चयन का अर्थ-चयन, बड़ी संख्या में रिक्त पद के सम्भावित उम्मीदवारों में से सर्वाधिक उपयुक्त व्यक्ति को पहचानने तथा खोजने की प्रक्रिया है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए, प्रत्याशियों को बड़ी संख्या क्रम में रोजगार परीक्षा तथा साक्षात्कार देने पड़ते हैं। प्रत्येक चरण में बहुत से प्रत्याशियों को निकाल दिया जाता है तथा कुछ ही अगली परीक्षा चरण में जाते हैं जब तक कि सही प्रकार के व्यक्ति नहीं मिल जाते हैं। वस्तुत: चयन की प्रक्रिया प्राप्त आवेदन-पत्रों की छंटनी/जाँच से प्रारम्भ हो जाती है। यह प्रक्रिया नियुक्ति पत्र मिलने, स्वीकार करने तथा उम्मीदवार के संस्था में प्रवेश के बाद तक भी जारी रह सकती है। चयन प्रक्रिया में किसी भी प्रबन्धन निर्णय के समान ही उम्मीदवार के सम्भावित निष्पादन की परख भी सम्मिलित है। अन्तिम रूप में चयन प्रक्रिया की उपयोगिता की परीक्षा चयनित व्यक्ति के कार्य-स्थल पर उसके सफल निष्पादन से होती है।
निष्कर्ष-चयन एक ऐसी विभेदात्मक क्रिया है जिसके अन्तर्गत उपयुक्त प्रार्थियों को रोजगार की उपलब्धि करायी जाती है एवं अनुपयुक्त प्रार्थियों को रोजगार देने से मना किया जाता है।