अतिसार के कारण- खराब आहार एवं दूषित पानी, आँतों में खरास का होना, सूखे चारे के बाद कच्चा हरा चारा खिलाना, पेट में कीड़ों का होना, ज्यादा गर्मी एवं सर्दी का लगना आदि। इसके अतिरिक्त अन्य संक्रामक रोगों के जीवाणुओं के प्रकोप के कारण भी यह रोग उत्पन्न हो सकता है।
अतिसार के लक्षण-पशु सुस्त हो जाता है, जुगाली कम या बिल्कुल बन्द कर देता है। खाना-पीना बन्द कर देता है। गोबर बहुत पतला आता है, जिससे कि पिछले पैर गोबर में सने रहते हैं। प्यास बहुत बढ़ जाती है। पशु बहुत ही कमजोर होने लगता है। त्वचा सूखी प्रतीत होती है। बाँधने के स्थान पर गोबर के छींटे दूर-दूर तक पड़े मिलते हैं।