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काव्य-खण्ड - 3 रसखान question types

18 questions across 3 question groups — pick any mix to generate a Hindi [NON NCERT] paper with step-by-step answer keys.

18
Questions
3
Question groups
5
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Sample Questions

काव्य-खण्ड - 3 रसखान questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

रसखान की शैली हिंदी कविता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
  • A
    उसने वीर रस को नया जीवन दिया
  • उसने फारसी एवं हिंदी का सुंदर समन्वय पेश किया
  • C
    उसने प्रौद्योगिकी को कविता में लाया
  • D
    उसने राजनीतिक कविता लिखी

Answer: B.

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धूरि भरे अति सोभित स्यामजू, तैसी बनी सिर सुंदर चोटी ।
खेलत खात फिरै अँगनी, पग पैंजनी बाजति पीरी कछोटी ॥
वा छबि को रसखानि बिलोकत, वारत काम कला निज कोटी ।
काग के भाग बड़े सजनी हरि-हाथ सों लै गयौ माखन-रोटी ॥
(I) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
(II) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए —
"काग के भाग बड़े सजनी हरि-हाथ सों लै गयौ माखन-रोटी ॥"
(III) श्रीकृष्ण की बाल-छवि की विशेषताएँ इस पद्यांश में कैसे चित्रित हुई हैं?
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मानुष हौं तो वही रसखानि, बसौं बज गोकुल गाँव के ग्वारन ।
जौ पसु हौं तो कहा बस मेरो, चरौं नित नंद की धेनु मँझारन ॥
पाहन हौं तो वही गिरि को, जो धर्यौ कर छत्र पुरंदर-धारन ।
जो खग हौं तो बसेरो करौं मिलि कालिंदी-कूल कदंब की डारन ॥
(I) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
(II) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए —
“मानुष हौं तो वही रसखानि, बसौं बज गोकुल गाँव के ग्वारन।”
(III) रसखान पशु, पाषाण और पक्षी रूप में क्या-क्या बनना चाहते हैं?
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गोरज बिराजै भाल लहलही बनमाल,
आगे गैयाँ पाछे ग्वाल गावै मृदु बानि री।
तैसी धुनि बाँसुरी की मधुर-मधुर जैसी,
बंक चितवन मंद मंद मुसंकानि री ॥
कदम बिटप के निकट तटिनी के तट,
अटा चढ़ि चाहि पीत पट फहरानि री ।
रस बरसावै तन-तपनि बुझावै नैन,
प्राननि रिझावै वह आवै रसखानि री ॥
(I) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
(II) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए —
"रस बरसावै तन-तपनि बुझावै नैन,
प्राननि रिझावै वह आवै रसखानि री ॥"
(III) इस पद्यांश में श्रीकृष्ण के सौन्दर्य का चित्र किस प्रकार खींचा गया है?
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मोर-पखा सिर ऊपर राखिहौं, गुंज की माल गरें पहिरौंगी।
ओढिपितम्बर लै लकुटी, बन गोधन ग्वारन संग फिरौंगी॥
भावतो वोहि मेरो रसखानि, सो तेरे कहै सब स्वाँग करौंगी।
या मुरली मुरलीधर की, अधरान धरी अधरा न धरींगी ॥
(I) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
(II) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए —
"या मुरली मुरलीधर की, अधरान धरी अधरा न धरींगी ॥"
(III) कवि ने श्रीकृष्ण के प्रेम में किस प्रकार जीवन जीने की कल्पना की है?
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कान्ह भये बस बाँसुरी के, अब कौन सखी, हमकौं चहिहै ।
निसद्यौस रहै सँग-साथ लगी, यह सौतिन तापन क्यौं सहिहै ॥
जिन मोहि लियौ मनमोहन कौं, रसखानि सदा हमकौं दहिहै ।
मिलि आओ सबै सखि, भागि चलें अब तो ब्रज मैं बँसुरी रहिहै ॥
(I) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
(II) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए —
"मिलि आओ सबै सखि, भागि चलें अब तो ब्रज मैं बँसुरी रहिहै ॥"
(III) गोपियों की पीड़ा का कारण क्या है? स्पष्ट कीजिए।
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