नए प्रश्न नए विचार — सामाजिक अध्ययन कक्षा 6 — Question
CBSE Boardहिन्दी माध्यमकक्षा 6सामाजिक अध्ययननए प्रश्न नए विचार5 Marks
Question
आश्रम - व्यवस्था का संक्षिा वर्णन कीजिये।
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Answer
आश्रम - व्यवस्था: प्राचीन भारत में जिस समय जैन तथा बौद्ध धर्म लोकप्रिय हो रहे थे लगभग उसी समय ब्राह्मणों ने आश्रम - व्यवस्था का विकास किया। 'आश्रम' का अर्थ यहाँ आश्रम शब्द का आशय लोगों द्वारा रहने तथा ध्यान करने के लिए प्रयोग में आने वाले स्थान से नहीं है, बल्कि इसका तात्पर्य जीवन के एक चरण से है। प्रकार - आश्रम व्यवस्था को चार भागों में बांटा गया:
ब्रह्मचर्य
गृहस्थ
वानप्रस्थ तथा
संन्यास आश्रम।
1. ब्रह्मचर्य आश्रम के अंतर्गत ब्राह्मण, क्षत्रिय तथा वैश्य से यह अपेक्षा की जाती थी कि इस चरण के दौरान वे सादा जीवन विताकर वेदों का अध्ययन करेंगे।
2. गृहस्थ आश्रम के अंतर्गत उन्हें विवाह कर एक गृहस्थ के रूप में रहना होता था।
3. वानप्रस्थ आश्रम के अंतर्गत उन्हें जंगल में रहकर साधना करनी थी।
4. संन्यास आश्रम में अंततः उन्हें सब कुछ त्यागकर संन्यासी बन जाना था। आश्रम व्यवस्था ने लोगों को अपने जीवन का कुछ हिस्सा ध्यान में लगाने पर बल दिया। इस व्यवस्था में प्रायः स्त्रियों को वेद पढ़ने की अनुमति नहीं थी और उन्हें अपने पतियों द्वारा पालन किए जाने वाले आश्रमों का ही अनुसरण करना होता था।
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