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काव्यांजलि - 2 सूरदास question types

25 questions across 5 question groups — pick any mix to generate a Hindi [NON NCERT] paper with step-by-step answer keys.

25
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5
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Sample Questions

काव्यांजलि - 2 सूरदास questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

निम्नलिखित में से किस कवि को बाल-वर्णन क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है ?
  • A
    तुलसीदास
  • B
    बिहारी
  • सूरदास
  • D
    केशवदास

Answer: C.

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निम्नलिखित में से किस कवि को काव्य श्रीमद्भागवत से अत्यधिक प्रभावित है ?
  • A
    केशव
  • सूर
  • C
    तुलसी
  • D
    बिहारी

Answer: B.

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कहत कत परदेसी की बात ।
मंदिर अरध अवधि बदि हमसौं, हरि अहार चलि जात ।।
ससि रिपु बरष, सूर रिपु जुग बर, हर-रिपु कीन्हों घात ।
मघ पंचक लै गयौ साँवरौ, तातै अति अकुलाते ।।
नखत, बेद, ग्रह, जोरि, अर्ध करि, सोइ बनत अब खात ।
सूरदास बस भई बिरह के, कर मी पछितात।।
(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम बताइट।
(i) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(i) श्रीकृष्ण गोपिकाओं से कितने दिन में लौट आने का वादा करके मथरा गए थे?
(iv) श्रीकृष्ण के वियोग में गोपियों को एक-एक दिन और एक-एकरांत किसके समान प्रतीत होते हैं?
(v) गोपियाँ किस कारण और अधिक व्याकुलता का अनुभव करती हैं?
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हमारें हरि हारिल की लकरी ।।
मन क्रम बचन नंद-नंदन उर, यह दृढ़ करि पकरी ।।
जागत-सोवत स्वप्न दिवस-निसि, कान्हु-कान्ह जकरी ।
सुनत जोग लागत है ऐसौ, ज्यों करुई ककरी ।।
सु तौ व्याधि हमकों ले आए, देखी सुनी ने करी ।
यह तो सूर तिनहिं लै सौंपौ, जिनके मन चकरी ।।
(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम बताइए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(ii) गोपियों ने श्रीकृष्ण को किसके समान प्रिय बताया है?
(iv) गोपियाँ दिन-रात जागते-सोते किसकी रट लगाती रहती हैं?
(v) उद्धव की योग-चर्चा गोपिकाओं को किसकी तरह अरुचिकर लगती है?
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हरि जू की बाल-छवि कहीं बरनि ।
सकल सुख की सींव, कोटि-मनोज-शोभा-हरनि ।।
भुज भुजंग, सरोज नैननि, बदन बिधु जित लरनि ।
रहे बिवरनि, सलिल, नभ, उपमा अपर दुरि डरनि ।।
मंजु मेचक मृदुल तनु, अनुहरत भूषन भरनि ।
मनहुँ सुभग सिंगार-सिसु-तरु, फयौ अद्भुत फरनि ।।
चलत पद-प्रतिबिंब मनि आँगन घुटुरुवनि करनि ।
जलज-संपुट-सुभग-छबि भरि लेति उर जनु धरनि ।।
पुन्य फल अनुभवति सुतहिं बिलोकि कै नँद-घरनि ।
सूरे प्रभु की उर बसी किलकनि ललित लरखरनि ।।

(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम बताइए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) सूरदास ने किनकी शोभा को करोड़ों कामदेवों के सौंदर्य को हरने वाली बताया है?
(iv) नन्द-पत्नी यशोदा पुत्र कृष्ण को देखकर कैसा अनुभव करती हैं?
(v) मनहुँ सुभग सिंगार-सिसु-तरु, फयौ अद्भुत फरनि।' पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
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मेरो मन अनत कहाँ सुख पावै ।
जैसे उड़ि जहाज को पंछी, फिरि जहाज पर आवै ।।
कमल-नैन कौ छाँड़ि महातम, और देव को ध्यावै ।।
परम गंग कौ छाँड़ि पियासौ, दुरमति कूप खनावै ।।
जिहिं मधुकर अंबुज-रस चाख्यौ, क्यों करील-फल भावै ।।
सूरदास-प्रभु कामधेनु तजि, छेरी कौन दुहावै ।।
(i) उपर्युक्त पद्यांश के शीर्षक और कवि का नाम बताइए।
(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
(iii) सूरदास किसकी भक्ति में परम सुख का अनुभव करते हैं?
(iv) जहाज का पक्षी किसे कहा गया है?
(v) सूरदास ने भगवान कृष्ण की भक्ति को त्यागकर अन्य देवताओं की भक्ति करने को क्या बताया है?
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