Question
एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान बताओ।

Answer

स्वप्रयत्न

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क्लासिकी वैद्युतचुंबकीय सिद्धांत के अनुसार, हाइड्रोजन परमाणु में प्रोटॉन के चारों ओर परिक्रामी इलेक्ट्रॉन द्वारा उत्सर्जित प्रकाश की प्रारंभिक आवृत्ति परिकलित कीजिए।
$4 \times 10^{-9} C m$ द्विध्रुव आघूर्ण का कोई वैद्युत द्विध्रुव $5 \times 10^4 N C ^{-1}$ परिमाण के किसी एक समान विद्युत क्षेत्र की दिशा से $30^{\circ}$ पर संरेखित है। द्विध्रुव पर कार्यरत बल आघूर्ण का परिमाण परिकलित कीजिए।
$' \ell '$ लम्बाई की एक चालक छडको समरूप चुम्बकीय क्षेत्र 'B' मे लम्बवत रखकर इसे चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत नियत रेखीय चाल 'v' से चलाया जाए तो चालक छड़ के सिरों के मध्य प्रेरित विद्युत वाहक बल (गतिक विद्युत वाहक बल) ज्ञात कीजिए। आवश्यक चित्र बनाइए।
क्या किसी आवेशित वस्तु 'A' का सम्पूर्ण आवेश अन्य किसी वस्तु 'B' को स्थानान्तरित किया जा सकता है? यदि हाँ तो कैसे सम्भव होगा, यदि नहीं तो क्यों?
एक शक्तिशाली लाउडस्पीकर के चुम्बक के धुवों के बीच चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता के परिमाण का मापन किया जाना है। इस हेतु एक छोटी चपटी $2$ सेमी$^{.2}$ क्षेत्रफल की अन्वेषी कुण्डली $($search coil$)$ का प्रयोग किया गया है। इस कुण्डली में पास$-$पास लिपटे $25$ फेरे हैं तथा इसे चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् व्यवर्तिथ किया गया है और तब इसे दुत गति से क्षेत्र के बाहर निकाला जाता है। तुल्यतः एक अन्य विधि में अन्वेषी कुण्डली को $90^\circ$ से तेजी से घुमा देते हैं जिससे कुण्डली का तल चुम्बकीय क्षेत्र के समान्तर हो जाये। इन दोनों घटनाओं में कुल $7.5\ mC$ आवेश का प्रवाह होता है (जिसे परिपथ में प्रक्षेप धारामापी $($ballistic galvanometer$)$ लगाकर ज्ञात किया जा सकता है$)$। कुण्डली तथा धारामापी का संयुक्त प्रतिरोध $0.50 \Omega$ है। चुम्बक की क्षेत्र तीव्रता का आकलन कीजिए।
प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में होने वाले शक्ति क्षय की गणना करो, जिसमें विभव एवं धारा के मान निम्न हैं-
$V=3000 \sin \left(\omega t+\frac{\pi}{2}\right)$ एवं
$I=5 \sin \omega t$
क्या $\mathrm{p}-\mathrm{n}$ संधि बनाने के लिए हम p-प्रकार के अर्धचालक की एक पट्टी को $\mathrm{n}$-प्रकार के अर्धचालक से भौतिक रूप से संयोजित कर $\mathrm{p}-\mathrm{n}$संधि प्राप्त कर सकते हैं?

धातु का आवेशित गोला A नाइलॉन के धागे से निलंबित है। विद्युतरोधी हत्थी द्वारा किसी अन्य धातु के आवेशित गोले B को A के इतने निकट लाया जाता है कि चित्र (a) में दर्शाए अनुसार इनके केंद्रों के बीच की दूरी 10 cm है। गोले A के परिणामी प्रतिकर्षण को नोट किया जाता है (उदाहरणार्थ- गोले पर चमकीला प्रकाश पुंज डालकर तथा अंशांकित पर्दे पर बनी इसकी छाया का विक्षेपण मापकर)। A तथा B गोलों को चित्र (b) में दर्शाए अनुसार, क्रमश: अनावेशित गोलों C तथा D से स्पर्श कराया जाता है। तत्पश्चात चित्र (c) में दर्शाए अनुसार C तथा D को हटाकर B को A के इतना निकट लाया जाता है कि इनके केंद्रों के बीच की दूरी 5.0 cm हो जाती है। कूलॉम नियम के अनुसार A का कितना अपेक्षित प्रतिकर्षण है? गोले A तथा C एवं गोले B तथा D के साइज़ सर्वसम हैं। A तथा B के केंद्रों के पृथकन की तुलना में इनके साइज्ञों की उपेक्षा कीजिए।
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चुम्बकीय क्षेत्र की दिषा ज्ञात करने के लिए कोई दो नियम लिखिए।
निम्नलिखित दशाओं में प्रत्येक तरंगाग्र की आकृति क्या है? (a) किसी बिंदु स्रोत से अपसरित प्रकाश। (b) उत्तल लेन्स से निर्गमित प्रकाश, जिसके फोकस बिंदु पर कोई बिंदु स्रोत रखा है। (c) किसी दूरस्थ तारे से आने वाले प्रकाश तरंगाग्र का पृथ्वी द्वारा अवरोधित (intercepted) भाग।