घर्षण प्रक्रिया में निम्नलिखित बातें देखने को मिलती हैं-
(i) काँच की छड़ को रेशम से रगड़ने पर जितने धनावेश काँच की छड़ में स्थानान्तरित होते हैं, उतने ही ऋणावेश रेशम में।
(ii) एबोनाइट की छड़ को फर से रगड़ने पर जितने ऋणावेश एबोनाइट की छड़ में स्थानान्तरित होते हैं, उतने ही धनावेश फर में।
उपरोक्त बातों से स्पष्ट है कि आवेशों को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है बल्कि उन्हें एक वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानान्तरित किया जा सकता है। यहाँ पर कुल नेट आवेश का मान शून्य हो जाता है। ये सभी बातें आवेश संरक्षण के नियम के अनुसार ही हैं क्योंकि वियुक्त निकाय का कुल आवेश संरक्षित है।