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धातु का आवेशित गोला A नाइलॉन के धागे से निलंबित है। विद्युतरोधी हत्थी द्वारा किसी अन्य धातु के आवेशित गोले B को A के इतने निकट लाया जाता है कि चित्र (a) में दर्शाए अनुसार इनके केंद्रों के बीच की दूरी 10 cm है। गोले A के परिणामी प्रतिकर्षण को नोट किया जाता है (उदाहरणार्थ- गोले पर चमकीला प्रकाश पुंज डालकर तथा अंशांकित पर्दे पर बनी इसकी छाया का विक्षेपण मापकर)। A तथा B गोलों को चित्र (b) में दर्शाए अनुसार, क्रमश: अनावेशित गोलों C तथा D से स्पर्श कराया जाता है। तत्पश्चात चित्र (c) में दर्शाए अनुसार C तथा D को हटाकर B को A के इतना निकट लाया जाता है कि इनके केंद्रों के बीच की दूरी 5.0 cm हो जाती है। कूलॉम नियम के अनुसार A का कितना अपेक्षित प्रतिकर्षण है? गोले A तथा C एवं गोले B तथा D के साइज़ सर्वसम हैं। A तथा B के केंद्रों के पृथकन की तुलना में इनके साइज्ञों की उपेक्षा कीजिए।