साहित्यिक परिचय डॉ. शर्मा के बहुमुखी व्यक्तित्व के अनुरूप ही उनकी भाषा के उनकी रचनाओं के अनुसार अनेक रूप हैं। उनकी भाषा में संस्कृत के तत्सम शब्दों की प्रधानता है किन्तु साथ ही उसमें आवश्यकता होने पर अंग्रेजी, उर्दू आदि भाषाओं के शब्दों को भी स्थान मिला है। डॉ. शर्मा ने अनेक शैलियों का प्रयोग अपनी रचनाओं में किया है। वर्णनात्मक, विचात्मक, विवरणात्मक, विवेचनात्मक शैलियों के साथ आपने समीक्षात्मक शैली को भी अपनाया है। यत्र-तत्र व्यंग्य शैली तथा उद्धरण शैली भी पाई जाती है।
कृतियाँ :
1.निबन्ध-संग्रह 'विराम चिह्न।
2.समीक्षा-भारतेन्दु और उनका युग, प्रेमचन्द और उनका युग, निराला की साहित्य-साधना (तीन खण्ड) इत्यादि।
3.भाषा-विज्ञान भारत के प्राचीन भाषा परिवार और हिन्दी (तीन खण्ड), भाषा और समाज आदि। 4.इतिहास और संस्कृति-भारत में अंग्रेजी राज और मार्क्सवाद, भारतीय संस्कृति और हिन्दी प्रदेश इत्यादि।
सम्मान एवं पुरस्कार-साहित्य अकादमी पुरस्कार (निराला की साहित्य साधना के लिए), भारत-भारती पुरस्कार, सोवियत भूमि नेहरू पुरस्कार, व्यास सम्मान, हिन्दी अकादमी दिल्ली का शलाका सम्मान।