Question
शेर' लघु कथा में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए।

Answer

    'शेर' असगर वजाहत द्वारा लिखी गई लघु कथा है जिसमें लेखक ने शासन व्यवस्था पर व्यंग्य किया है। शेर व्यवस्था का प्रतीक है जिसके पेट में जंगल के सभी जानवर किसी प्रलोभन या लोभ-लालच के वशीभूत होकर समाते जा रहे हैं। शेर का प्रचारतंत्र मजबूत है। वह ऊपर से अहिंसावादी, न्यायप्रिय होने का ढोंग करता है किन्तु वास्तव में वह हिंसक एवं अन्यायी है। 
    शासनतंत्र तब तक खामोश रहता है जब तक उसकी आज्ञा का पालन एवं स्वार्थ की पूर्ति होती रहे। जब लेखक शेर के मुँह में न जाने का संकल्प करता है तभी शेर दहाड़ने लगता है। इसके द्वारा लेखक यह व्यक्त करता है कि सत्ता तभी तक चुप रहती है जब तक कोई उसकी व्यवस्था पर उँगली न उठाए किन्तु जब कोई उसकी आज्ञा मानने से इन्कार करता है तब वह भयानक रूप धारण कर विरोधी स्वरों को कुचलने का भरपूर प्रयास करती है।

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