मानव के विकास में कोयले का विशेष महत्त्व है। कोयले के चार प्रकार हैं-
1. पीट- इसमें कम कार्बन, नमी की अधिक मात्रा व निम्न ताप क्षमता होती है।
2. लिग्नाइट - यह निम्नकोटि का भूरा कोयला होता है। यह मुलायम होने के साथ अधिक नमीयुक्त होता है।
3. बिटुमिनस - गहराई में दबे तथा अधिक तापमान से प्रभावित कोयले को बिटुमिनस कोयला कहा जाता है।
4. एंथ्रेसाइट - यह सबसे उत्तम प्रकार का कोयला होता है जिसमें कार्बन की मात्रा 80 प्रतिशत से अधिक होती है। यह ठोस काला व कठोर होता है।
कोयले के भारत में विस्तृत भंडार हैं। भारत में कोयला दो प्रमुख भूगर्भिक युगों के शैल क्रम में पाया जाता है। एक गोंडवाना जिसकी आयु 200 लाख वर्ष से कुछ अधिक हैं और दूसरा टर्शियरी निक्षेप जो लगभग 55 लाख वर्ष पुराने हैं। गोंडवाना कोयला, जो धातुशोधन कोयला है, के प्रमुख संसाधन दामोदर घाटी (प. बंगाल तथा झारखंड), झरिया, रानीगंज, बोकारो में स्थित हैं जो महत्त्वपूर्ण कोयला क्षेत्र हैं। गोदावरी, महानदी, सोन व वर्धा नदी घाटियों में भी कोयले के जमाव पाए जाते हैं। टर्शियरी कोयला क्षेत्र उत्तर-पूर्वी राज्यों-मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश व नागालैंड में पाया जाता है।