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गद्यांश आधारित - प्रश्नों का उत्तर [10M]

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Question 110 Marks
गेहूँ की दुनिया खत्म होने जा रही है वह स्थूल दुनिया, जो आर्थिक और राजनीतिक रूप में हम सब पर छायी है।
जो आर्थिक रूप में रक्त पीती रही है, राजनीतिक रूप में रक्त की धारा बहाती रही है।
अब वह दुनिया आने वाली है जिसे हम गुलाब की दुनिया कहेंगे!
गुलाब की दुनिया-मानस का संसार सांस्कृतिक जगत्।
अहा. कैसा वह शुभ दिन होगा जब हम स्थूल शारीरिक आवश्यकताओं की जंजीर तोड़कर सूक्ष्म मानस-जगत का नया लोक बसाएँगे।
(i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ii) इस अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) गेहूँ की दुनिया खत्म होने जा रही है? इसका क्या आशय है?
(iv) भौतिकता की दुनिया किस रूप में रक्त की धारा बहाती रही है?
(v) गेहूँ और गुलाब को किसका प्रतीक माना गया है।
Answer
(i) पाठ का नाम - गेहूं बनाम गुलाब। लेखक का नाम - रामवृक्ष बेनीपुरी।
(ii) अंश की व्याख्या - श्री रामवृक्ष बेनीपुरी जी को विश्वास है कि अब मानसिक सन्तुष्टि के युग का आगमन होने वाला है। यह ऐसा संसार होगा जिसमें मन को सन्तोष मिल सकेगा और मानव की संस्कृति विकसित हो सकेगी। लेखक अपनी प्रसन्नता को व्यक्त करते हुए लिखता है कि वह मंगलमय दिन कैसा होगा, जब हम बाह्य शारीरिक आवश्यकताओं के बन्धन से मुक्त हो सकेंगे। लेखक उस शुभ दिन की कल्पना करता है जब हम गुलाब की सांस्कृतिक धरती पर स्वच्छन्दता के साथ विचरण कर सकेंगे।
(iii) गेहूँ की दुनिया खत्म होने जा रही है इसका आशय है कि भौतिकता का युग अब समाप्त होने जा रहा
(iv) भौतिकता की दुनिया राजनीति के रूप में रक्त की धारा बहाती रही है।
(v) गेहूँ और गुलाब में गेहूँ को भौतिकता को और गुलाब को आध्यात्मिक मानसिकता का प्रतीक माना गया है।
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Question 210 Marks
अपनी वृत्तियों को वश में करने के लिए आज मनोविज्ञान दो उपाय बताता है इन्द्रियों के संयमन और वृत्तियों के उन्नयन का।
संयमन का उपदेश हमारे ऋषि-मुनि देते आये हैं। किन्तु इसके बुरे नतीजे भी हमारे सामने आये हैं बड़े-बड़े तपस्वियों की लम्बी-लम्बी तपस्याएँ एक रम्भा, एक मेनका, एक उर्वशी की मुसकान पर स्खलित हो गयीं।
आज भी देखिए। गाँधी जी के तीस वर्ष के उपदेशों और आदेशों पर चलने वाले हम तपस्वी किस तरह दिन-दिन नीचे गिरते जा रहे हैं।
इसलिए उपाय एकमात्र है-वृत्तियों के उन्नयन का।
कामनाओं को स्थूल वासनाओं के क्षेत्र से ऊपर उठाकर सूक्ष्म भावनाओं की ओर प्रवृत्त कीजिए।
शरीर पर मानस की पूर्ण प्रभुता स्थापित हो-गेहूँ पर गुलाब की।
(i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ii) इस अंश की व्याख्या कीजिए।
(ii) अपनी वृत्तियों को वश में करने के लिए आज मनोविज्ञान कौन-से दो उपाय बतलाता है?
(iv) बड़े-बड़े तपस्वियों की तपस्याएँ किनकी मुस्कान पर स्खलित हो गई।
(v) गेहूँ और गुलाब मानव के मन-मस्तिष्क पर किसकी सत्ता स्थापित होनी चाहिए?
Answer
(i) पाठ का नाम - गेहूं बनाम गुलाब। लेखक का नाम - रामवृक्ष बेनीपुरी।
(ii) अंश की व्याख्या - लेखक ने गेहूं को भौतिक, आर्थिक एवं राजनीतिक प्रगति का प्रतीक माना है और गुलाब को
मानसिक अर्थात् सांस्कृतिक प्रगति का। लेखक के अनुसार मन को अवस्थाओं का अध्ययन करने वाले अर्थात् मनोवैज्ञानिक मन को नियन्त्रित करने के लिए दो उपाय बतलाते हैं। उनका प्रथम उपाय इन्द्रियों (पाँच ज्ञानेन्द्रियों-आँख, कान, नाक, जीभ और त्वचा तथा पाँच कर्मेन्द्रियों-हाथ, पाँव, वाक्, गुदा और उपस्थ) द्वारा होने वाले क्रिया-कलापों के नियमन-संयमन से है तथा दूसरा उपाय वृत्तियों अर्थात् मन की अवस्थाओं के उन्नयन अर्थात् उनका उच्चस्तरीय विकास करने से है।।
(iii) अपनी इन्द्रियों को वश में करने के लिए आज मनोविज्ञान दो उपाय बतलाता है इन्द्रियों के संयम और वृत्तियों के उन्नयन का।
(iv) बड़े-बड़े तपस्वियों की तपस्याएँ एक मेनका, एक उर्वशी की मुसकान पर स्खलित हो गईं। मानव के मन-मस्तिष्क में गेहूं की नहीं गुलाब की सत्ता स्थापित होनी चाहिए।
(v) self
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Question 310 Marks
मानव शरीर में पेट का स्थान नीचे है, हृदय को ऊपर और मस्तिष्क का सबसे ऊपर पशुओं की तरह उसका पेट और मानस समानान्तर रेखा में नहीं हैं। जिस दिन वह सीधे तनकर खड़ा हुआ, मानस ने उसके पेट पर विजय की घोषणा की।
(i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ii) इस अंश की व्याख्या कीजिए।
(i) मानव की शरीर-रचना में किसका स्थान सबसे ऊपर है?
