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Question 15 Marks
भारत के पवित्र धार्मिक साहित्य में आध्यात्मिक उन्नति के लिए भारत के ऋषियों, महाऋषियों तथा विद्वानों ने जो नियम निर्धारित किए हैं वे संसार के इतिहास में अद्वितीय हैं। भारत का साहित्य हरिश्चन्द्र, युधिष्ठिर तथा दशरथ जेसे महापुरुषों के चरित्रों से भरा पड़ा है जिन्होंने सत्य की वेदी पर अपने जीवन की बलि दे दी थी। "उन्होंने स्वार्थ की भावना का पूर्ण रूप से परित्याग कर वास्तविक सभ्यता के द्योतक वसुधैव कुटुम्बकम' के उच्च सिद्धान्त को अपना लिया था। यह वह समय था जब भारतवर्ष समस्त संसार को न केवल अपनी धार्मिक तथा आध्यात्मिक शिक्षाओं द्वारा अपितु विज्ञान, कला-कौशल तथा उद्योग-धन्धों द्वारा उपकृत करता था। भारतीय विद्वता का पौधा, जिसको प्राचीन विद्वानों ने अपने परिश्रम से सींचा था, आज दिनों-दिन सूखता जा रहा है।
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