चीनी उद्योग- चीनी उद्योग भारत का एक मुख्य कृषि आधारित उद्योग है। भारत का चीनी उत्पादन में विश्व में दूसरा स्थान है लेकिन गुड़ व खांडसारी के उत्पादन में इसका प्रथम स्थान है। इस उद्योग में प्रयुक्त कच्चा माल भारी होता है तथा ढुलाई में इसके सूक्रोस की मात्रा घट जाती है।
वितरण- भारत में चीनी मिलें उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गुजरात, पंजाब, हरियाणा तथा मध्य प्रदेश राज्यों में फैली हैं। चीनी मिलों का 60 प्रतिशत उत्तर प्रदेश तथा बिहार में है। यह उद्योग मौसमी है, अतः सहकारी क्षेत्र के लिए उपयुक्त है।
वर्तमान प्रवृत्ति- पिछले कुछ वर्षों से इन मिलों की संख्या दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों में विशेषकर महाराष्ट्र में बढ़ी है। इसका मुख्य कारण यहाँ के गन्ने में अधिक सूक्रोस की मात्रा है। अपेक्षाकृत ठंडी जलवायु भी गुणकारी है। इसके अतिरिक्त इन राज्यों में सहकारी समितियाँ भी सफल रही हैं।
समस्याएँ-चीनी उद्योग की प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं-
चीनी उद्योग का अल्पकालिक होना- चीनी उद्योग एक मौसमी उद्योग है। यह वर्ष में 4 से 7 महीने के लिए ही होता है। वर्ष के शेष महीनों में मिल व श्रमिक बेकार रहते हैं। इससे उद्योग को आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ता है।
पुरानी तथा असक्षम तकनीक का प्रयोग- भारतीय चीनी मिलों में पुरानी तथा असक्षम मशीनरी व तकनीक के प्रयोग से उत्पादन कम होता है।
परिवहन की पर्याप्त सुविधा का अभाव- गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में चीनी मिलों तक पर्याप्त परिवहन की सुविधाओं के अभाव के कारण गन्ना समय पर कारखानों में नहीं पहुँच पाता है।
खोइ (Baggasse) का अधिकतम उपयोग न हो पाना।