Question
एस्टरीकरण अभिक्रिया की क्रियाविधि को समझाइए।

Answer

एस्टरीकरण की क्रियाविधि - कार्बोक्सिलिक अम्लों से एस्टर बनने की अभिक्रिया की व्याख्या निम्नलिखित क्रियाविधि की सहायता से की जा सकती है। समस्थानिक ऑक्सीजन $\binom{18}{O}$ युक्त यौगिकों के प्रयोग से यह सिद्ध हो गया है कि इस अभिक्रिया में बने जल में -OH समूह अम्ल से आता है न कि ऐल्कोहॉल से।
कार्बोक्सिलिक अम्लों की ऐल्कोहॉलों के साथ क्रिया द्वारा एस्टरों का बनना एक नाभिकस्नेही ऐसिल प्रतिस्थापन अभिक्रिया है। इसमें पहले कार्बोक्सिलिक अम्ल में उपस्थित कार्बोनिल समूह की ऑक्सीजन का प्रोटोनीकरण (Protonation) होता है, जिससे कार्बोनिल समूह, ऐल्कोहॉल के नाभिकस्नेही योग के लिए सक्रिय हो जाता है। इसके पश्चात् ऐल्कोहॉल के योग से बने मध्यवर्ती में प्रोटॉन का स्थानान्तरण - OH समूह को $-\stackrel{+}{ O } H _2$ में परिवर्तित कर देता है जो कि एक आसानी से निकलने वाला समूह होने के कारण, जल के अणु के रूप में निकल जाता है तथा इस प्रकार बना प्रोटॉनित एस्टर प्रोटॉन को त्यागकर एस्टर बना देता है।
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II - 0.2 4.0 $\times$ 10−2
III 0.4 0.4 -
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