2. बालिका शिक्षा की स्थिति व कारण - जिस रफ्तार से भारत में आर्थिक प्रगति हो रही है, उस अनुपात में शिक्षा के मामले में देश अपेक्षित तरक्की नहीं कर पाया है। खासतौर पर बालिका शिक्षा की स्थिति चिन्ताजनक है। लड़कों की तुलना में लड़कियों का जल्दी विवाह, घरेलू कामकाज में हाथ बँटाना, सुरक्षा का अभाव, छोटे भाई - बहनों की देखभाल आदि कारणों से बालिकाओं की पढ़ाई में बाधा आती है। आर्थिक स्थिति अच्छी न होना.और अभिभावकों का अशिक्षित होने पर भी बालिकाओं की शिक्षा बाधित होती है।
3. बालिका शिक्षा की आवश्यकता - आज बालिका शिक्षा को राष्ट्रीय आवश्यकता समझकर जोर दिया जा रहा है। बालिकाओं पर किसी भी देश का भविष्य निर्भर करता है, क्योंकि बालिकाएँ आगे चलकर माँ की भूमिका निभाती हैं और माँ किसी भी परिवार की केन्द्रीय इकाई होती है, यदि माँ को शिक्षा प्राप्त नहीं है, तो वह एक स्वस्थ शिक्षित परिवार व उन्नत समाज के निर्माण में विफल रहेगी। अतः बालिका के लिए शिक्षा नितान्त आवश्यक है, जिससे उनका नैतिक, सामाजिक, व्यावहारिक और कौशल विकास हो सके और वह आत्मनिर्भर बन सके।
4. बालिका शिक्षा के लिए सरकार का प्रयास - आज सरकार द्वारा ऐसी अनेक योजनाएँ चलायी जा रही हैं जिससे बालिकाओं की निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था हो रही है। लोगों में जागरूकता फैलाने का काम स्वयंसेवी संस्थाएँ कर रही हैं। आम चुनावों में महिलाओं को आरक्षण दिया जा रहा है। इन सब ने आज ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों का रुझान पढ़ाई की ओर कर दिया है। सरकार द्वारा बालिका कल्याण हेतु अनेक योजनाएँ चलायी जा रही हैं। गार्गी पुरस्कार वितरण, गरीब बालिकाओं को छात्रवृत्ति, साइकिल वितरण आदि सुविधाएँ दी जा रही हैं। ये सब सरकार की सुनियोजित योजनाओं का फल है कि आज समाज में बालिकाओं के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण बदला है।
5. उपसंहार - अतः दो दशक पूर्व और आज की बालिकाओं की स्थिति की तुलना करें तो हमें क्रांतिकारी . परिवर्तन दिखाई पड़ेंगे। बालिका शिक्षा से आज देश प्रगति की ओर बढ़ रहा है। बाल विवाह, दहेज प्रथा, महिला उत्पीड़न जैसी घटनाओं में कमी और जागरूकता आयी है। लोगों को बालिका शिक्षा का महत्त्व समझना होगा तभी सामाजिक विकास का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।
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