Question types

काव्य-खण्ड - 1 कबीर question types

27 questions across 4 question groups — pick any mix to generate a Hindi [NON NCERT] paper with step-by-step answer keys.

27
Questions
4
Question groups
5
Question types
Sample Questions

काव्य-खण्ड - 1 कबीर questions

One sample from each question group in this chapter. Select any group above to see the full set with answer keys.

कबीर कहा गरबियौ, देही देखि सुरंग।
बीछड़ियाँ मिलिबौ नहीं, ज्यूँ काँचली भुवंग।
(अ) ‘देही देखि सुरंग’ से कबीर क्या बताना चाहते हैं?
(ब) ‘बीछड़ियाँ मिलिबौ नहीं’ का क्या अर्थ है?
(स) ‘ज्यूँ काँचली भुवंग’ से कबीर क्या सन्देश देना चाहते हैं?
View full solution
यह तन काचा कुंभ है, लियाँ फिरे था साथि।
ढबका लगा फूटि गया, कछू न आया हाथि।
(अ) ‘यह तन काचा कुंभ है’ — कबीर इस पंक्ति में क्या बताना चाहते हैं?
(ब) ‘लियाँ फिरे था साथि’ का क्या अर्थ है?
(स) ‘ढबका लगा फूटि गया, कछू न आया हाथि’ — इस पंक्ति का क्या अर्थ है?
View full solution
इहि औसरि चेत्या नहीं, पसु ज्यूँ पाली देह।
राम नाम जाण्या नहीं, अंति पड़ी मुख पेह।
(अ) ‘इहि औसरि चेत्या नहीं’ — कबीर यहाँ क्या समझाना चाहते हैं?
(ब) ‘राम नाम जाण्या नहीं’ का क्या अर्थ है?
(स) ‘अंति पड़ी मुख पेह’ — कबीर इस पंक्ति से क्या संदेश देना चाहते हैं?
View full solution
यहुं ऐसा संसार है, जैसा सैबल फूल।
दिन दस के ब्यौहार कों, झूठै रंग न भूलि ।
(अ) ‘यहुं ऐसा संसार है, जैसा सैबल फूल’ — कबीर इस पंक्ति में संसार की कैसी स्थिति दर्शा रहे हैं?
(ब) ‘दिन दस के ब्यौहार कों, झूठै रंग न भूलि’ — इस पंक्ति का क्या अर्थ है?
(स) इस दोहे से कबीर हमें क्या सीख देना चाहते हैं?
View full solution
कबीर कहा गरबियौ, ऊँचे देखि अवास।
काल्हि परयूँ भ्वैं लोटणाँ, ऊपरि जामैै धासी।
(अ) कबीर ने ‘ऊँचे देखि अवास’ कहकर किस प्रकार के गर्व का उल्लेख किया है?
(ब) ‘काल्हि परयूँ भ्वैं लोटणाँ’ का क्या अर्थ है और कबीर इससे क्या संदेश देना चाहते हैं?
(स) इस दोहे से कबीर हमें कौन-सी महत्वपूर्ण शिक्षा देते हैं?
View full solution

Generate a काव्य-खण्ड - 1 कबीर paper free

Pick question groups from the list above, set marks and difficulty, and export a branded PDF with step-by-step answer keys. First 3 chapters free — no signup.

Download App