का सन्दर्भ स्पष्ट कीजिए।
(II) रेखांकित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए
(III) इन पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार या भाव को पहचानिए और उसका नाम बताइए।
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अबिगत-गति कछु कहत न आवै ।
ज्यौं गूंगे मीठे फल को रस, अंतरगत ही भावै ॥
परम स्वाद सबही सु निरंतर, अमित तोष उपजावै ।
मन-बानी कौं अगम-अगोचर, सो जानैं जो पावै ॥
रूप-रेख-गुन जाति-जुगति-बिनु, निरालंब कित धावै।
सब बिधि अगम बिचारहिं तातें, सूर सगुन-पद गावै ॥
(I) उपयुक्त पद्यांश का सन्दर्भ स्पष्ट कीजिए।
(II) कविता ‘अबिगत-गति कछु कहत न आवै’ में सूरदास ने परमात्मा के स्वरूप को कैसे व्यक्त किया है? अपने शब्दों में उत्तर दीजिए।
(III) पद्यांश की इन पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए – “सब बिधि अगम बिचारहिं तातें, सूर सगुन-पद गावै।”
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ऊधौ मन न भये दस बीस।।
एक हुतौ सो गयौ स्याम सँग, कौ अवराधै ईस ॥
इंद्री सिंथिल भई केसव बिनु, ज्यौं देही बिनु सीस।
आसा लागि रहति तन स्वासा, जीवहिं कोटि बरीस ॥
(I) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
(II) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए —
“ऊधौ मन न भये दस बीस।”
(III) इस पद में कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है? स्पष्ट कीजिए।
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ऊधौ मोहिं ब्रज बिसरत नाहीं।।
बृन्दावन गोकुल बने उपबन, सघन कुंज की छाँहीं ॥
प्रात समय माता जसुमति अरु नंद देखि सुख पावत ।
माखन रोटी दह्यौ सजायौ, अति हित साथ खवावत ॥
गोपी ग्वाले बाल सँग खेलत, सब दिन हँसत सिरात ।
सूरदास धनि-धनि ब्रजवासी, जिनस हित जदु-तात ॥
(I) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
(II) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए —
“ऊधौ मोहिं ब्रज बिसरत नाहीं।”
(III) कवि ने ब्रजवासियों की कौन-सी विशेषता बताई है?
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निरगुन कौन देस कौ बासी ?
मधुकर कहि समुझाइ सौंह दै, बुझति साँच न हाँसी ॥
को है जनक, कौन है जननी, कौन नारि, को दासी ?
कैसे बरन, भेष है कैसौ, किहिं रस मैं अभिलाषी ?
पावैगौ पुनि कियौ आपनौ, जौ रे करैगौ गाँसी ।
सुनत मौन है रह्यौ बावरी, सूर सबै मति नासी ॥
(I) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
(II)  रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए —
“मधुकर कहि समुझाइ सौंह दै, बुझति साँच न हाँसी।”
(III) ‘निरगुण’ शब्द से गोपी का क्या तात्पर्य है?
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