Question 110 Marks
गेहूँ की दुनिया खत्म होने जा रही है वह स्थूल दुनिया, जो आर्थिक और राजनीतिक रूप में हम सब पर छायी है।
जो आर्थिक रूप में रक्त पीती रही है, राजनीतिक रूप में रक्त की धारा बहाती रही है।
अब वह दुनिया आने वाली है जिसे हम गुलाब की दुनिया कहेंगे!
गुलाब की दुनिया-मानस का संसार सांस्कृतिक जगत्।
अहा. कैसा वह शुभ दिन होगा जब हम स्थूल शारीरिक आवश्यकताओं की जंजीर तोड़कर सूक्ष्म मानस-जगत का नया लोक बसाएँगे।
(i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ii) इस अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) गेहूँ की दुनिया खत्म होने जा रही है? इसका क्या आशय है?
(iv) भौतिकता की दुनिया किस रूप में रक्त की धारा बहाती रही है?
(v) गेहूँ और गुलाब को किसका प्रतीक माना गया है।
जो आर्थिक रूप में रक्त पीती रही है, राजनीतिक रूप में रक्त की धारा बहाती रही है।
अब वह दुनिया आने वाली है जिसे हम गुलाब की दुनिया कहेंगे!
गुलाब की दुनिया-मानस का संसार सांस्कृतिक जगत्।
अहा. कैसा वह शुभ दिन होगा जब हम स्थूल शारीरिक आवश्यकताओं की जंजीर तोड़कर सूक्ष्म मानस-जगत का नया लोक बसाएँगे।
(i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ii) इस अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) गेहूँ की दुनिया खत्म होने जा रही है? इसका क्या आशय है?
(iv) भौतिकता की दुनिया किस रूप में रक्त की धारा बहाती रही है?
(v) गेहूँ और गुलाब को किसका प्रतीक माना गया है।
Answer
View full question & answer→(i) पाठ का नाम - गेहूं बनाम गुलाब। लेखक का नाम - रामवृक्ष बेनीपुरी।
(ii) अंश की व्याख्या - श्री रामवृक्ष बेनीपुरी जी को विश्वास है कि अब मानसिक सन्तुष्टि के युग का आगमन होने वाला है। यह ऐसा संसार होगा जिसमें मन को सन्तोष मिल सकेगा और मानव की संस्कृति विकसित हो सकेगी। लेखक अपनी प्रसन्नता को व्यक्त करते हुए लिखता है कि वह मंगलमय दिन कैसा होगा, जब हम बाह्य शारीरिक आवश्यकताओं के बन्धन से मुक्त हो सकेंगे। लेखक उस शुभ दिन की कल्पना करता है जब हम गुलाब की सांस्कृतिक धरती पर स्वच्छन्दता के साथ विचरण कर सकेंगे।
(iii) गेहूँ की दुनिया खत्म होने जा रही है इसका आशय है कि भौतिकता का युग अब समाप्त होने जा रहा
(iv) भौतिकता की दुनिया राजनीति के रूप में रक्त की धारा बहाती रही है।
(v) गेहूँ और गुलाब में गेहूँ को भौतिकता को और गुलाब को आध्यात्मिक मानसिकता का प्रतीक माना गया है।
(ii) अंश की व्याख्या - श्री रामवृक्ष बेनीपुरी जी को विश्वास है कि अब मानसिक सन्तुष्टि के युग का आगमन होने वाला है। यह ऐसा संसार होगा जिसमें मन को सन्तोष मिल सकेगा और मानव की संस्कृति विकसित हो सकेगी। लेखक अपनी प्रसन्नता को व्यक्त करते हुए लिखता है कि वह मंगलमय दिन कैसा होगा, जब हम बाह्य शारीरिक आवश्यकताओं के बन्धन से मुक्त हो सकेंगे। लेखक उस शुभ दिन की कल्पना करता है जब हम गुलाब की सांस्कृतिक धरती पर स्वच्छन्दता के साथ विचरण कर सकेंगे।
(iii) गेहूँ की दुनिया खत्म होने जा रही है इसका आशय है कि भौतिकता का युग अब समाप्त होने जा रहा
(iv) भौतिकता की दुनिया राजनीति के रूप में रक्त की धारा बहाती रही है।
(v) गेहूँ और गुलाब में गेहूँ को भौतिकता को और गुलाब को आध्यात्मिक मानसिकता का प्रतीक माना गया है।