2. निरक्षरता का दुष्प्रभाव - हमारे देश में पराधीनता के काल में शिक्षण - सुविधाओं का नितान्त अभाव था। निरक्षरता के कारण उस समय बंधुआ - मजदूर, जमींदारी शोषण - उत्पीड़न, आर्थिक विषमता, अन्धविश्वास एवं रूढ़ियों .. की अधिकता थी। देश का गुलामी से जकड़े रहना भी इसी कारण था। वर्तमान में स्त्रियों, अनुसूचित जातियों, आदिवासियों आदि में निरक्षरता का प्रतिशत अधिक है। राजस्थान की जनसंख्या के हिसाब से यहाँ ए क - तिहाई लोग निरक्षर हैं तथा यहाँ निरक्षरता के अनेक दुष्प्रभाव दिखाई देते हैं।
3. निरक्षरता निवारण अभियान - स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सरकारी स्तर पर निरक्षरता दूर करने के प्रयास किये जाते रहे। इस दृष्टि से शिक्षण संस्थाओं का विस्तार किया गया तथा राष्ट्रीय स्तर पर प्रौढ़ शिक्षा की नीति घोषित की गई। इस नीति के अनुसार अनेक स्तरों पर साक्षरता कार्यक्रम चलाये जाने लगे। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक विद्यालय खोले गये तथा प्राथमिक शिक्षा का खूब प्रसार किया गया। गाँवों में बेरोजगार शिक्षित युवकों को पंचायत स्तर पर साक्षरता अभियान में लगाया गया और समाज कल्याण विभाग के सहयोग से साक्षरता अभियान को आगे बढ़ाया गया। अब सर्वशिक्षा अभियान के द्वारा साक्षरता का प्रतिशत बढ़ने लगा है। ..
4. निरक्षरता निवारण के लिए सुझाव - हमारे देश से निरक्षरता का कलंक तभी मिट सकता है, जब सारे देश में प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य कर दी जावे और बालकों को अशिक्षित रखना कानूनी अपराध माना जावे। इसके लिए जगह जगह पर विद्यालय खोले जावें और गरीब जनता के बालकों को हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध करायी जावें। सरकार भी इस दिशा में अधिक से अधिक धन व्यय करने का प्रावधान रखे। वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित सर्वशिक्षा अभियान को अधिक प्रभावशाली बनाया जावे और इसके लिए प्रचार - साधनों का पूरा उपयोग किया जावे।
5. उपसंहार - निरक्षरता समाज में अज्ञान और अन्धकार का प्रतीक है। जो समाज और राष्ट्र निरक्षर नागरिकों से
राष्ट्र संब प्रकार से उन्नत माना जाता है। निरक्षरता मानव - समाज पर एक कलंक है, यह मानवता के लिए एक अभिशाप है। इस अभिशाप से मुक्ति आवश्यक है और यह कार्य साक्षरता के आलोक से ही हो सकता है।
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