उत्तर भारत का प्रसिद्ध प्राचीन धार्मिक नगर बनारस और उसकी विशेषताएँ इस कविता का प्रतिपाद्य है। यहाँ सभी कार्य धीरे-धीरे सम्पन्न होते हैं। धूल धीरे-धीरे उड़ती है जिससे सारा वातावरण धूल से भर जाता है। मन्दिरों और गंगा के घाटों पर मंत्रोच्चारण होता है, आरती के घण्टे धीरे-धीरे बजते हैं। इस शहर के साथ मोक्ष की धारणा जुड़ी है। यहाँ आस्था, श्रद्धा, विरक्ति, विश्वास और भक्ति का मिला-जुला रूप देखने को मिलता है। यहाँ एक ओर खुशियाँ होती हैं तो दूसरी ओर शवों को कन्धों पर उठाकर गंगाघाट पर ले जाते हैं और दाहसंस्कार करते हैं। वसन्त में भिखारियों के कटोरे दान से भर जाते हैं।