(iv) किसका पेट और मानस समानान्तर रेखा में हैं?
(v) किसने पेट पर विजय प्राप्त कर ली?
Answer
(i) पाठ का नाम – अथातो घुमक्कड़-जिज्ञासा । लेखक का नाम - राहुल सांकृत्यायन।
(ii) अंश की व्याख्या - लेखक का कहना है कि पशुओं की तरह मनुष्य का पेट और मानस (मन) समानान्तर रेखा में नहीं होता। जब मनुष्य पैरों के बल खड़ा होता है, तब उसका मन पेट से ऊपर होता है। तात्पर्य यह है कि मनुष्य के शरीर में पेट को सबसे नीचे, उससे ऊपर मन को और सबसे ऊपर मस्तिष्क को स्थान मिला है, अर्थात् शारीरिक और बाह्य आवश्यकताओं को कम और भावनाओं को अधिक महत्त्व दिया गया है। इरा दृष्टि से व्यक्ति को मानसिक तुष्टि को ही सबसे अधिक महत्त्व प्रदान करना चाहिए। इसके उपरान्त भावनात्मक तुष्टि को और सबसे अन्त में शारीरिक सन्तुष्टि पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
(iii) मानव की शरीर रचना में मस्तिष्क का स्थान सबसे ऊपर है।
(iv) पशु का पेट और मानस समानान्तर रेखा में हैं।
(v) मनुष्य के हृदय ने पेट पर विजय प्राप्त कर ली।
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Question 410 Marks
रात का काला घुप्प पर्दा दूर हुआ, तब वह उच्छुसित हुआ सिर्फ इसलिए नहीं कि अब पेट-पूजा की समिधा जुटाने में उसे सहुलियत मिलेगी बल्कि वह आनन्द-विभोर हुआ ऊषा की लालिमा से उगते सूरज की शनैः शनैः प्रस्फुटित होने वाली सुनहरी किरणों से, पृथ्वी पर चमचम करते लक्ष-लक्ष ओस-कणों से आसमान में जब बादल उमड़े, तब उसमें अपनी कृषि का आरोप करके ही वह प्रसन्न नहीं हुआ, उसके सौन्दर्य-बोध ने उसके मन-मोर को नाच उठने के लिए लाचार किया इन्द्रधनुष ने उसके हृदय को भी इन्द्रधनुषी रंगों में रंग दिया।
(i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।
(ii) इस अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) किसने मनुष्य के मन-मोर को नाच उठने के लिए लाचार किया?
(iv) किसके दूर होने पर मनुष्य उच्छ्रसित हुआ?
(v) प्रस्तुत गद्यांश का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer
(i) पाठ का नाम - गेहूं बनाम गुलाब। लेखक का नाम - रामवृक्ष बेनीपुरी।
(ii) अंश की व्याख्या - मर्मज्ञ लेखक का कहना है कि पहले मनुष्य की शारीरिक और मानसिक आवश्यकताओं में समन्वय था; अर्थात् जब वह भूख से व्याकुल था, तब भी अपनी संस्कृति को नहीं भूला था। काली रात बीत जाने पर जहाँ वह अपनी भूख मिटाने के लिए भोजन की तलाश में निकला, वहीं उषाकाल की लालिमा को देखकर आनन्दित भी हुआ। अन्तरिक्ष से धरती की ओर आती सूरज की सुनहरी किरणों ने तथा हरी घास पर बिखरी और मोतियों की तरह चमकने वाली असंख्य ओस की बूंदोंने उसके हृदय की दशा ही बदल दी और उसे आनन्द-विभोर कर दिया।
(iii) आसमान में उमड़े बादलों ने मनुष्य के मन-मोर को नाच उठने के लिए लाचार किया।
(iv) रात के काले घुप्प पर्दे के दूर होने पर मनुष्य उच्छुसित हुआ।
(v) प्रस्तुत गद्यांश का आशय है कि मनुष्य अपने जीवन में केवल शारीरिक आवश्यकताओं की पूर्ति ही नहीं चाहता, वरन् वह मानसिक, बौद्धिक और आत्मिक आवश्यकताओं की सन्तुष्टि भी करना चाहता है।
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