सिंहासन हिल उठे, राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में भी आई फिर से नयी जवानी थी,
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फ़िरंगी को करने की सबसे मन में ठानी थी,
चमक उठी सन् सत्तावन में
वह तलवार पुरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो
झाँसीवाली रानी थी॥
QUESTION:
Q.1. इस काव्यांश में किस समय की दशा का वर्णन है?
(A) भारत की परतंत्रता की
(B) भारत की स्वतंत्रता की।
(C) भारत में अंग्रेज़ी शासन की
(D) भारत में मुगल शासन की
Q.2. राजवंशों की भृकुटी तानने से कवयित्री का तात्पर्य क्या है?
(A) तिरछी नज़रों से देखना
(B) क्रोध भरी नज़रों से देखना
(C) एक आँख से देखना
(D) युद्ध के लिए तैयार होना