बाजार में श्रम की प्रचुरता के मजदूरों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़े?
Download our app for free and get startedPlay store
बाजार में श्रम की प्रचुरता से मजदूरों का जीवन बहुत प्रभावित हुआ। काम पाने के लिए गाँवों से बड़ी संख्या में मजदूर शहरों में आने लगे । रोजगार चाहने वाले बहुत से लोगों को कई सप्ताहों तक प्रतीक्षा करनी पड़ती थी। वे पुलों के नीचे निजी तथा विधि विभाग द्वारा संचालित रैनबसेरों में रहते थे। 
art

Download our app
and get started for free

Experience the future of education. Simply download our apps or reach out to us for more information. Let's shape the future of learning together!No signup needed.*

Similar Questions

  • 1
    17वीं तथा 18वीं शताब्दी में छोटे तथा गरीब किसान शहरी सौदागरों के लिए काम करने के लिए क्यों तैयार हो गए थे?
    View Solution
  • 2
    नये उपभोक्ता पैदा करने में विज्ञापनों की भूमिका की विवेचना कीजिए। 
    View Solution
  • 3
    गाँवों में गरीब किसान और दस्तकार यूरोप के शहरी सौदागरों के लिए काम करने के लिए क्यों तैयार हो गए?
    View Solution
  • 4
    नयी सदी के उदय' और 'दो जादूगर' तस्वीरें क्या बतलाती है?
    View Solution
  • 5
    जमशेदजी जीजीभोये के बारे में आप क्या जानते हैं?
    View Solution
  • 6
    "उन्नीसवीं शताब्दी के आरम्भ में वेतन बढ़ने के बाद भी मजदूरों की दशा में सुधार का स्पष्ट पता नहीं चलता।" व्याख्या कीजिए।
    View Solution
  • 7
    भारत में औद्योगिक उत्पादन पर प्रभुत्व रखने वाली यूरोपीय प्रबन्धकीय एजेन्सियों की कुछ विशेष प्रकार के उत्पादों में ही रुचि क्यों थी?
    View Solution
  • 8
    गिल्ड्स से आप क्या समझते हैं? इनके क्या कार्य थे?
    View Solution
  • 9
    जॉबर कौन होते थे? उनके कार्यों को स्पष्ट कीजिए?
    View Solution
  • 10
    "आदि-औद्योगिक व्यवस्था से शहरों और गाँवों के बीच एक घनिष्ठ सम्बन्ध विकसित हुआ।" व्याख्या कीजिए।
    View Solution